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#✍️ साहित्य एवं शायरी #📓 हिंदी साहित्य #💚 लाइफ़ की शायरी #📚कविता-कहानी संग्रह #एक रचना रोज़✍
✍️ साहित्य एवं शायरी - कैसे छोड़ दूँ तुम्हें यूँ याद करना, माना कि तुम मेरी किस्मत में नहीं। पर इस दिल का मैं क्या करूँ बताओ , जहाँ तुम सा कोई और हकीकत में नहीं। हाथों की लकीरों ने भले ही साथ न दिया, पर रूह ने तो तुम्हें अपना मान लिया। मंजिलें जुदा हुईं तो क्या गम है हमें , इन यादों के सहारे ही मैंने जीना सीख लिया। मुकद्दर के पन्नों पर भले ही न लिखे हो, ব্রুহ मेरी हर दुआ के हर लफ्ज़ में तुम ही हो। స్లౌ तो बस जिस्मों और रास्तों की है, दिल की हर धड़कन के मालिक तुम ही हो। true_words कैसे छोड़ दूँ तुम्हें यूँ याद करना, माना कि तुम मेरी किस्मत में नहीं। पर इस दिल का मैं क्या करूँ बताओ , जहाँ तुम सा कोई और हकीकत में नहीं। हाथों की लकीरों ने भले ही साथ न दिया, पर रूह ने तो तुम्हें अपना मान लिया। मंजिलें जुदा हुईं तो क्या गम है हमें , इन यादों के सहारे ही मैंने जीना सीख लिया। मुकद्दर के पन्नों पर भले ही न लिखे हो, ব্রুহ मेरी हर दुआ के हर लफ्ज़ में तुम ही हो। స్లౌ तो बस जिस्मों और रास्तों की है, दिल की हर धड़कन के मालिक तुम ही हो। true_words - ShareChat