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#☝रहीम की सीख🌟 #रहीम के दोहे 🌻 #✍रहीम के दोहे 🖊 #रहीम के दोहे #रहीम के दोहे💕💕
☝रहीम की सीख🌟 - 0 న वृक्ष कबहूँ नहीं फल भखैं, नदी न संचै नीर। परमारथ के कारने , साधुपिटinti सरीर।। रहीम के दोहे अर्थः वृक्ष कभी अपने फल नहीं खाते, f नदी कभी अपने जल संचित नहीं करती उसी प्रकार सज्जन पुरुष परोपकार के लिए देह धारण करते हैं। 0 న वृक्ष कबहूँ नहीं फल भखैं, नदी न संचै नीर। परमारथ के कारने , साधुपिटinti सरीर।। रहीम के दोहे अर्थः वृक्ष कभी अपने फल नहीं खाते, f नदी कभी अपने जल संचित नहीं करती उसी प्रकार सज्जन पुरुष परोपकार के लिए देह धारण करते हैं। - ShareChat