पंजाब की राजनीति में हलचल तेज हो गई है और मामला अब “गायब विधायक बनाम बचती सरकार” तक पहुंचता दिख रहा है। Aam Aadmi Party की अहम बैठक में 19 विधायकों का नहीं पहुंचना कई सवाल खड़े कर रहा है। पहले ही पार्टी के 7 राज्यसभा सांसद Bharatiya Janata Party में शामिल हो चुके हैं, ऐसे में इस अनुपस्थिति को महज इत्तेफाक मानना थोड़ा मुश्किल हो जाता है।
बैठक का मकसद साफ था—संभावित दलबदल को रोकना और विधायकों को एकजुट रखना। लेकिन जब इतने बड़े पैमाने पर विधायक ही नदारद हो जाएं, तो “सब ठीक है” वाली स्क्रिप्ट थोड़ी कमजोर पड़ जाती है। सियासी गलियारों में चर्चा तेज है कि क्या यह सिर्फ नाराजगी है या फिर किसी बड़े बदलाव की आहट?
इस पूरे घटनाक्रम के बीच Bhagwant Mann का राष्ट्रपति से मिलने का कार्यक्रम और भी दिलचस्प मोड़ जोड़ता है। आमतौर पर ऐसे कदम तब उठाए जाते हैं जब राजनीतिक अस्थिरता की आशंका बढ़ जाती है या फिर कोई संवैधानिक पहलू सामने हो।
अब सवाल सीधा है—क्या यह सिर्फ “अनुपस्थित विधायक” की कहानी है या पंजाब में कोई बड़ा “खेला” शुरू हो चुका है? फिलहाल तस्वीर पूरी साफ नहीं है, लेकिन संकेत यही बता रहे हैं कि आने वाले दिन पंजाब की राजनीति के लिए काफी अहम साबित हो सकते हैं।
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