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#जय श्री कृष्णा
जय श्री कृष्णा - हे धनंजय.॰ रीफों के पुल के नीचे बहती लालच की धारा को पहचानो॰.. क्योंकि हर प्रशंसा सत्य नहीं होती , कुछ केवल स्वार्थ का जाल होती हैं। शब्दों से ऊँचा उठाते हैं, वे ही तुम्हें जो तुम्हें भ्रम के जाल में गिरा सकते हैं। इसलिए मन को स्थिर रखो और बुद्धि को जागृत, क्योंकि सच्चा मार्ग वही है, जहाँ नीयत निर्मल और कर्म निष्कलंक हों l"** हे धनंजय.॰ रीफों के पुल के नीचे बहती लालच की धारा को पहचानो॰.. क्योंकि हर प्रशंसा सत्य नहीं होती , कुछ केवल स्वार्थ का जाल होती हैं। शब्दों से ऊँचा उठाते हैं, वे ही तुम्हें जो तुम्हें भ्रम के जाल में गिरा सकते हैं। इसलिए मन को स्थिर रखो और बुद्धि को जागृत, क्योंकि सच्चा मार्ग वही है, जहाँ नीयत निर्मल और कर्म निष्कलंक हों l"** - ShareChat