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#💝 इज़हार-ए-मोहब्बत #💔मरीज-ए-इश्क❤ #💔 हार्ट ब्रेक स्टेटस #💔पुराना प्यार 💔 #🖋कहानी: टूटे दिल की💔
💝 इज़हार-ए-मोहब्बत - पंख निकलते ही परिंदे ठिकाना भूल जाते हें। दौलत ज़्यादा होतो बच्चे कमाना भूल जाते हैं अब कृष्ण सुदामा वाला दौर नही रहा जमाने में अब गरीब से लोग रिश्ते बताना भूल जाते हैं सोच समझ कर गुज़रना इश्क की राहों से इस पे क़दम पडते ही सब ठिकाना भूल जाते हे की लाठी समझ बडा तो करते है लेकिन॰ बुढ़ापे बूढ़ा माँ बाप बच्चों पे हक़ जताना भूल जाते हें कहते है नयी नस्ल में बेफ़िक्री का आलम है লা कितनी जल्दी वो अपना जमाना भूल जाते है ये सोच केवो बच्चों को स्कूल नही भेजते की बोझ दो किताब पढ़ के बच्चे उठाना भूल जाते हें. ! Sujeet shayar] पंख निकलते ही परिंदे ठिकाना भूल जाते हें। दौलत ज़्यादा होतो बच्चे कमाना भूल जाते हैं अब कृष्ण सुदामा वाला दौर नही रहा जमाने में अब गरीब से लोग रिश्ते बताना भूल जाते हैं सोच समझ कर गुज़रना इश्क की राहों से इस पे क़दम पडते ही सब ठिकाना भूल जाते हे की लाठी समझ बडा तो करते है लेकिन॰ बुढ़ापे बूढ़ा माँ बाप बच्चों पे हक़ जताना भूल जाते हें कहते है नयी नस्ल में बेफ़िक्री का आलम है লা कितनी जल्दी वो अपना जमाना भूल जाते है ये सोच केवो बच्चों को स्कूल नही भेजते की बोझ दो किताब पढ़ के बच्चे उठाना भूल जाते हें. ! Sujeet shayar] - ShareChat