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#आज का कर्म #सुविचार और अनमोल वचन
आज का कर्म - कम भाग्य नहीं , कर्म ही ক্রর্ম ননলন ঔ पहचान है ज़िंदगी इंसान की कर्म न ऊँचा , कर्म न नीचा, न रूप रंग से इसका रिश्ता ! कर्म ही मानव की पहचान , ক্রর্ম ম মিলনা লয ম মান! कर्म बिगाड़े , कर्म सँवारे, মুন নীবন ম ২যা ওনাই! कर्म से खिलता हर परिवार , कर्म से होता जीवन साकार! कर्म से आँख मिचौली कर्म का खेल बड़ा निराला, मत खेलो, पल में बदले भाग्य का प्याला! कब राजा को रंक क्योंकि कर्म ही राजा को रंक बना दे बना दे रचता जीवन रंक को सिंहासन दिला दे कब रंक के मेल ! को राजा मत करना कर्मों से छल कभी , मत छोड़ना सच्चाई की डगर सभी ! क्योंकि कर्म ही जीवन का मेल, नहीं, कर्म से बनते हर रिश्तों के खेल! भाग्य लिखते हैं॰ कर्म  लिखी न जाती तक़दीर कहीं , तक़दीर। भेरी केवल हाथों की लकीरों से नहीं ! कर्म की मिट्टी से ढलता इंसान , कर्म से मिलता सच्चा सम्मान ! आज का सही कर्म , कल का सुदर भबिष्य २> सच्चाई से करो निष्ठा से करो फल अवश्य मिलेगा कर्म करो समर्पण से करो कर्म ही पूजा है, कर्म ही भाग्य है, कर्म ही जीवन है ! कम भाग्य नहीं , कर्म ही ক্রর্ম ননলন ঔ पहचान है ज़िंदगी इंसान की कर्म न ऊँचा , कर्म न नीचा, न रूप रंग से इसका रिश्ता ! कर्म ही मानव की पहचान , ক্রর্ম ম মিলনা লয ম মান! कर्म बिगाड़े , कर्म सँवारे, মুন নীবন ম ২যা ওনাই! कर्म से खिलता हर परिवार , कर्म से होता जीवन साकार! कर्म से आँख मिचौली कर्म का खेल बड़ा निराला, मत खेलो, पल में बदले भाग्य का प्याला! कब राजा को रंक क्योंकि कर्म ही राजा को रंक बना दे बना दे रचता जीवन रंक को सिंहासन दिला दे कब रंक के मेल ! को राजा मत करना कर्मों से छल कभी , मत छोड़ना सच्चाई की डगर सभी ! क्योंकि कर्म ही जीवन का मेल, नहीं, कर्म से बनते हर रिश्तों के खेल! भाग्य लिखते हैं॰ कर्म  लिखी न जाती तक़दीर कहीं , तक़दीर। भेरी केवल हाथों की लकीरों से नहीं ! कर्म की मिट्टी से ढलता इंसान , कर्म से मिलता सच्चा सम्मान ! आज का सही कर्म , कल का सुदर भबिष्य २> सच्चाई से करो निष्ठा से करो फल अवश्य मिलेगा कर्म करो समर्पण से करो कर्म ही पूजा है, कर्म ही भाग्य है, कर्म ही जीवन है ! - ShareChat