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#जय श्री राम
जय श्री राम - चौपाई राम अतर्क्य बुद्धि मन बानी। सयानी Il सुनहि मत हमार अस वेद पुराना | तदपि संत मुनि जस कछु कहर्हि स्वमति अनुमाना Il भावार्थ हमारा मत तो यह है कि बुद्धि, हे सयानी ! सुनो, मन और वाणी से राम की तर्कना नहीं की जा सकती| तथापि संत, मुनि, वेद और पुराण अपनी-अपनी बुद्धि के अनुसार जैसा कुछ कहते हैं। जय श्रीराम चौपाई राम अतर्क्य बुद्धि मन बानी। सयानी Il सुनहि मत हमार अस वेद पुराना | तदपि संत मुनि जस कछु कहर्हि स्वमति अनुमाना Il भावार्थ हमारा मत तो यह है कि बुद्धि, हे सयानी ! सुनो, मन और वाणी से राम की तर्कना नहीं की जा सकती| तथापि संत, मुनि, वेद और पुराण अपनी-अपनी बुद्धि के अनुसार जैसा कुछ कहते हैं। जय श्रीराम - ShareChat