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#🙏गुरु महिमा😇 #🤗जया किशोरी जी🕉️ #🙏कर्म क्या है❓ #🙏🏻आध्यात्मिकता😇 #🙏गीता ज्ञान🛕
🙏गुरु महिमा😇 - || समुद्र का विनय || गहे चरन अपराधु छमाऊ। दीन्हिसिखावनु जो जेहि भाऊा। अर्थः समुद्र ने)प्रभु के चरण पकड़ लिए और कहा- मेरा अपराध क्षमा कीजिये। आपने जिसे जो स्वभाव दिया है, उसने वैसा ही किया। (ज्ञान और क्षमा का अद्भुत मिलन। ) || समुद्र का विनय || गहे चरन अपराधु छमाऊ। दीन्हिसिखावनु जो जेहि भाऊा। अर्थः समुद्र ने)प्रभु के चरण पकड़ लिए और कहा- मेरा अपराध क्षमा कीजिये। आपने जिसे जो स्वभाव दिया है, उसने वैसा ही किया। (ज्ञान और क्षमा का अद्भुत मिलन। ) - ShareChat