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#जय श्री राधे
निधिवन वृंदावन का वह रहस्यमयी और दिव्य स्थान है, जिसके बारे में कहा जाता है कि यहाँ आज भी हर रात साक्षात भगवान श्रीकृष्ण और राधा रानी रास रचाते हैं।
यहाँ की मान्यताएँ और कहानियाँ जितनी अद्भुत हैं, उतनी ही डराने वाली भी (उन लोगों के लिए जो नियमों का पालन नहीं करते)।
निधिवन के दरवाजे शाम की आरती के बाद बंद कर दिए जाते हैं। मान्यता है कि सूर्यास्त के बाद यहाँ कोई भी मनुष्य, पशु या पक्षी नहीं रुकता। यहाँ तक कि बंदर, जो दिन भर यहाँ धमाचौकड़ी मचाते हैं, वे भी शाम होते ही वन छोड़कर चले जाते हैं। कहते हैं कि रात में यहाँ राधा-कृष्ण गोपियों संग रास करते हैं।
स्थानीय लोगों और पुजारियों के अनुसार, अगर कोई छिपकर इस रास को देखने की कोशिश करता है, तो वह या तो अंधा, बहरा या गूंगा हो जाता है, या उसकी मानसिक स्थिति बिगड़ जाती है। लोगों का मानना है कि दिव्य रास को देखने की शक्ति सामान्य इंसानी आंखों में नहीं होती।
टेढ़े-मेढ़े पेड़ (गोपियों का स्वरूप)
निधिवन के पेड़ बहुत ही विचित्र हैं। सामान्यतः पेड़ों की टहनियाँ ऊपर की ओर जाती हैं, लेकिन यहाँ के पेड़ों की टहनियाँ नीचे की ओर झुकी हुई हैं और आपस में गुथी हुई हैं।
मान्यता: ये पेड़ सामान्य पेड़ नहीं हैं, बल्कि श्रीकृष्ण की गोपियाँ हैं। रात के समय ये सभी पेड़ जीवित होकर राधा-कृष्ण के साथ नृत्य करते हैं और सुबह होते ही फिर से वृक्ष बन जाते हैं।
निधिवन के अंदर एक छोटा सा मंदिर है जिसे 'रंग महल' कहा जाता है। यहाँ रोज़ रात को पुजारी जी:
राधा रानी के लिए श्रृंगार का सामान (साड़ी, चूड़ी, चंदन)।
दातुन और पानी का लोटा।
बैठने के लिए सेज (बिस्तर) और पान रखते हैं।
आश्चर्य की बात यह है कि जब सुबह मंदिर खोला जाता है, तो बिस्तर की चादर अस्त-व्यस्त मिलती है, पान चबाया हुआ मिलता है और श्रृंगार का सामान उपयोग किया हुआ लगता है।
स्वामी हरिदास और बांके बिहारी का प्राकट्य
निधिवन वही स्थान है जहाँ संगीत सम्राट स्वामी हरिदास जी अपनी कुटिया में बैठकर मधुर भजन गाते थे। उनके गायन से प्रसन्न होकर राधा-कृष्ण उनके सामने साक्षात प्रकट हो गए थे।
स्वामी जी ने देखा कि प्रभु की छवि इतनी तेजमय है कि साधारण लोग इसे सहन नहीं कर पाएंगे, इसलिए उन्होंने प्रार्थना की कि प्रभु आप 'एक' रूप में यहीं बस जाएं। तब राधा-कृष्ण मिलकर एक विग्रह बन गए, जिन्हें आज हम 'बांके बिहारी जी' के नाम से जानते हैं।
निधिवन में तुलसी के पौधे जोड़ों में हैं। कहते हैं कि यदि कोई यहाँ से एक पत्ता भी ले जाने की कोशिश करता है, तो वह भारी संकट में पड़ जाता है।