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#✡️ज्योतिष समाधान 🌟 #🌟देखिए खास ज्योतिष उपाय #💰आर्थिक समस्याओं का समाधान🔯 #🌸 सत्य वचन #🙏 प्रेरणादायक विचार
✡️ज्योतिष समाधान 🌟 - वन्ष्यानस्त्री को पुत्र॰प्राप्ति का मंत्र और साधन ३ परब्रह्म परमात्मने अभुकी गर्भ दीर्घजीविनं सुतं कुरु कुरु र्वाहा १ चिधि यह मन्त्र दस हजार को संख्या में जपने से सिद्ध होता है। मंञ्र ৯ িম খান ৭য' 'अमुकी ' शब्द् ग्र।या है, वहाँ उस स्त्रीो के नाम का उच्चा- करनना चाहिए, जिसके भर्भ ठहरने की श्राकांक्षा हो सिद्ध हो जाने मन्त्र के पश्चात् निम्नलिखित साधन करना चाहिएः  मार्ग शीर्ष ( अगहन ) ग्रथवा जेठ के महीने की पूर्एिमा ेे दिन घर॰को # गोबर 779 एक छः फोण का मण्डप बनावॅ कर वहाँ नवरत्न , सुवर्ण  सुगन्घित जल से पूर्ण नवीन कलश झो़ मददिका तथा =* को स्थापना तथा चारों ओर केले के खम्भ गाढ़ दें 1 तः्पश्चात् एकान्त में बैठ कर देवियों के नाम के मन्त्र से गन्घ, पुष्प घ्रक्षत , घृत, दोपक, नैवेद्य ग्रादि द्वारा (१ ) वाराही , ( २) ऐन्द्री , ( ३ ) ब्राह्मी , (४) माहेश्व री, ( ५) (६)   दैष्णवी ~ इन कौमारो , विघिवत् देवियों छः का पूजन   करें 1 कर्मकाण्डी   श्र।ह्मण से करानी चाहिए নহ্াল ೫  fur f೫ಗೇ' 77 तथा `देवीं देवता सिद्धि॰ नामक पुस्तक के ग्रनुसार पूजन कराना चाहिए इन छः देवियों को षट्कोण के एक एक कोने भें स्थापित करके   मन्त्राादि दिन तक पूजा करभीं चाहिए। ग्राठवें दिन एक कुमार, & =77%- से মান कन्याग्रों को भोजन करा के दक्षिणा   देकर, परिक्रमा प्रणाम নথা Tr বাছিব  पूजन तथा भोजनादि को समाप्ति फर जिन देवियों इस प्रकार 1 সয  } कोण   में उनका तथा कलश का नदौ मेंदेप्त्# स्थापिता किया गपा था, कर देना चाहिए वन्ष्यानस्त्री को पुत्र॰प्राप्ति का मंत्र और साधन ३ परब्रह्म परमात्मने अभुकी गर्भ दीर्घजीविनं सुतं कुरु कुरु र्वाहा १ चिधि यह मन्त्र दस हजार को संख्या में जपने से सिद्ध होता है। मंञ्र ৯ িম খান ৭য' 'अमुकी ' शब्द् ग्र।या है, वहाँ उस स्त्रीो के नाम का उच्चा- करनना चाहिए, जिसके भर्भ ठहरने की श्राकांक्षा हो सिद्ध हो जाने मन्त्र के पश्चात् निम्नलिखित साधन करना चाहिएः  मार्ग शीर्ष ( अगहन ) ग्रथवा जेठ के महीने की पूर्एिमा ेे दिन घर॰को # गोबर 779 एक छः फोण का मण्डप बनावॅ कर वहाँ नवरत्न , सुवर्ण  सुगन्घित जल से पूर्ण नवीन कलश झो़ मददिका तथा =* को स्थापना तथा चारों ओर केले के खम्भ गाढ़ दें 1 तः्पश्चात् एकान्त में बैठ कर देवियों के नाम के मन्त्र से गन्घ, पुष्प घ्रक्षत , घृत, दोपक, नैवेद्य ग्रादि द्वारा (१ ) वाराही , ( २) ऐन्द्री , ( ३ ) ब्राह्मी , (४) माहेश्व री, ( ५) (६)   दैष्णवी ~ इन कौमारो , विघिवत् देवियों छः का पूजन   करें 1 कर्मकाण्डी   श्र।ह्मण से करानी चाहिए নহ্াল ೫  fur f೫ಗೇ' 77 तथा `देवीं देवता सिद्धि॰ नामक पुस्तक के ग्रनुसार पूजन कराना चाहिए इन छः देवियों को षट्कोण के एक एक कोने भें स्थापित करके   मन्त्राादि दिन तक पूजा करभीं चाहिए। ग्राठवें दिन एक कुमार, & =77%- से মান कन्याग्रों को भोजन करा के दक्षिणा   देकर, परिक्रमा प्रणाम নথা Tr বাছিব  पूजन तथा भोजनादि को समाप्ति फर जिन देवियों इस प्रकार 1 সয  } कोण   में उनका तथा कलश का नदौ मेंदेप्त्# स्थापिता किया गपा था, कर देना चाहिए - ShareChat