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#ಬ್ರಹ್ಮಾಕುಮಾರೀಸ್ #🙏ಭಕ್ತಿಮಯ ಕೋಟ್ಸ್😇 #🙏 ಆಧ್ಯಾತ್ಮ #😇ಬ್ರಹ್ಮಾಕುಮಾರೀಸ್ #📚ಆಧ್ಯಾತ್ಮಿಕ ಬರಹಗಳು🙏
ಬ್ರಹ್ಮಾಕುಮಾರೀಸ್ - मातेश्वरी जगदम्बा सरस्वती स्मृति दिवस प्रातःमुरली ओउंम् शान्ति 24-06-26 मधुबन BRAHMA KUMARIS ॰इस कर्मक्षेत्र पर कर्म अनादि चीज है, तुम्हें कर्म छोड़ना नहीं है लेकिन कर्मयोगी बनना है॰ fs परमात्मा कहते हैं मेरा काम आत्माओं को माया के बंधनों से छुड़ाकर वापस ले जाना है। हर चीज़ का नियम है बढ़ना और फिर कम होना शरीर, सृष्टि, जन्म, धर्म सब नियम से चलते हैं। परमात्मा भी एक आत्मा हैं, परन्तु उनका कर्तव्य विशाल महान और निराला है। गोंड इज ट्रूय - परमात्मा ही आकर सभी बातों की सच्चाई बताते हैं, वही सर्वज्ञ, नोंलेजफुल हैं। कर्म छोड़ना नहीं, कर्म को पवित्र बनाना है - यही कर्मयोग श्रेष्ठ है। योग का कवच और ज्ञान की तलवार से माया के आक्रमण से बचना है। संगमयुग छोटा है थोड़े समय की मेहनत से यह अकर्म स्थिति प्राप्त होती हैं। सृष्टि कर्म का खेत है। यह माया से बचने के लिए - हियर नो इविल, सी नो इविल , आत्मा अपना-अपना पार्ट प्ले कर रही है। टोंक नो इविल में रहो। इस अथ्यास परमात्मा आत्माओं को सभी बंधनों से याद, दृढ़ता, धारणाओं में रहने का पूरा प्रयत्न करो - बाप का छुडाकर वापस ले जाने आते हैं। साथ सदा रखो, सफलता सुनिश्ित है। ?IR P वरदान अव्यक्त सदा हर्षित रहने के लिए अपनी बाप-्दादा के साथ द्वारा माया को दूर से ही मूर्छित करने वाले नेचर को सरल बनाओ , मायाजीत , जगतजीत भव। सहनशील बनो। अपनी ऊंची वृत्ति से प्रवृत्ति की परिस्थितियों सरलता , श्रेषता और सहनशीलता साथ की शत्ति से, हर कार्य बाप के साथ इन तीन बातों पर ध्यान दो। हर कार्य तो माया दूर से ही मूर्खित हो जायेगी को चेंज करो। करो में सहनशीलता और वाणी में सरलता डिस्ट्रक्शन हो जायेगा | और उसका धारण करो, तब सर्विस में सफलता दिखाई देगी| 35 হাালি मातेश्वरी जगदम्बा सरस्वती स्मृति दिवस प्रातःमुरली ओउंम् शान्ति 24-06-26 मधुबन BRAHMA KUMARIS ॰इस कर्मक्षेत्र पर कर्म अनादि चीज है, तुम्हें कर्म छोड़ना नहीं है लेकिन कर्मयोगी बनना है॰ fs परमात्मा कहते हैं मेरा काम आत्माओं को माया के बंधनों से छुड़ाकर वापस ले जाना है। हर चीज़ का नियम है बढ़ना और फिर कम होना शरीर, सृष्टि, जन्म, धर्म सब नियम से चलते हैं। परमात्मा भी एक आत्मा हैं, परन्तु उनका कर्तव्य विशाल महान और निराला है। गोंड इज ट्रूय - परमात्मा ही आकर सभी बातों की सच्चाई बताते हैं, वही सर्वज्ञ, नोंलेजफुल हैं। कर्म छोड़ना नहीं, कर्म को पवित्र बनाना है - यही कर्मयोग श्रेष्ठ है। योग का कवच और ज्ञान की तलवार से माया के आक्रमण से बचना है। संगमयुग छोटा है थोड़े समय की मेहनत से यह अकर्म स्थिति प्राप्त होती हैं। सृष्टि कर्म का खेत है। यह माया से बचने के लिए - हियर नो इविल, सी नो इविल , आत्मा अपना-अपना पार्ट प्ले कर रही है। टोंक नो इविल में रहो। इस अथ्यास परमात्मा आत्माओं को सभी बंधनों से याद, दृढ़ता, धारणाओं में रहने का पूरा प्रयत्न करो - बाप का छुडाकर वापस ले जाने आते हैं। साथ सदा रखो, सफलता सुनिश्ित है। ?IR P वरदान अव्यक्त सदा हर्षित रहने के लिए अपनी बाप-्दादा के साथ द्वारा माया को दूर से ही मूर्छित करने वाले नेचर को सरल बनाओ , मायाजीत , जगतजीत भव। सहनशील बनो। अपनी ऊंची वृत्ति से प्रवृत्ति की परिस्थितियों सरलता , श्रेषता और सहनशीलता साथ की शत्ति से, हर कार्य बाप के साथ इन तीन बातों पर ध्यान दो। हर कार्य तो माया दूर से ही मूर्खित हो जायेगी को चेंज करो। करो में सहनशीलता और वाणी में सरलता डिस्ट्रक्शन हो जायेगा | और उसका धारण करो, तब सर्विस में सफलता दिखाई देगी| 35 হাালি - ShareChat