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#spritul word #biblical teachings #jesu sattus #Jesus is the Life #⛪✝️Growth Word of God ✝️⛪ 💒💝⛪
spritul word - @Daily Bread కైక్ यदि हम प्रभु येशू मसीह को प्रभु जानकर विश्वास करते तो है, परन्तु दिखावे की बाह्य धार्मिकता पर ही निर्भर होकर चल रहे है, परन्तु मसीह के के अनुसार अपने मन के नए आत्मिक स्वभाव में नहीं बदल रहे है, वचन वरन् आप ही अपने आप को धर्मी जता रहे हैं तो इसके मायने यह है कि हमारा प्रभु येशू मसीह से कोई नाता नहीं और हम उसके अनुग्रह से दूर हो गए हैं तथा हमने क्रूस के संदेश को नहीं समझा है। इसलिए ऐसी से हम परमेश्वर की महिमा पाने में आप ही अपने आप के लिए चालचलन ठोकर का कारण हो जाएंगे। क्योंकि हम जानते है कि परमेश्वर के आत्मा की अगुवाई के बिना हम मसीह येशू के स्वरूप में नहीं हो सकते हैं अर्थात परमेश्वर के पुत्र होकर नहीं रह सकते हैं और न ही मसीह में बने रह सकते है। क्योंकि कोई भी मसीह के बिना केवल बाह्यू धर्माचरण में चलते हुए परमेश्वर की धार्मिकता में बना नहीं रह सकता है (२ कुरून्थियों ५ २१) तथा प्रभु येशू मसीह से अलग होकर हम कुछ भी नहीं कर सकते हैं। इसलिए रोमियों ८ १४ में कहा गया है कि जो परमेश्वर के आत्मा के चलाए चलते है, वे ही परमेश्वर के पुत्र है। तथा हमारे केवल धर्माचरण में नहीं वरन् विश्वास में सामर्थ है, जो प्रेम के द्वारा प्रभाव करता है ( गलातियों ५ ६)i उस @Daily Bread కైక్ यदि हम प्रभु येशू मसीह को प्रभु जानकर विश्वास करते तो है, परन्तु दिखावे की बाह्य धार्मिकता पर ही निर्भर होकर चल रहे है, परन्तु मसीह के के अनुसार अपने मन के नए आत्मिक स्वभाव में नहीं बदल रहे है, वचन वरन् आप ही अपने आप को धर्मी जता रहे हैं तो इसके मायने यह है कि हमारा प्रभु येशू मसीह से कोई नाता नहीं और हम उसके अनुग्रह से दूर हो गए हैं तथा हमने क्रूस के संदेश को नहीं समझा है। इसलिए ऐसी से हम परमेश्वर की महिमा पाने में आप ही अपने आप के लिए चालचलन ठोकर का कारण हो जाएंगे। क्योंकि हम जानते है कि परमेश्वर के आत्मा की अगुवाई के बिना हम मसीह येशू के स्वरूप में नहीं हो सकते हैं अर्थात परमेश्वर के पुत्र होकर नहीं रह सकते हैं और न ही मसीह में बने रह सकते है। क्योंकि कोई भी मसीह के बिना केवल बाह्यू धर्माचरण में चलते हुए परमेश्वर की धार्मिकता में बना नहीं रह सकता है (२ कुरून्थियों ५ २१) तथा प्रभु येशू मसीह से अलग होकर हम कुछ भी नहीं कर सकते हैं। इसलिए रोमियों ८ १४ में कहा गया है कि जो परमेश्वर के आत्मा के चलाए चलते है, वे ही परमेश्वर के पुत्र है। तथा हमारे केवल धर्माचरण में नहीं वरन् विश्वास में सामर्थ है, जो प्रेम के द्वारा प्रभाव करता है ( गलातियों ५ ६)i उस - ShareChat