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#❤️जीवन की सीख #👌रियलिटी शो #📒 मेरी डायरी #😎मोटिवेशनल गुरु🤘
❤️जीवन की सीख - वो भी क्या दौर था... जब घर छोटा था, पर दिल बहुत बड़े थे, पैसे कम थे, मगर रिश्ते बड़े खरे थे। एक थाली में खाते थे, एक ही छत के नीचे हंसते रोते थे, किसी के दुख में सब साथ होते थे, किसी की खुशी में सब अपने होते थे। सब कुछ है - সাত ঐমা; शोहरत, आराम... पर ना वो साथ है, ना वो अपनापन, हर रिश्ते में आ गया है कोई ना कोई ग़म। भाई-भाई से दूर हो गया, रिश्तों में ज़हर घुल गया, कभी जो जान थे एक॰दूसरे की, आज पैसों के लिए लड़ गया। ये कैसा समय आ गया है, जहां " मैं" जीत गया और "हम" हार गया... काश...फिर से वो दिन लौट आएं, जहां रिश्ते पैसे से नहीं, दिल से निभाए जाएं। वो भी क्या दौर था... जब घर छोटा था, पर दिल बहुत बड़े थे, पैसे कम थे, मगर रिश्ते बड़े खरे थे। एक थाली में खाते थे, एक ही छत के नीचे हंसते रोते थे, किसी के दुख में सब साथ होते थे, किसी की खुशी में सब अपने होते थे। सब कुछ है - সাত ঐমা; शोहरत, आराम... पर ना वो साथ है, ना वो अपनापन, हर रिश्ते में आ गया है कोई ना कोई ग़म। भाई-भाई से दूर हो गया, रिश्तों में ज़हर घुल गया, कभी जो जान थे एक॰दूसरे की, आज पैसों के लिए लड़ गया। ये कैसा समय आ गया है, जहां " मैं" जीत गया और "हम" हार गया... काश...फिर से वो दिन लौट आएं, जहां रिश्ते पैसे से नहीं, दिल से निभाए जाएं। - ShareChat