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#❤️जीवन की सीख #☝अनमोल ज्ञान #🙏 प्रेरणादायक विचार #🤟 सुपर स्टेटस #😃 शानदार स्टेटस
❤️जीवन की सीख - जैसा करोगे वैस्ा पाओगे में एक दुकानदार था बहुत समय पहले की बात है। शहर से दूर गाँव जो अपने ही गांव के एक व्यक्ति से रोजाना एक किलो मक्खन खरीदा करता था। वो दुकानदार कई सालों से उस व्यक्ति से दुकानदार ने सोचा मक्खन की खरीददारी कर रहा था। एक दिन उस की में रोज इस व्यक्ति से मक्खन खरीदता हूँ लेकिन मैंने बहुत समय से इसके मक्खन का वजन तोल कर नहीं देखा। कल जांच करके देखूंगा की ये मुझे मक्खन एक किलो से कम तो नहीं देता। अगले दिन जब वो व्यक्ति मक्खन देकर गया तो उस दुकानदार ने मक्खन किया और देखा की मक्खन सिर्फ ९०० ग्राम ही है। उस  457 दुकानदार को काफी गुस्सा आ गया। वो व्यक्ति गुस्से में गाँव की पंचायत के पास गया और उसने उस व्यक्ति की शिकायत कर दी। की तुम पर गांव की पंचायत बैठी और उस व्यक्ति को बताया गया दुकानदार ने धोखा देने का आरोप लगाया है। तुम इस दुकानदार इस को देने वाले मक्खन के वजन में हेरा फेरी करते हो और हर बार तुम इसे एक किलो मक्खन की जगह सिर्फ ९०० ग्राम ही देते है। क्या #ತ್೯' कहना है? वो व्यक्ति बोला- सरपंच जी मैं तुम्हें अपनी सफाई  तो एक गरीब आदमी हूँ, मेरे पास वजन तोलने के लिए सही माप नहीं है। मैं रोज इस दुकानदार से अपने लिए एक किलो गेहूं खरीदता हूँ और अगले दिन उसी गेहूं को तराजू के एक तरफ रख कर इस दुकानदार के लिए मक्खन तोलता हूँ। अब आपको जो भी पूछना है इस दुकानदार से पूछिए। पंचायत में बैठे सभी लोगों को पूरी सच्चाई समझ आ गयी। और उन्होंने उस दुकानदार को गाँव से बाहर करवा दिया। सीखः  जैसे दुकानदार को अपनी ही चालाकी से नुकसान झेलना पड़ा उसी तरह हमें भी अपने कर्मों को वजह से कभी ना ক সাথ ব্রুবা কবক कभी नुकसान झेलना ही पड़ता है। दूसरों हम एक, दो या दस बार बच तो सकते हैँ लेकिन एक ना एक दिन उसका परिणाम हमें भुगतना ही पड़ता है। जैसा करोगे वैस्ा पाओगे में एक दुकानदार था बहुत समय पहले की बात है। शहर से दूर गाँव जो अपने ही गांव के एक व्यक्ति से रोजाना एक किलो मक्खन खरीदा करता था। वो दुकानदार कई सालों से उस व्यक्ति से दुकानदार ने सोचा मक्खन की खरीददारी कर रहा था। एक दिन उस की में रोज इस व्यक्ति से मक्खन खरीदता हूँ लेकिन मैंने बहुत समय से इसके मक्खन का वजन तोल कर नहीं देखा। कल जांच करके देखूंगा की ये मुझे मक्खन एक किलो से कम तो नहीं देता। अगले दिन जब वो व्यक्ति मक्खन देकर गया तो उस दुकानदार ने मक्खन किया और देखा की मक्खन सिर्फ ९०० ग्राम ही है। उस  457 दुकानदार को काफी गुस्सा आ गया। वो व्यक्ति गुस्से में गाँव की पंचायत के पास गया और उसने उस व्यक्ति की शिकायत कर दी। की तुम पर गांव की पंचायत बैठी और उस व्यक्ति को बताया गया दुकानदार ने धोखा देने का आरोप लगाया है। तुम इस दुकानदार इस को देने वाले मक्खन के वजन में हेरा फेरी करते हो और हर बार तुम इसे एक किलो मक्खन की जगह सिर्फ ९०० ग्राम ही देते है। क्या #ತ್೯' कहना है? वो व्यक्ति बोला- सरपंच जी मैं तुम्हें अपनी सफाई  तो एक गरीब आदमी हूँ, मेरे पास वजन तोलने के लिए सही माप नहीं है। मैं रोज इस दुकानदार से अपने लिए एक किलो गेहूं खरीदता हूँ और अगले दिन उसी गेहूं को तराजू के एक तरफ रख कर इस दुकानदार के लिए मक्खन तोलता हूँ। अब आपको जो भी पूछना है इस दुकानदार से पूछिए। पंचायत में बैठे सभी लोगों को पूरी सच्चाई समझ आ गयी। और उन्होंने उस दुकानदार को गाँव से बाहर करवा दिया। सीखः  जैसे दुकानदार को अपनी ही चालाकी से नुकसान झेलना पड़ा उसी तरह हमें भी अपने कर्मों को वजह से कभी ना ক সাথ ব্রুবা কবক कभी नुकसान झेलना ही पड़ता है। दूसरों हम एक, दो या दस बार बच तो सकते हैँ लेकिन एक ना एक दिन उसका परिणाम हमें भुगतना ही पड़ता है। - ShareChat