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#❤️अस्सलामु अलैकुम #mera islaam #ya ali
❤️अस्सलामु अलैकुम - हजरत अली फरमाते हैं) (रजी ) जिन्दगी में " परिशानियां" चाहे जितनी हो॰ "फ़िक्र" करने से और ज्यादा होती हे। "खामोश" होने से बिलकुल "कम"।  "सब्र" करने से "खत्म" हा जाती है। ओर अल्लाह का " शुक्र" अदा करने से "खुशियो" मे बदल जाती है। , @Guddujabasar हजरत अली फरमाते हैं) (रजी ) जिन्दगी में " परिशानियां" चाहे जितनी हो॰ "फ़िक्र" करने से और ज्यादा होती हे। "खामोश" होने से बिलकुल "कम"।  "सब्र" करने से "खत्म" हा जाती है। ओर अल्लाह का " शुक्र" अदा करने से "खुशियो" मे बदल जाती है। , @Guddujabasar - ShareChat