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#❤️Love You ज़िंदगी ❤️ #📖जीवन का लक्ष्य🤔 #💓 मोहब्बत दिल से #❤️जीवन की सीख
❤️Love You ज़िंदगी ❤️ - Share Chat शिवभक्ति महिमा @Pa नारदमुनि हाथ में वीणा एक बार लिये, हरिगुणगान करते श्रीशंकरजी के " भगवन् मैंने पहुँचे और बोले- पास परन्तु कान्ति नगरी के इतने लोक देखे हैं, श्रियाल राजा के समान अतिशिवत्सल शिवभक्त किसी को नहीं देखा। ' इस बात को सुनकर शंकरजी ने कुरूप अधोरी- वेष बना उस राजा के पास जाकर आँखें लाल करके खाने को माँगा और इसी सिलसिले में किसी बहाने उनके लड़के को मरवा दिया। रानी और राजा को इससे कुछ भी शोक नहीं हुआ। उन्होंने अतिथिनसेवा में कोई त्रुटि न आने दी। भगवान् शंकर यह सब लीला देखनदेखकर मन-्ही-मन प्रसन्न हो उनके अतिथिन्सत्कार की प्रशंसा कर रहे थे।जब रसोई तैयार हो गयी तो वह यह कहते हुए लौटने लगे कि " तुम  के यहाँ मैं पुत्रहीनों भोजन नहीं करूँगा। ' अब तो अतिथि को रूठे देख राजा और रानी घबराये , उन्होंने इस संकट से बचाने के लिये भगवान् शिव से प्रार्थना की। कुरूप मनुष्य तुरन्त शिवजी के रूप में बदल TಾT 317 बोला - " तुम अपने বল্কীন ঐমা ৪ী কিমা जोर से पुत्र को पुकारो। ' ೩ ಸತಶ೯ ` और शिव की दयासे वह मृत पुत्र और होकर हँसता हुआ उनके सामने उपस्थित हो गया। कान्ति नगरी में चारों और आनन्द की धारा बह निकली। शिवलोक से तत्काल ही एक दिव्य विमान उतरा और राजा , रानी तथा बच्चे को लेकर कैलास को चला गया। शिवभक्ति की ऐसी ही महिमा है। Pindipt' Suo ` ऊँ नमःशिवाय Dpradiptgy pradipigya Share Chat शिवभक्ति महिमा @Pa नारदमुनि हाथ में वीणा एक बार लिये, हरिगुणगान करते श्रीशंकरजी के " भगवन् मैंने पहुँचे और बोले- पास परन्तु कान्ति नगरी के इतने लोक देखे हैं, श्रियाल राजा के समान अतिशिवत्सल शिवभक्त किसी को नहीं देखा। ' इस बात को सुनकर शंकरजी ने कुरूप अधोरी- वेष बना उस राजा के पास जाकर आँखें लाल करके खाने को माँगा और इसी सिलसिले में किसी बहाने उनके लड़के को मरवा दिया। रानी और राजा को इससे कुछ भी शोक नहीं हुआ। उन्होंने अतिथिनसेवा में कोई त्रुटि न आने दी। भगवान् शंकर यह सब लीला देखनदेखकर मन-्ही-मन प्रसन्न हो उनके अतिथिन्सत्कार की प्रशंसा कर रहे थे।जब रसोई तैयार हो गयी तो वह यह कहते हुए लौटने लगे कि " तुम  के यहाँ मैं पुत्रहीनों भोजन नहीं करूँगा। ' अब तो अतिथि को रूठे देख राजा और रानी घबराये , उन्होंने इस संकट से बचाने के लिये भगवान् शिव से प्रार्थना की। कुरूप मनुष्य तुरन्त शिवजी के रूप में बदल TಾT 317 बोला - " तुम अपने বল্কীন ঐমা ৪ী কিমা जोर से पुत्र को पुकारो। ' ೩ ಸತಶ೯ ` और शिव की दयासे वह मृत पुत्र और होकर हँसता हुआ उनके सामने उपस्थित हो गया। कान्ति नगरी में चारों और आनन्द की धारा बह निकली। शिवलोक से तत्काल ही एक दिव्य विमान उतरा और राजा , रानी तथा बच्चे को लेकर कैलास को चला गया। शिवभक्ति की ऐसी ही महिमा है। Pindipt' Suo ` ऊँ नमःशिवाय Dpradiptgy pradipigya - ShareChat