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#✒️ કવિની કલમ
✒️ કવિની કલમ - मोहब्बत की मिसाल तेरी मोहब्बत की मिसाल क्या दूँ मैं, सूखी ज़मीं पर बरसता बादल क्या दूँ मैं। तो जैसे सुबह की पहली किरण , নু সিলা  उस एहसास को कोई आँचल क्या दूँ मैं। तेरी हँसी जैसे फूलों की महक हो, खुशबू को कोई काजल क्या दूँ मैं। उस तू साथ हो तो हर दर्द भी हल्का लगे , उस राहत को कोई मंज़िल क्या दूँ मैं। इश्क़ अगर किताब है दुनिया की सबसे हसीन, तेरे नाम से बढ़कर कोई हासिल क्या दूँ मैं। लिखितः प्रकाश पंडित मोहब्बत की मिसाल तेरी मोहब्बत की मिसाल क्या दूँ मैं, सूखी ज़मीं पर बरसता बादल क्या दूँ मैं। तो जैसे सुबह की पहली किरण , নু সিলা  उस एहसास को कोई आँचल क्या दूँ मैं। तेरी हँसी जैसे फूलों की महक हो, खुशबू को कोई काजल क्या दूँ मैं। उस तू साथ हो तो हर दर्द भी हल्का लगे , उस राहत को कोई मंज़िल क्या दूँ मैं। इश्क़ अगर किताब है दुनिया की सबसे हसीन, तेरे नाम से बढ़कर कोई हासिल क्या दूँ मैं। लिखितः प्रकाश पंडित - ShareChat