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#🎤मेरी कविता-शायरी
🎤मेरी कविता-शायरी - *ख्वाबों* के पीछे ज़िन्दगी * उलझा* ली इतनी कि॰.. *हकीकत* में रहने का " सलीका ही *भूल* गए...फ़! *ख्वाबों* के पीछे ज़िन्दगी * उलझा* ली इतनी कि॰.. *हकीकत* में रहने का " सलीका ही *भूल* गए...फ़! - ShareChat