sn vyas
#हर हहर....महादे....व्.... #हर हर महादेव
#जय माँ गंगे हर हर गंगे #🙏हर की पौड़ी हरिद्वार 🙏गंगा नदी 🙏👌हर हर गंगे🙏
दोनों गंगा जी श्री नारायण से निकलती हैं और दोनों को शिव जी धारण करते हैं।।
भगवान शंकर ने इन दोनों गंगाओं को धारण तो किया लेकिन अपने पास नहीं रक्खा।
भगवान भोलेनाथ की उदारता तो देखो, भागीरथी गंगा को जगत के कल्याण के लिए धरती पर उतार दिया और वांणी से निकलने वाली श्री राम कथा गंगा को भी जगत के कल्याण के लिए इस धरा धाम पर उतार दिया।
बाबा तुलसी एक बहुत ही सुन्दर संकेत दे रहे हैं तुम्हारे पास जो भी श्रेष्ठ है,जो भी अच्छा है जो भी योग्य है और जो भी जगत का कल्याण करने वाला है भगवान की कथा से तुमको जो भी प्राप्त हुआ है उसे अपने पास नहीं रखना चाहिए।
अगर भगवान शिव चाहते तो दोनों गंगा का आनंद स्वयं ही लेते रहते, लेकिन भगवान भोलेनाथ ने ऐसा नहीं किया, जो गंगा नारायण के चरणों से निकली उसे तो अपनी जटाओं में धारण किया और जो गंगा नारायण की वाणी से निकली हैं उसे अपने हृदय में धारण किया है और अपनी वाणी से प्रस्तुत किया।।
लेकिन महादेव ने दोनों गंगाओं को जगत के कल्याण हेतु, संसार का मंगल करने के लिए अवतरित किया।
कथा रुपी गंगा को शिव जी ने राम कथा के रूप में प्रकट किया ।
इस लिये मैं अधिकांश कहता रहता हूं यह जो राम कथा श्री तुलसीदास जी महाराज ने संवत् 1631 में लिखी हो और ४००, पौने पांच सौ साल पहले ही धरती पर आयी हो ऐसा समझने की भूल मत करना, इस कथा के जो वास्तविक कवि हैं इसके वास्तविक जो रचियता हैं उस रचियता का नाम स्वयं कलि पावन अवतार पूज्य श्री तुलसीदास जी महाराज बता रहे हैं।
रचि महेश निज मानस राखा।
पाय सुसमउ सिवा सन भाखा।।
ताते राम चरित मानस वर ।
रखेउ नीम हिय हेर हरिस हर ।।
शम्भु प्रसाद सुमति हिय हुलसी।
रामचरितमानस कवि तुलसी।।
गोस्वामीजी का नम्बर तो बहुत पीछे आता है।
बाबा तुलसी से किसी ने पूछा, बाबा इस रामायण को लिखने वाला कौन है?
गोस्वामीजी उदघोष कर रहे हैं आप लोग यह समझने की भूल मत करना कि इस राम कथा को मैंने लिखा है
यह कथा निकली तो भगवान की वांणी से है और महादेव ने इस कथा को रचकर के अपने हृदय में छिपाकर रख लिया और अचछा समय आने पर माता पार्वती को सबसे पहले भगवान शंकर ने सुनाया।।
तुलसी कह रहे हैं
कवित विवेक ऐक नहीं मोरे।
सत्य कहहुं लिखि कागद कोरे।।
भाषा बद्ध कीन्ह मैं सोई।।
मेरे अन्दर कविता रुपी ज्ञान नहीं है मैं इस बात को कोरे कागज पर लिखकर सत्य सत्य कहता हूं मैंने तो इसे भाषा बद्ध किया है।।