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#📖Whatsapp शायरी
📖Whatsapp शायरी - सिकंदरी का मुक़द्दर नहीं मिला। ठहरी दर छोड़ दिया फिर तो कोई दर नहीं मिला। हर रोज़ सोचते थे कि हम लौट जाएँगे , लौटे तो अपने घर में अपना घर नहीं मिला। सिकंदरी का मुक़द्दर नहीं मिला। ठहरी दर छोड़ दिया फिर तो कोई दर नहीं मिला। हर रोज़ सोचते थे कि हम लौट जाएँगे , लौटे तो अपने घर में अपना घर नहीं मिला। - ShareChat