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#इश्क मोहब्बत शायरी💖 #दिल💖के अल्फ़ाज़✍️ #🧿🧚‍♀️🎯❣️अल्फाजों की दुनियां जहाँ _सिर्फ तुम हो_नये ज़ज्बात_नये_अल्फाज के साथ _{लव शायरी}❣️🎯🧚‍♀️ #📖 कविता और कोट्स✒️ #✍️ साहित्य एवं शायरी
इश्क मोहब्बत शायरी💖 - तुम मेरी हस्ती मिटाते हो, मेरी कैसे मिटाओगे , कहानी मेरी शायरी मिटा भी दो, मेरा शायराना अंदाज़ कैसे मिटाओगे। लाख कोशिशें कर लो मुझे तोड़ने की॰ मेरी हिम्मत कैसे मिटाओगे , मैं दरिया की मस्त धारा हूँ, तुम धारा का बहाव कैसे मिटाओगे। चरागों को बुझा दोगे मगर, मेरी रगों का उजाला कैसे मिटाओगे , मेरी आवाज़़ दबा भी दो, ख़ामोशी का वो शोर कैसे मिटाओगे। पन्नों को जला दोगे चाहे , ज़हन के अल्फ़ाज़ कैसे मिटाओगे , शाखों को काट दोगे मगर, जड़ों की परवाज़ कैसे मिटाओगे | पर, मेरा खुला आसमान कैसे ज़मीन छीन लोगे मुझसे मिटाओगे , मंज़िलें बदल दोगे मेरी , सफ़र का वो जूनून कैसे मिटाओगे। थपेड़ों से तुम, मेरी पहचान कैसे मिटाओगे , वक्त के मैं वो हक़ीक़त हूँ जिसे , तुम अफ़साना कैसे बनाओगे। "मैं हकीकत हूं" डॉ मंजू तिवारी तुम मेरी हस्ती मिटाते हो, मेरी कैसे मिटाओगे , कहानी मेरी शायरी मिटा भी दो, मेरा शायराना अंदाज़ कैसे मिटाओगे। लाख कोशिशें कर लो मुझे तोड़ने की॰ मेरी हिम्मत कैसे मिटाओगे , मैं दरिया की मस्त धारा हूँ, तुम धारा का बहाव कैसे मिटाओगे। चरागों को बुझा दोगे मगर, मेरी रगों का उजाला कैसे मिटाओगे , मेरी आवाज़़ दबा भी दो, ख़ामोशी का वो शोर कैसे मिटाओगे। पन्नों को जला दोगे चाहे , ज़हन के अल्फ़ाज़ कैसे मिटाओगे , शाखों को काट दोगे मगर, जड़ों की परवाज़ कैसे मिटाओगे | पर, मेरा खुला आसमान कैसे ज़मीन छीन लोगे मुझसे मिटाओगे , मंज़िलें बदल दोगे मेरी , सफ़र का वो जूनून कैसे मिटाओगे। थपेड़ों से तुम, मेरी पहचान कैसे मिटाओगे , वक्त के मैं वो हक़ीक़त हूँ जिसे , तुम अफ़साना कैसे बनाओगे। "मैं हकीकत हूं" डॉ मंजू तिवारी - ShareChat