ShareChat
click to see wallet page
search
##मेरी जिंदगी कि हकीकत
#मेरी जिंदगी कि हकीकत - कोई भी मनुष्य किस बात को, किस प्रकार से समझता है। यह उसकी मानसिकता तय करती है। कोई ೯ की थाली में से भी॰ छीन कर खाने में अपनी शान समझता है तो कोई अपनी थाली में से दूसरों को, निवाले संतुष्ट होता है। सारा खेल खिला कर संस्कारों , समझ, और मानसिकता का है लेकिन एक बात तो तय है कि छीन कर, खाने वालों का कभी पेट नहीं भरता। और बाँट कर खाने बाले, कभी भी भूखे नहीं रहते | कोई भी मनुष्य किस बात को, किस प्रकार से समझता है। यह उसकी मानसिकता तय करती है। कोई ೯ की थाली में से भी॰ छीन कर खाने में अपनी शान समझता है तो कोई अपनी थाली में से दूसरों को, निवाले संतुष्ट होता है। सारा खेल खिला कर संस्कारों , समझ, और मानसिकता का है लेकिन एक बात तो तय है कि छीन कर, खाने वालों का कभी पेट नहीं भरता। और बाँट कर खाने बाले, कभी भी भूखे नहीं रहते | - ShareChat