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#✒ गुलज़ार की शायरी 🖤 #💌शब्द से शायरी✒️ #✍️ अनसुनी शायरी #✍️ साहित्य एवं शायरी
✒ गुलज़ार की शायरी 🖤 - ८८ बिखेरे बैठा हूँ कमरे में सब कुछ कहीं इक ख्वाब रखा गुम है। था, वो भी अभ्युय साहित्य गुलज़ार 8 ८८ बिखेरे बैठा हूँ कमरे में सब कुछ कहीं इक ख्वाब रखा गुम है। था, वो भी अभ्युय साहित्य गुलज़ार 8 - ShareChat