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#🎤मेरी कविता-शायरी
🎤मेरी कविता-शायरी - *जिन्होंने * तुम्हें समंदर के बीच में *छोड़ दिया* फिर उनका. कोई हक *नहीं * बनता ये *जानने * कि तुम *किनारे* तक पहुंचे CగT की *नहीं...!!* *जिन्होंने * तुम्हें समंदर के बीच में *छोड़ दिया* फिर उनका. कोई हक *नहीं * बनता ये *जानने * कि तुम *किनारे* तक पहुंचे CగT की *नहीं...!!* - ShareChat