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#✍️ साहित्य एवं शायरी #💝 शायराना इश्क़ #अल्फ़ाज़# #अधूरे अल्फ़ाज़ #🧒मेरा बचपन
✍️ साहित्य एवं शायरी - काँटों को दोष देना ठीक नहीं है, पार्थ... पैर तो हमने खुद रखे थे, वो तो अपनी जगह बिखलुल सही थे! काँटों को दोष देना ठीक नहीं है, पार्थ... पैर तो हमने खुद रखे थे, वो तो अपनी जगह बिखलुल सही थे! - ShareChat