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कालिका पुराण में वर्णित आदिशक्ति माँ कामाख्या 🚩 कामरूप की दिव्य शक्ति, तांत्रिक साधना और आस्था का परम केंद्र। माँ की कृपा से भय मिटे, मन को शांति मिले और जीवन में शक्ति का संचार हो। 🙏🏻 जय माँ कामाख्या 🚩🙏🏻 #☀️శుభ మధ్యాహ్నం #🙏🏻సోమవారం భక్తి స్పెషల్ #🌻సోమవారం స్పెషల్ విషెస్ #🛕గౌహాటి శ్రీ కామాఖ్య అమ్మవారు🕉️ #🛕గౌహతి శ్రీ కామాఖ్య అమ్మవారు🕉️
☀️శుభ మధ్యాహ్నం - कालिका पुराण में HSq (3IA) देवी कामाख्या तीनों लोकों में दृवर्लभ कालिका सवोंत्तम तंत्रभूमि पुराण 85 आदिशक्ति का कामरूप स्वरूप कालिका पुराण एक प्राचीन शास्त तांत्रिक ग्रंथ है, जिसमें देवी कामाख्या की उत्पत्ति. महिमा. साधना शास्त्र तांत्रिक यहां की साधना व कामरूप क्षेत्र का विस्तार से वर्णन है। प्राचीन ग्रंथ शैब सिद्विदाविनी और पूणं सिक्ियों की प्रदाता है। ওননি কথা सती ने दक्ष के यद में देह U@ त्याग दी॰ तब भगवया शिव उनका शरीर लेकर विलाप करने लगे। तब भगवान विष्णु ने বক্ক ম মনী ক 3যা सुदर्शन अर्थ ' कामाख्या नाम का को विभाजित किया| जहां নী কা যীনিপায দিহ, सृष्टि शक्ति, काम = इच्छा वही स्थान कामरूप और प्रेम और कामना कामाख्या पीठ कहलाया | प्रकट होने वाली आख्या अर्थातू जो समस्त इच्छाओं को पूर्ण करें और सूष्टि की मूल शक्ति हों, वही कामाख्या हें। देवी का स्वरूप নাপসিক সঙ্ন कामाख्या पीठ देवी स्वख्रर्णा, दिव्य तेजस्विनी देवी तंत्रमार्ग की सवोंच्च अधिग्ठात्री हैं। जहाँ गिरा देवी सती का योनिभाग और करूणामयी हैं।वे उग्र तथा उनकी उपासना से मंत्र सिद्धि प्राप्त होती हैं दोनों रूयों में पूजित हैं। सौम्य साधक को भय, रोग, शत्रु और बाधाओं सिंहत्ाम पर विराजमान , रल्नाभूषणों से मुक्ति मिलती है। से विभूषित तथा समस्त शक्तियों योगिनी, भैरवी और महावियाओं की अधिष्ठात्री हैं। साधना यहों शीग्र सिद्ध होती है। अम्वुवाची पर्व में देवी की विशेष शक्ति जागृत मानी जाती हैं। कामाख्या मंदिर, (37) गुवाहाटी अम्बुवाची महापर्व देवी की कृपा से प्राप्त फल आदिशक्ति का परम पवित्र तांत्रिक पीठ देवी रक़स्वती मास में आथ्यात्मिक उन्नति आषाढ होती हैं। तीन दिनों तक मंदिर मंत्र एवं तंत्र सिद्धि के द्वार बंद रहते हैं। चौथे दिन जो भक्त श्रद्घा और संयम सें भय और नकारात्मक शक्तियों से रक्षा देवी के दर्शन होते हें। इस समय देवी कामाख्या की उपासना करता है, देवी की शक्ति अत्यंत प्रबल धन, ऐश्वर्य और यश की प्राप्ति और जागृत मानी जाती हैं । देवी उसकी कामनाओं को पूर्ण कर সীঃা কী সাদি उसे अंततः परमशक्ति का अनुभव कराती हैं ।" ऊँ ऐं हीं क्लीं चामुण्डायै विच्चे जय मा कामाख्या कालिका पुराण में HSq (3IA) देवी कामाख्या तीनों लोकों में दृवर्लभ कालिका सवोंत्तम तंत्रभूमि पुराण 85 आदिशक्ति का कामरूप स्वरूप कालिका पुराण एक प्राचीन शास्त तांत्रिक ग्रंथ है, जिसमें देवी कामाख्या की उत्पत्ति. महिमा. साधना शास्त्र तांत्रिक यहां की साधना व कामरूप क्षेत्र का विस्तार से वर्णन है। प्राचीन ग्रंथ शैब सिद्विदाविनी और पूणं सिक्ियों की प्रदाता है। ওননি কথা सती ने दक्ष के यद में देह U@ त्याग दी॰ तब भगवया शिव उनका शरीर लेकर विलाप करने लगे। तब भगवान विष्णु ने বক্ক ম মনী ক 3যা सुदर्शन अर्थ ' कामाख्या नाम का को विभाजित किया| जहां নী কা যীনিপায দিহ, सृष्टि शक्ति, काम = इच्छा वही स्थान कामरूप और प्रेम और कामना कामाख्या पीठ कहलाया | प्रकट होने वाली आख्या अर्थातू जो समस्त इच्छाओं को पूर्ण करें और सूष्टि की मूल शक्ति हों, वही कामाख्या हें। देवी का स्वरूप নাপসিক সঙ্ন कामाख्या पीठ देवी स्वख्रर्णा, दिव्य तेजस्विनी देवी तंत्रमार्ग की सवोंच्च अधिग्ठात्री हैं। जहाँ गिरा देवी सती का योनिभाग और करूणामयी हैं।वे उग्र तथा उनकी उपासना से मंत्र सिद्धि प्राप्त होती हैं दोनों रूयों में पूजित हैं। सौम्य साधक को भय, रोग, शत्रु और बाधाओं सिंहत्ाम पर विराजमान , रल्नाभूषणों से मुक्ति मिलती है। से विभूषित तथा समस्त शक्तियों योगिनी, भैरवी और महावियाओं की अधिष्ठात्री हैं। साधना यहों शीग्र सिद्ध होती है। अम्वुवाची पर्व में देवी की विशेष शक्ति जागृत मानी जाती हैं। कामाख्या मंदिर, (37) गुवाहाटी अम्बुवाची महापर्व देवी की कृपा से प्राप्त फल आदिशक्ति का परम पवित्र तांत्रिक पीठ देवी रक़स्वती मास में आथ्यात्मिक उन्नति आषाढ होती हैं। तीन दिनों तक मंदिर मंत्र एवं तंत्र सिद्धि के द्वार बंद रहते हैं। चौथे दिन जो भक्त श्रद्घा और संयम सें भय और नकारात्मक शक्तियों से रक्षा देवी के दर्शन होते हें। इस समय देवी कामाख्या की उपासना करता है, देवी की शक्ति अत्यंत प्रबल धन, ऐश्वर्य और यश की प्राप्ति और जागृत मानी जाती हैं । देवी उसकी कामनाओं को पूर्ण कर সীঃা কী সাদি उसे अंततः परमशक्ति का अनुभव कराती हैं ।" ऊँ ऐं हीं क्लीं चामुण्डायै विच्चे जय मा कामाख्या - ShareChat