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##मेरी जिंदगी कि हकीकत
#मेरी जिंदगी कि हकीकत - जब बाप मरता है तो ताऊ चाचा मामा मौसा बुवा सब मर जाते है, और जब माँ मरती है तो चाची माम मौसी सब साथ ही मर जाती है, माँ बाप के जाने के बाद कोई किसी का नहीं होता, जिस घर में माँ-बाप की छाया होती है, वहाँ गरीबी भी सुकून देती है, माँ-बाप सिर्फ रिश्ते नहीं होते, वे چ परिवार को जोड़ने वाली डोर होते है, उस दिन जिस दिन वह डोर टूटती कई उपतों की मिठास भी खत्म हो जाती है। जब बाप मरता है तो ताऊ चाचा मामा मौसा बुवा सब मर जाते है, और जब माँ मरती है तो चाची माम मौसी सब साथ ही मर जाती है, माँ बाप के जाने के बाद कोई किसी का नहीं होता, जिस घर में माँ-बाप की छाया होती है, वहाँ गरीबी भी सुकून देती है, माँ-बाप सिर्फ रिश्ते नहीं होते, वे چ परिवार को जोड़ने वाली डोर होते है, उस दिन जिस दिन वह डोर टूटती कई उपतों की मिठास भी खत्म हो जाती है। - ShareChat