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#✒ गुलज़ार की शायरी 🖤 #💞Heart touching शायरी✍️ #💓 मोहब्बत दिल से #mera adhura isq💔😢
✒ गुलज़ार की शायरी 🖤 - ट्ूटा दिल - सुनो आज तुमसे कुछ कहना है मुझे नहीं पर मेरे दिल को.. माना की तुमने यह तोड़ दिया मुझे अपने बनाकर पहले मुझे समझा और जाना फिर मुझे यूं ही अकेला छोड़ दिया अगर तुम मुझे मेहसूस कर पा रहे हो तो मेरे शब्द तुम्हे शब्द नहीं बल्कि कोई किस्सा लगेगा ज़रा संभल के हो सकता ये कांच के जेसे तुम्हे चूभेगा मेरा इरादा तुमसे अलग है माफकरना वो किसी को चोट नहीं पहुंचता है वो तो सिर्फ अल्फाजों से अपना हाल ऐ दिल बताता है देखो तुम्हारे जाने का अफ़सोस तो इस दिल को बहुत हुआ पर सुनो मै रोई नहीं थी हां बस रात में जागी शयाद तन्हाई में सोई नहीं थी और तुम मेरे लिए क्या थे मैंने किसी को बताया नहीं था मैंने बड़ी मुश्किल से अपनी उदासी को अपनी हसीं : से छुपाया ' ٢ अक्सर ही तुम याद ' जाते हो मुझे T के छोड़ देती हूं परवो याद मै सिर्फ एक ख्याल समझ और तुम्हरी यादों के पल सिर्फ मुझे नहीं मेरे उस तकीए को भी पता हैं जो छुपकर हमारी बातों को सुनता था देखो मुझे नहीं पता तुम्हारी क्या मज़बूरी थीं पर अगर मै पीछे मुड़कर देखूंतो शायद ये जुदाई भी ज़रूरी थी पर यह मत समझना कि मै और मेरा दिल तुमसे नाराज़ है बस कुछ है तो अफ़सोस और वो भी इस कागज़ और क़लम के हिस्से के मोहताज है पर शायद जो प्यार था तुमसे वो इश्क़ अब दुबारा नहीं हो पायेगा और मेरा दिल किसी और का नहीं सिर्फ मेरा होकर ही रह जाएगा ट्ूटा दिल - सुनो आज तुमसे कुछ कहना है मुझे नहीं पर मेरे दिल को.. माना की तुमने यह तोड़ दिया मुझे अपने बनाकर पहले मुझे समझा और जाना फिर मुझे यूं ही अकेला छोड़ दिया अगर तुम मुझे मेहसूस कर पा रहे हो तो मेरे शब्द तुम्हे शब्द नहीं बल्कि कोई किस्सा लगेगा ज़रा संभल के हो सकता ये कांच के जेसे तुम्हे चूभेगा मेरा इरादा तुमसे अलग है माफकरना वो किसी को चोट नहीं पहुंचता है वो तो सिर्फ अल्फाजों से अपना हाल ऐ दिल बताता है देखो तुम्हारे जाने का अफ़सोस तो इस दिल को बहुत हुआ पर सुनो मै रोई नहीं थी हां बस रात में जागी शयाद तन्हाई में सोई नहीं थी और तुम मेरे लिए क्या थे मैंने किसी को बताया नहीं था मैंने बड़ी मुश्किल से अपनी उदासी को अपनी हसीं : से छुपाया ' ٢ अक्सर ही तुम याद ' जाते हो मुझे T के छोड़ देती हूं परवो याद मै सिर्फ एक ख्याल समझ और तुम्हरी यादों के पल सिर्फ मुझे नहीं मेरे उस तकीए को भी पता हैं जो छुपकर हमारी बातों को सुनता था देखो मुझे नहीं पता तुम्हारी क्या मज़बूरी थीं पर अगर मै पीछे मुड़कर देखूंतो शायद ये जुदाई भी ज़रूरी थी पर यह मत समझना कि मै और मेरा दिल तुमसे नाराज़ है बस कुछ है तो अफ़सोस और वो भी इस कागज़ और क़लम के हिस्से के मोहताज है पर शायद जो प्यार था तुमसे वो इश्क़ अब दुबारा नहीं हो पायेगा और मेरा दिल किसी और का नहीं सिर्फ मेरा होकर ही रह जाएगा - ShareChat