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2122 1212 22/112 चाहतो से तेरी में सँवरा हूँ इसलिये आज तक में ज़िन्दा हूँ क्यूँ सताते हो प्यार में हम को तेरे ही दिल का तो में टुकड़ा हूँ रूठ जाये ना ज़िन्दगी इक दिन हिज्र - ऐ - गम से तेरे डरता हूँ सह लिये सदमे सारे ही हम ने पी जहर जुल्म का में निखरा हूँ अच्छे ना थे इरादे तूफाँ के बस चिरागे वफ़ा सा जलता हूँ आ गये पास झूठे सब तेरे में वहीँ सच की राह ठहरा हूँ पहलू में देख गैर के तुमको टूटकर आईने सा बिखरा हूँ ( लक्ष्मण दावानी ✍ ) 1/4/2017 #शायरी #✒ शायरी #📚कविता-कहानी संग्रह #💝 शायराना इश्क़ #📜मेरी कलम से✒️
शायरी - तेरे ही दिल का तो ম বুক্ভা 8 चाहतो   से तेरी में सँवरा { इसलिये आज तक में ज़िन्दा क्यूँ सताते हो मोहब्बत में तुम तेरे ही दिल का तो में टुकडा हूँ ज़िन्दगी रूठ जाये ना इक दिन हिज्र - ऐ - गम   से तेरे डरता हूँ सह लिये कैसे कैसे सदमे सब पीजहर जुल्म का में निखरा हूँ थे इरादे अच्छे ना के तूफाँ ग बस चिरागे वफ़ा सा जलता हूँ पास झूठे सब तेरे 31 Tಶ में वहीं सच की राह ठहरा हूँ ೪[ पहलू में देख गै़र के तुमको टूटकर आईने सा बिखरा हूँ ल ( लक्ष्मण दावानी तेरे ही दिल का तो ম বুক্ভা 8 चाहतो   से तेरी में सँवरा { इसलिये आज तक में ज़िन्दा क्यूँ सताते हो मोहब्बत में तुम तेरे ही दिल का तो में टुकडा हूँ ज़िन्दगी रूठ जाये ना इक दिन हिज्र - ऐ - गम   से तेरे डरता हूँ सह लिये कैसे कैसे सदमे सब पीजहर जुल्म का में निखरा हूँ थे इरादे अच्छे ना के तूफाँ ग बस चिरागे वफ़ा सा जलता हूँ पास झूठे सब तेरे 31 Tಶ में वहीं सच की राह ठहरा हूँ ೪[ पहलू में देख गै़र के तुमको टूटकर आईने सा बिखरा हूँ ल ( लक्ष्मण दावानी - ShareChat