sn vyas
#रामचरितमानस #🌺 श्री रामचरितमानस चौपाई 🌺
तुलसीकृत रामायण - अश्रुओं से लिखी गई करुणा🙏
गोस्वामी तुलसीदास जी ने रामायण नहीं लिखी... उन्होंने अपना हृदय खोलकर रख दिया।
तुलसीदास जी काशी की गलियों में भटक रहे थे। दर-दर की ठोकरें, समाज का तिरस्कार, और अंदर एक ही प्यास - "प्रभु के दर्शन"।
जब संसार ने दरवाजे बंद कर दिए, तब उन्होंने राम का दरवाजा खटखटाया।
हर चौपाई के पीछे एक आँसू है। हर दोहे में एक सिसकी है।
"*सिया राम मय सब जग जानी, करहुं प्रणाम जोरि जुग पानी*"
ये शब्द नहीं हैं मित्रों... ये एक टूटे हुए इंसान की प्रार्थना है।
तुलसीदास जी ने राम को राजा नहीं बनाया। उन्होंने राम को अपना भाई, अपना बेटा, अपना सखा बना लिया।
जब राम वनवास जाते हैं तो तुलसी रोते हैं।
जब सीता का हरण होता है तो तुलसी की छाती फटती है।
जब लक्ष्मण मूर्छित होते हैं तो लगता है तुलसी का अपना भाई गिर पड़ा।
इसीलिए पढ़ते समय लगता है कोई अपना ही दुख सुना रहा है।
*वनवास वाला दृश्य:*
"*पिता बचनु भयउ बन गमनू, तजि राजु रामु गए कननू*"
एक पंक्ति में पिता का वचन, राज का त्याग, और वन की राह... आँखें भर आती हैं।
चौदह साल तक खड़ाऊं रखकर राज्य चलाने वाला भाई... जब राम से मिलता है तो दोनों एक दूसरे के गले लगकर इतना रोते हैं कि अयोध्या की मिट्टी भी भीग जाती है।
तुलसी यहाँ सबसे ज्यादा रोए होंगे। एक पत्नी का अपमान... और राम का मौन। उस मौन में हजारों स्त्रियों का दर्द है।
क्योंकि ये कहानी नहीं है। ये आईना है।
इसमें रावण हमारा अहंकार है।
इसमें मंथरा हमारी कुटिलता है।
इसमें कैकेयी हमारा स्वार्थ है।
और राम... राम हमारी वो उम्मीद हैं जो सबसे बुरे समय में भी हाथ नहीं छोड़ते।
तुलसीदास जी ने हमें दोषी नहीं ठहराया। बस राम का चरित्र सामने रख दिया और कहा - "*देख लो, ऐसे जिया जाता है*"।
तुलसीकृत रामायण को पढ़कर कोई सूखी आँखों से नहीं उठ सकता।
क्योंकि ये ग्रंथ नहीं है... ये एक माँ की लोरी है, एक पिता का उपदेश है, एक मित्र का कंधा है।
जब दुनिया बहुत कठोर लगने लगे, जब मन का श्मशान जलने लगे... तब तुलसी की एक चौपाई सब घाव भर देती है:
*"राम नाम सुमिरत सब काजा। होत न मन में कछु पाजा॥"*
*जय सिया राम* 🌸