“अहं ब्रह्मास्मि”
“तुम शरीर नहीं… तुम ऊर्जा हो।
तुम सीमित नहीं… तुम अनंत हो।
जब यह सत्य समझ में आता है,
तभी जीवन का असली आरंभ होता है।
सीमाएँ टूटने लगती हैं, भय समाप्त होने लगता है, और भीतर एक नई शक्ति का जन्म होता है।
यही वह क्षण है जहाँ से असली जीवन शुरू होता है — जागरूकता का जीवन, स्वतंत्रता का जीवन, आत्म-ज्ञान का जीवन।
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