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#❤️जीवन की सीख
❤️जीवन की सीख - दौड़ती भागती इस में, एक दिन ठहरकर देखा दुनिया সন सबके पीछे भाग रहा था, बस खुद से ही दूर था मैं। कभी किसी की उम्मीदों का बोझ , कभी रिश्तों की जंजीरें को खुश करते करते , अंदर से कितना मजबूर था दूसरों मैं।ठ४ फिर एक रोज खामोशी से, अपनी ही रूह में झाँक 4, जो सवाल बाहर ढूँढ रहा था, उन्हें अपने ही अंदर बाँध लिया।  खुशियाँ तो, किसी की मोहताज नहीं होती, पता चला कि सच्ची मुस्कान तो दिल की, गहराइयों में ही है सोती। अब न किसी की तलाश है, न किसी को पाने की ज़िद, अपनी तन्हाई से दोस्ती की, तो मिल गई रूह की मुरीद। खुद का हाथ पकड़कर अब, सुहानी हर शाम लगती है, जो सुकून पहले कहीं नहीं था, अब वो मेरे नाम लगती గీ 4:03 PM दौड़ती भागती इस में, एक दिन ठहरकर देखा दुनिया সন सबके पीछे भाग रहा था, बस खुद से ही दूर था मैं। कभी किसी की उम्मीदों का बोझ , कभी रिश्तों की जंजीरें को खुश करते करते , अंदर से कितना मजबूर था दूसरों मैं।ठ४ फिर एक रोज खामोशी से, अपनी ही रूह में झाँक 4, जो सवाल बाहर ढूँढ रहा था, उन्हें अपने ही अंदर बाँध लिया।  खुशियाँ तो, किसी की मोहताज नहीं होती, पता चला कि सच्ची मुस्कान तो दिल की, गहराइयों में ही है सोती। अब न किसी की तलाश है, न किसी को पाने की ज़िद, अपनी तन्हाई से दोस्ती की, तो मिल गई रूह की मुरीद। खुद का हाथ पकड़कर अब, सुहानी हर शाम लगती है, जो सुकून पहले कहीं नहीं था, अब वो मेरे नाम लगती గీ 4:03 PM - ShareChat