🥀प्रेम-सुधा-रस-सिंधु की🌿
🌼स्वामिनी श्री सरकार:🌿
🥀जाकी कृपा-कटाच्छ कूँ🌿
🌼तरसत नन्दकुमार:🌿
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प्रेम-सुधा-रस-सिंधु की, स्वामिनी श्री सरकार:
श्री राधा रानी केवल प्रेम की देवी नहीं हैं, बल्कि वे प्रेम रूपी अमृत (सुधा) और रस के अगाध समुद्र (सिंधु) की साक्षात् स्वामिनी और अधीश्वरी (सरकार) हैं। ब्रज में 'सरकार' शब्द का प्रयोग सर्वोच्च सत्ता या सर्वोपरि शासक के लिए किया जाता है। यहाँ यह दर्शाया गया है कि संपूर्ण ब्रह्मांड में जो प्रेम और आनंद रस व्याप्त है, उसका मूल स्रोत और उस पर पूर्ण अधिकार केवल श्री राधा जी का ही है।
जाकी कृपा-कटाच्छ कूँ, तरसत नन्दकुमार:
'नन्दकुमार' अर्थात् स्वयं पूर्ण ब्रह्म भगवान श्री कृष्ण, जो पूरे संसार को नचाते हैं और जिनकी एक भृकुटि (भौं) के इशारे पर सृष्टि चलती है, वे कृष्ण भी श्री राधा रानी की एक 'कृपा-कटाच्छ' (कृपा भरी तिरछी चितवन या प्रेम भरी दृष्टि) को पाने के लिए निरंतर तरसते रहते हैं।
भावार्थ:
इस दोहे के माध्यम से ब्रज रस के उस सर्वोच्च सिद्धांत को दर्शाया गया है जहाँ 'शक्ति' (राधा) को 'शक्तिमान' (कृष्ण) से भी श्रेष्ठ माना गया है। भगवान श्री कृष्ण सर्वसमर्थ होते हुए भी राधा जी के प्रेम के अधीन हैं। चित्र में भी यही भाव जीवंत रूप में दिख रहा है, जहाँ नन्दकुमार श्री कृष्ण अत्यंत विनय भाव से बैठकर श्री किशोरी जी को मना रहे हैं, और राधा जी की मंद मुस्कान उनकी इसी अहैतुकी कृपा और करुणा को प्रकट कर रही है।
राधे राधे
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🙏सभी भक्तों का दिन शुभ और मंगलमय हो💐
🔱हर हर महादेव 🌹🚩🚩🚩
🌞जय श्री राम🏹🌹🚩🚩🚩
🕉️ जयश्रीकृष्णा 🌹🚩🚩🚩
📍जयजय हनुमानजी महाराज🙏🚩🚩🚩
🌿जय हो सुडसर धाम की 🙏🚩🚩🚩
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