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#जय माँ गायत्री जय गुरुवर
जय माँ गायत्री जय गुरुवर - हरि शरणं अवगुन प्रभु मान न काऊ ٦ दीन बंधु अति मृदुल सुभाऊ मोरे जियँ भरोस दृढ़ सोई मिलिहहिं राम सगुन सुभ होई भरतजी कहते हैं कि प्रभु सेवक का अवगुण कभी नहीं मानते। दीनबंधु हैं और अत्यंत ही कोमल स्वभाव के हैं, अतएव मेरे वे हृदय में ऐसा पक्का भरोसा है कि॰श्री राम जी अवश्य मिलेंगे, क्योंकि मुझे शकुन बड़े शुभ हो रहे हैं अर्थात हम लोग चाहे जैसे भी अधम, पापी, अज्ञानी, मूर्ख क्यों ना हो, हमें भगवान करके उनके प्राप्ति के लिए प्रयत्नशील विश्वास में अटल श्रद्धा हो जाना चाहिए वे परम प्रेमी और दयालु भगवान हम लोगों के को नहीं देखते वे अवश्य कृपा करते हैं अवगुणों हरि शरणं अवगुन प्रभु मान न काऊ ٦ दीन बंधु अति मृदुल सुभाऊ मोरे जियँ भरोस दृढ़ सोई मिलिहहिं राम सगुन सुभ होई भरतजी कहते हैं कि प्रभु सेवक का अवगुण कभी नहीं मानते। दीनबंधु हैं और अत्यंत ही कोमल स्वभाव के हैं, अतएव मेरे वे हृदय में ऐसा पक्का भरोसा है कि॰श्री राम जी अवश्य मिलेंगे, क्योंकि मुझे शकुन बड़े शुभ हो रहे हैं अर्थात हम लोग चाहे जैसे भी अधम, पापी, अज्ञानी, मूर्ख क्यों ना हो, हमें भगवान करके उनके प्राप्ति के लिए प्रयत्नशील विश्वास में अटल श्रद्धा हो जाना चाहिए वे परम प्रेमी और दयालु भगवान हम लोगों के को नहीं देखते वे अवश्य कृपा करते हैं अवगुणों - ShareChat