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#सत भक्ति संदेश 'कबीर वाणी' पढ़ि पढ़ाबै कछु नहीं, ब्राह्मण भक्ति ना जान। ब्याहै, श्राधै कारनै, बैठा सुन्दा तान।। अर्थात ब्राह्मण लोग गीता वेद आदि ग्रंथों से यथार्थ ज्ञान तो पढ़ते पढ़ाते भी नहीं हैं और भक्ति के विषय में कुछ भी नहीं जानते हैं।
सत भक्ति संदेश - SANES राजस्थान कबीर वाणी॰ पढ़ि पढ़ाबै कछु नही, ब्राह्यण भक्ति ना जान। ब्याहै, श्राधै कारनै , बैठा खुन्दा तान।। अर्थात ब्राह्यण लोग गीता वेद आदि ग्रंथों से यथार्थ ज्ञान पढ़ते पढ़ाते भी नही हैें और भक्ति विषय में कुछ भी नही जानते हैं। लेकिन शादी ब्याह और श्राद्धकर्म कराने में लोभवश मुंह फाड़कर बैठे रहते हैें। इसलिए श्राद्ध केवल धार्मिक धंधाा है Followus on: SANews Channel SANEWS.in SANews Rajasthan SANES राजस्थान कबीर वाणी॰ पढ़ि पढ़ाबै कछु नही, ब्राह्यण भक्ति ना जान। ब्याहै, श्राधै कारनै , बैठा खुन्दा तान।। अर्थात ब्राह्यण लोग गीता वेद आदि ग्रंथों से यथार्थ ज्ञान पढ़ते पढ़ाते भी नही हैें और भक्ति विषय में कुछ भी नही जानते हैं। लेकिन शादी ब्याह और श्राद्धकर्म कराने में लोभवश मुंह फाड़कर बैठे रहते हैें। इसलिए श्राद्ध केवल धार्मिक धंधाा है Followus on: SANews Channel SANEWS.in SANews Rajasthan - ShareChat