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#व्हाट्सएप्प स्टेटस। #जीवन की सीख #जीवन की सच्ची बातें
व्हाट्सएप्प स्टेटस। - अपना अहंकार कैसे त्यागे ? अहंकार त्यागना मतलब खुद को छोटा समझना नहीं , बल्कि यह समझना है कि जीवन में जो भी मिला है वह केवल " मैं ॰ से नहीं, बल्कि परमात्मा, परिवार, समाज और समय के सहयोग से मिला है। जब इंसान " मैं ही सब कुछ हूँ से निकलकर ४ मैं भी एक माध्यम हूँ " समझने लगता है, तब अहंकार धीरे ्धीरे कम होने लगता है। जो वृक्ष फल से भर जाता है, वह झुक जाता है। उसी प्रकार सच्चा ज्ञानी इंसान विनम्र हो जाता है से दूर करता है, अहंकार इंसान को दूसरों  जबकि विनम्रता दिलों को जोड़ती है। जहाँ " मैं " समाप्त होता है वहीं से शांत्ति और प्रेम शुरु होता है। अहंकार कहता है _ "मुझे सब पता है।" ज्ञान कहता है _ " मैं अभी भी सीख रहा हूँ 1 नदी इसलिए समंदर तक पहुँचती है क्योंकि वह नीचे बहना जानती है। विनम्रता ही इंसान को महान बनाती है। जो व्यक्ति अपनी गलती स्वीकार कर लेता है वह अहंकार पर पहली जीत प्राप्त कर लेता है । सेवा,  सत्संग और कृतज्ञता अहंकार को कम करने के सबसे सुंदर मार्ग माने गए हैं। धार्मिक दूष्टि से भी कई संतों ने कहा है कि अहंकार ही विनम्र बनें , सरल बनें , मनुष्य और परमात्मा के बीच सबसे बड़ा पर्दा है। यही जीवन को सफ़ल औंर जब मन में नम्रता आती है, तब भीतर शांत्ति , करुणा और सार्थक बनाता है। सच्ची भक्ति का जन्म होता है। अपना अहंकार कैसे त्यागे ? अहंकार त्यागना मतलब खुद को छोटा समझना नहीं , बल्कि यह समझना है कि जीवन में जो भी मिला है वह केवल " मैं ॰ से नहीं, बल्कि परमात्मा, परिवार, समाज और समय के सहयोग से मिला है। जब इंसान " मैं ही सब कुछ हूँ से निकलकर ४ मैं भी एक माध्यम हूँ " समझने लगता है, तब अहंकार धीरे ्धीरे कम होने लगता है। जो वृक्ष फल से भर जाता है, वह झुक जाता है। उसी प्रकार सच्चा ज्ञानी इंसान विनम्र हो जाता है से दूर करता है, अहंकार इंसान को दूसरों  जबकि विनम्रता दिलों को जोड़ती है। जहाँ " मैं " समाप्त होता है वहीं से शांत्ति और प्रेम शुरु होता है। अहंकार कहता है _ "मुझे सब पता है।" ज्ञान कहता है _ " मैं अभी भी सीख रहा हूँ 1 नदी इसलिए समंदर तक पहुँचती है क्योंकि वह नीचे बहना जानती है। विनम्रता ही इंसान को महान बनाती है। जो व्यक्ति अपनी गलती स्वीकार कर लेता है वह अहंकार पर पहली जीत प्राप्त कर लेता है । सेवा,  सत्संग और कृतज्ञता अहंकार को कम करने के सबसे सुंदर मार्ग माने गए हैं। धार्मिक दूष्टि से भी कई संतों ने कहा है कि अहंकार ही विनम्र बनें , सरल बनें , मनुष्य और परमात्मा के बीच सबसे बड़ा पर्दा है। यही जीवन को सफ़ल औंर जब मन में नम्रता आती है, तब भीतर शांत्ति , करुणा और सार्थक बनाता है। सच्ची भक्ति का जन्म होता है। - ShareChat