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#❤️जीवन की सीख
❤️जीवन की सीख - सतनामी समाज में अंतिम संस्कार के लिए गुरु घासीदास जी के सतनाम नियम / उपदेश सरल, सादा और सत्य मार्ग ही गुरु घासीदास जी की पहचान हे। अंधविश्वास आर कर्मकांड नही सत्य आर विवेक अपनाएं। मृत्यु को सत्य मानो । সাকৃনিক : जन्म हुआ हे तो मृत्यु निश्चित हे॰ इसलिए इसे अंधविश्वास से नहीं जोडना चाहिए। कफन संस्कार आवश्यक नहीं किसी भी मनुष्य के मृत्यु के याद केवल घर चाले अर्थात  मुखिया  एक सफेद कपड़ा से कफन करे, चाकी परिवार, समाज , नाते रिश्तेदार कफन संस्कार ना करें इसके बजाय मृतक परिवार को स्वेच्छा से आर्थिक सहयोग करें।  सादा और सरल अंतिम संस्कार करो। यह शरीर मिट्टी से चना 8 उसलिए मृत्यु के बाद शव को गिट्टी मे दफन संस्कार  अनावश्यक खर्चीले दाह सस्कार, नदी मेःशव प्रवारित ना करे जिससो आर्थक नुकसान , चायु जल प्रदूषित ठो। श्राद्घ, पिंडदान , तर्पण का त्याग किसी भी स्त्री-पुरुष, चच्चे-चूदे के मृत्यु के चाद 8 श्राद्, पिडदान, तर्पण, जेसे कर्मकांड आवश्यक नही। यह केचल कुछ चर्ग के आय का सापन ४। मृत्युभोज " का आयोजन न करें 5 नरक से मुक्ति+े अंधविश्वास आकर परिज   पुण्य  स्चर्ग பI9` तीजनहावन  यारही. तेरहीना कर पांचनहावन , दिशगात्र मृत्युभोज , दावत याबड़े खर्च का आयोजन ना करे। a अतिम संस्कार के चाद पर परिवार ओर दूर दराज से आए নব৮ रिश्तेदार को उसी दिन रोजमर्रा की भोजन कराए। ಖl दान-्दक्षिणा ना करें मृत्यु के नाम पर किसी को दान- दक्षिणा देना आवश्यक नही। यह केयल अधथिश्यास ऐ। फिसी भी मृत आत्मा को कोई की आवश्यकता नढी ठोती। वरन यष विशेष वर्ग फे सामान న ٧ ٢  सतनामी समाज में अंतिम संस्कार के लिए गुरु घासीदास जी के सतनाम नियम / उपदेश सरल, सादा और सत्य मार्ग ही गुरु घासीदास जी की पहचान हे। अंधविश्वास आर कर्मकांड नही सत्य आर विवेक अपनाएं। मृत्यु को सत्य मानो । সাকৃনিক : जन्म हुआ हे तो मृत्यु निश्चित हे॰ इसलिए इसे अंधविश्वास से नहीं जोडना चाहिए। कफन संस्कार आवश्यक नहीं किसी भी मनुष्य के मृत्यु के याद केवल घर चाले अर्थात  मुखिया  एक सफेद कपड़ा से कफन करे, चाकी परिवार, समाज , नाते रिश्तेदार कफन संस्कार ना करें इसके बजाय मृतक परिवार को स्वेच्छा से आर्थिक सहयोग करें।  सादा और सरल अंतिम संस्कार करो। यह शरीर मिट्टी से चना 8 उसलिए मृत्यु के बाद शव को गिट्टी मे दफन संस्कार  अनावश्यक खर्चीले दाह सस्कार, नदी मेःशव प्रवारित ना करे जिससो आर्थक नुकसान , चायु जल प्रदूषित ठो। श्राद्घ, पिंडदान , तर्पण का त्याग किसी भी स्त्री-पुरुष, चच्चे-चूदे के मृत्यु के चाद 8 श्राद्, पिडदान, तर्पण, जेसे कर्मकांड आवश्यक नही। यह केचल कुछ चर्ग के आय का सापन ४। मृत्युभोज " का आयोजन न करें 5 नरक से मुक्ति+े अंधविश्वास आकर परिज   पुण्य  स्चर्ग பI9` तीजनहावन  यारही. तेरहीना कर पांचनहावन , दिशगात्र मृत्युभोज , दावत याबड़े खर्च का आयोजन ना करे। a अतिम संस्कार के चाद पर परिवार ओर दूर दराज से आए নব৮ रिश्तेदार को उसी दिन रोजमर्रा की भोजन कराए। ಖl दान-्दक्षिणा ना करें मृत्यु के नाम पर किसी को दान- दक्षिणा देना आवश्यक नही। यह केयल अधथिश्यास ऐ। फिसी भी मृत आत्मा को कोई की आवश्यकता नढी ठोती। वरन यष विशेष वर्ग फे सामान న ٧ ٢ - ShareChat