लाडले की बहादुरी का 'कीर्ति चक्र' लेने पहुंची मां! 6 जुलाई को दो खूंखार आतंकियों को ढेर कर अमर हुआ था भारत का लाल!
6 जुलाई 2024... कुलगाम का वो खूनी हफ्ता कोई नहीं भूल सकता, जब गोलियों की तड़तड़ाहट के बीच भारत मां के एक लाडले ने शौर्य की नई इबारत लिखी थी। शहीद सिपाही जंजाल प्रविण प्रभाकर—वो जांबाज शेर, जिसने पीठ पर वार नहीं झेला, बल्कि आतंकियों की गोलियां सीधे अपने सीने पर खाईं। अकेले दो खूंखार आतंकवादियों को जहन्नुम का रास्ता दिखाकर इस वीर ने देश के लिए अपना सर्वोच्च बलिदान दे दिया। आज जब राष्ट्रपति भवन में इस अमर शहीद की मां अपने लाडले का 'कीर्ति चक्र' लेने पहुंचीं, तो वहां मौजूद हर शख्स का कलेजा फट गया। मां की रुलाई और आंखों से बहते आंसुओं ने पूरे हिंदुस्तान को रुला दिया। मां रोई जरूर है, लेकिन आज उसका सिर गर्व से ऊंचा है क्योंकि उसने देश को एक ऐसा सिंह दिया, जिसके बलिदान के आगे आज 140 करोड़ देशवासी नतमस्तक हैं। वीर शहीद जंजाल प्रविण प्रभाकर अमर रहें!
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