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अगर मौका मिला कभी, तो कागज़ पर अपनी थकान लिखूँगा, मजबूत कंधों के पीछे छुपा, वो छोटा सा इंसान लिखूँगा। वो जो हर मुश्किल में मुस्कुरा कर कहता है, "सब ठीक है," उस एक झूठ के पीछे दबे, हजारों बेबस तूफ़ान लिखूँगा। नहीं लिखूँगा मैं सिर्फ अपनी जीत के चर्चे दुनिया में, मैं तो हार कर भी जो मुस्कुराया, वो लहूलुहान स्वाभिमान लिखूँगा। लिखूँगा वो रातें, जब तकिया गवाह था मेरी सिसकियों का, पर सुबह उठकर फिर से पहना, वो चट्टान जैसा इंसान लिखूँगा। मैं लिख पाऊं कुछ तो, मैं खुद को लिखूँगा, अपनी रूह के हर ज़ख्म को, अपना ही सम्मान लिखूँगा। #sayri