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#📒 मेरी डायरी #☝ मेरे विचार
📒 मेरी डायरी - जो वक़्त इधर है वो उधर क्यों नहीं जाता देकर मुझे ख़ुशियों की सहर क्यों नहीं जाता  है ख़्वाब अगर वो तो सँवर क्यों नहीं जाता पे हँसी बन के उतर क्यों नहीं जाता होठों  साँसों में उतरने का उसे शौक़ अगर है तो आ के मेरे दिल में ठहर क्यों नहीं जाता कटते हैं अगर चैन से दिन रात तेरे तो आँखों में ये ठहरा हुआ डर क्यों नहीं जाता हर एक से तकरार लडाई का है गर शौक़ तो जंग के मैदाँ में उतर क्यों नहीं जाता जो दर्द क़लम लिख नहीं सकती है तो " निर्मल ' वो ख॰र्वाबों ख्यालों से बिसर क्यों नहीं जाता जो वक़्त इधर है वो उधर क्यों नहीं जाता देकर मुझे ख़ुशियों की सहर क्यों नहीं जाता  है ख़्वाब अगर वो तो सँवर क्यों नहीं जाता पे हँसी बन के उतर क्यों नहीं जाता होठों  साँसों में उतरने का उसे शौक़ अगर है तो आ के मेरे दिल में ठहर क्यों नहीं जाता कटते हैं अगर चैन से दिन रात तेरे तो आँखों में ये ठहरा हुआ डर क्यों नहीं जाता हर एक से तकरार लडाई का है गर शौक़ तो जंग के मैदाँ में उतर क्यों नहीं जाता जो दर्द क़लम लिख नहीं सकती है तो " निर्मल ' वो ख॰र्वाबों ख्यालों से बिसर क्यों नहीं जाता - ShareChat