Navneet Gill
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"बुद्ध पथ" समाचारपत्र (उज्जैन/मध्य प्रदेश) 😇 #literature #हिंदी साहित्य #साहित्य
literature - मार काट दिखाई जाने उत्तर प्रदेश अत्यधिक बलिष्ठ पथिक जीविका माटी का बंदा, का मसला, गिल देता सभी कुछ भुला। भांति उड़न छू परिंदा। निकले हर रोज, जीविकोपार्जन की खोज्। লহান্ধ बिखरा , लेकिन मिला निखरा। पहले से अधिक, बन, करके बलिष्ठ पथिक। साँझ को लौटे , थकान की चादर लपेटे। उज्जेन मध्यप्रदेश प्रकाशित बुद्ध पथ समाचार पत्र तलाशता सुकून, निद्रा रानी का लिख मजमून। ন লিব)- लेखिका। मौलिक= सपनों में खोता, नवनीत गिल एम.ए लगाये अंधियार में गोता। ( इतिहास, राजनीति शास्त्र ) , सुब्हो का उजाला, बी॰एड, जुस्तजू-ए-निवाला। एम.एड, एल़.एल.बी, पूर्व ಫ೯ ೯್೯ प्राचार्य सीबीएसई विद्यालय दिनचर्या, यही, मुस्कुराकर कहती ,सही। आगरा ( उत्तर प्रदेश ) " मार काट दिखाई जाने उत्तर प्रदेश अत्यधिक बलिष्ठ पथिक जीविका माटी का बंदा, का मसला, गिल देता सभी कुछ भुला। भांति उड़न छू परिंदा। निकले हर रोज, जीविकोपार्जन की खोज्। লহান্ধ बिखरा , लेकिन मिला निखरा। पहले से अधिक, बन, करके बलिष्ठ पथिक। साँझ को लौटे , थकान की चादर लपेटे। उज्जेन मध्यप्रदेश प्रकाशित बुद्ध पथ समाचार पत्र तलाशता सुकून, निद्रा रानी का लिख मजमून। ন লিব)- लेखिका। मौलिक= सपनों में खोता, नवनीत गिल एम.ए लगाये अंधियार में गोता। ( इतिहास, राजनीति शास्त्र ) , सुब्हो का उजाला, बी॰एड, जुस्तजू-ए-निवाला। एम.एड, एल़.एल.बी, पूर्व ಫ೯ ೯್೯ प्राचार्य सीबीएसई विद्यालय दिनचर्या, यही, मुस्कुराकर कहती ,सही। आगरा ( उत्तर प्रदेश ) - ShareChat
"झंझट टाइम्स" समाचारपत्र (समस्तीपुर/ बिहार) 😇 #साहित्य #हिंदी साहित्य #literature
साहित्य - 8 7101 1  @ প কাং  ನ . परछाई जे टी न्यूज फिर ,   माँ, तेरी गोद में रख सिर। चाहता है सोना, گ दिल, मांगे वो ही "बिछौना"  3 बिना मिलावट , రౌ देता, भगा सारी थकावट| सभी कुछ समेट, बाँटता खुशियां बाहें लपेट| 3 हुआ जब कत्ल, 3 उम्मीदों का, गये निकल। 3 मगर तेरी, परछाई, ؟ चली संग बन सदा पुरवाई। ब बिन छोड़़े अकेले, ج के प्रत्येक झमेले। ؟٦٢ 314, अब की बार, आशीषरूपी हाथ, लेेंगे थाम, बिन हुए तैयार । क ফ্ থাম ৪ংসে লম মাথ | چ नवनीत गिल के मुखौटे , সিল  ( इतिहास, राजनीति ؟٩٠؟ 3 देते रोज नईं चोटें | बी॰एड, शास्त्र ) , UTUక; ఢౌ देखे मायूस "गिल"  एल.एल.बी| ह ख़्वाब, जाती जिनमें मिल। पर्व प्राचार्य ड आँख @7 पर, सीबीएसई   विद्यालय (उत्तर लापता हो, ढाती कहर। प्रदेश ) 8 7101 1  @ প কাং  ನ . परछाई जे टी न्यूज फिर ,   माँ, तेरी गोद में रख सिर। चाहता है सोना, گ दिल, मांगे वो ही "बिछौना"  3 बिना मिलावट , రౌ देता, भगा सारी थकावट| सभी कुछ समेट, बाँटता खुशियां बाहें लपेट| 3 हुआ जब कत्ल, 3 उम्मीदों का, गये निकल। 3 मगर तेरी, परछाई, ؟ चली संग बन सदा पुरवाई। ब बिन छोड़़े अकेले, ج के प्रत्येक झमेले। ؟٦٢ 314, अब की बार, आशीषरूपी हाथ, लेेंगे थाम, बिन हुए तैयार । क ফ্ থাম ৪ংসে লম মাথ | چ नवनीत गिल के मुखौटे , সিল  ( इतिहास, राजनीति ؟٩٠؟ 3 देते रोज नईं चोटें | बी॰एड, शास्त्र ) , UTUక; ఢౌ देखे मायूस "गिल"  एल.एल.बी| ह ख़्वाब, जाती जिनमें मिल। पर्व प्राचार्य ड आँख @7 पर, सीबीएसई   विद्यालय (उत्तर लापता हो, ढाती कहर। प्रदेश ) - ShareChat
"हरियाणा वाटिका" समाचारपत्र (लोहारू/हरियाणा) 😇 #literature #साहित्य #हिंदी साहित्य
literature - culcd   cal अनाज मंडी के गेट से लेकर तोल कांटे तक बड़े पत्थर लगवाने संबंधी होता। आज प्रस्तावों पर भी विस्तार से विचार विमर्श किया गया। बैठक में उपस्थित हीद बाबा ने सभी प्रस्तावों पर सर्वसम्मति से मुहर लगाई। बैठक के सभी सदस्यों श्रद्धा और T दौरान सुरेश सैनी ने मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी के नेतृत्व  की सराहना केंद्र है। यहाँ करते हुए कहा कि प्रदेश सरकार मंडियों के आधुनिकीकरण और किसानों সমমালু ওস को बेहतर सुविधाएं उपलब्ध करवाने के लिए निरंतर कार्य कर रही है। को नमन कविता के सच्चा धर्म T೯| ಶ೯:ಷ अपाहिज रिश्ते लवार से नहीं हंसा मौन, पूछा जब कौन? + k अपनत्व' के रंग, हुए कब, कैसे बदरंग? @3iR अपाहिज' रिश्ते, दे, करके जखूम रिसते। {মিম बगैर बाँटे  ஈ मुखौटे। मिलते मुस्करा गले, झाड़ें मुसीबत में पल्ले। महल रौंदे, 4' कोरी शान के ये परिंदे। रोये फफक, देखा, दूर तलक। सुनसान सब रास्ते, जानें क्योंकर पुकारते ? भूल जायें शायद, दुनिया की, कवायद ( छोड, ले सीख, मांगना मत भीख। अपने दम-खम पर, ाएं दीं। खेल भरे शहर। aಞl, मायूसी और खिलाड़ियों जल्दी स्वीकृत, कर खेल संस्कृति गिल' त्याग संबंध मृत। रूप ले रही है। ননলীন ঠািল সাসন ননীন बी॰एड, (इतिहास राजनीति शास्त्र), एम.ए एम.एड, भूमिका और एल.एल.बी। 6 of 8 की भावना को पूर्व प्राचार्य खेल महोत्सव सीबीएसई विद्यालय ( उत्तर प्रदेश)| न को लेकर खाजा रहा है। कविता न के कुशल ডাঠিন চামাম $ মাযী 9 culcd   cal अनाज मंडी के गेट से लेकर तोल कांटे तक बड़े पत्थर लगवाने संबंधी होता। आज प्रस्तावों पर भी विस्तार से विचार विमर्श किया गया। बैठक में उपस्थित हीद बाबा ने सभी प्रस्तावों पर सर्वसम्मति से मुहर लगाई। बैठक के सभी सदस्यों श्रद्धा और T दौरान सुरेश सैनी ने मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी के नेतृत्व  की सराहना केंद्र है। यहाँ करते हुए कहा कि प्रदेश सरकार मंडियों के आधुनिकीकरण और किसानों সমমালু ওস को बेहतर सुविधाएं उपलब्ध करवाने के लिए निरंतर कार्य कर रही है। को नमन कविता के सच्चा धर्म T೯| ಶ೯:ಷ अपाहिज रिश्ते लवार से नहीं हंसा मौन, पूछा जब कौन? + k अपनत्व' के रंग, हुए कब, कैसे बदरंग? @3iR अपाहिज' रिश्ते, दे, करके जखूम रिसते। {মিম बगैर बाँटे  ஈ मुखौटे। मिलते मुस्करा गले, झाड़ें मुसीबत में पल्ले। महल रौंदे, 4' कोरी शान के ये परिंदे। रोये फफक, देखा, दूर तलक। सुनसान सब रास्ते, जानें क्योंकर पुकारते ? भूल जायें शायद, दुनिया की, कवायद ( छोड, ले सीख, मांगना मत भीख। अपने दम-खम पर, ाएं दीं। खेल भरे शहर। aಞl, मायूसी और खिलाड़ियों जल्दी स्वीकृत, कर खेल संस्कृति गिल' त्याग संबंध मृत। रूप ले रही है। ননলীন ঠািল সাসন ননীন बी॰एड, (इतिहास राजनीति शास्त्र), एम.ए एम.एड, भूमिका और एल.एल.बी। 6 of 8 की भावना को पूर्व प्राचार्य खेल महोत्सव सीबीएसई विद्यालय ( उत्तर प्रदेश)| न को लेकर खाजा रहा है। कविता न के कुशल ডাঠিন চামাম $ মাযী 9 - ShareChat
"दैनिक यश बाबू" समाचारपत्र (कुरूक्षेत्र/हरियाणा) 😇🙏🏻 #हिंदी साहित्य #literature #साहित्य
हिंदी साहित्य - प्र भारी   कै लाश   सैनी, क <41 HTfకTT को कोऑर्डिनेटर तुषार सैनी मौजूद रहे। हर नागरिक तक कि को युवाओं अपाहिज रिश्ते नौकरी दी जा रही सिंह सैनी ने शपथ ों को नियुक्ति पत्र ो पूरा किया था। कौशल विकास के नए अवसर, रटअप को बढावा रियाणा की नींव उन्होंने कहा कि ह सैनी द्वारा गरीब वारों को आवास हंसा मौन विधाओं से युक्त पूछा जब कौन ? की 0 सरकार ध्यक्षा सुमन सैनी अपनत्व के रंग, हुए कब, कैसे बदरंग ? के अवसर पर T अपाहिज रिश्ते, मन किया। इससे दे, करके जखूम रिसते। न सैनी का गांव बगैर बाँटे, निर्मल [ दर्द, लगा 79)2/ मिलते मुस्करा गले, धम सिंह का खून झाड़ें मुसीबत में पल्ले। ` ٦ ؟7 7 7٦ हृदय महल रौंदे, घटना के दोषियों कोरी शान केये परिंदे। ஈர  fI रोये फफक ण्ड गए और भरी देखा, दूर तलक हत्यारों को मौत सुनसान सब रास्ते, इंतजार २१ साल जानें क्योंकर पुकारते ? झेलकर करते रहे। भूल जायें शायद, न आ गया जिस दुनिया की, कवायद। तड़प रहे थे। जब छोड़, लेे सीख, किग्सटन हाल में मांगना मत भीख। सभा में  माइक अपने दम-्खम पर, नियों की हत्या भरे शहर। मायूसी HI, [ ফ৯ থ নী ওখস जल्दी स्वीकृत कर क ओडवायर को गिल त्याग संबंध मृत। भारतीयों के नवनीत गिल प्र भारी   कै लाश   सैनी, क <41 HTfకTT को कोऑर्डिनेटर तुषार सैनी मौजूद रहे। हर नागरिक तक कि को युवाओं अपाहिज रिश्ते नौकरी दी जा रही सिंह सैनी ने शपथ ों को नियुक्ति पत्र ो पूरा किया था। कौशल विकास के नए अवसर, रटअप को बढावा रियाणा की नींव उन्होंने कहा कि ह सैनी द्वारा गरीब वारों को आवास हंसा मौन विधाओं से युक्त पूछा जब कौन ? की 0 सरकार ध्यक्षा सुमन सैनी अपनत्व के रंग, हुए कब, कैसे बदरंग ? के अवसर पर T अपाहिज रिश्ते, मन किया। इससे दे, करके जखूम रिसते। न सैनी का गांव बगैर बाँटे, निर्मल [ दर्द, लगा 79)2/ मिलते मुस्करा गले, धम सिंह का खून झाड़ें मुसीबत में पल्ले। ` ٦ ؟7 7 7٦ हृदय महल रौंदे, घटना के दोषियों कोरी शान केये परिंदे। ஈர  fI रोये फफक ण्ड गए और भरी देखा, दूर तलक हत्यारों को मौत सुनसान सब रास्ते, इंतजार २१ साल जानें क्योंकर पुकारते ? झेलकर करते रहे। भूल जायें शायद, न आ गया जिस दुनिया की, कवायद। तड़प रहे थे। जब छोड़, लेे सीख, किग्सटन हाल में मांगना मत भीख। सभा में  माइक अपने दम-्खम पर, नियों की हत्या भरे शहर। मायूसी HI, [ ফ৯ থ নী ওখস जल्दी स्वीकृत कर क ओडवायर को गिल त्याग संबंध मृत। भारतीयों के नवनीत गिल - ShareChat
"गजब हरियाणा" समाचारपत्र (कुरूक्षेत्र/हरियाणा) 😇 #साहित्य #हिंदी साहित्य #literature
साहित्य - अपाहिज रिश्ते THI पूछा जब कौन? अपनत्व' के रंग, हुए कब, कैसे बदरंग? अपाहिज ' रिश्ते, दे, करके जख्म रिसते। লযীয লাঁই दर्द, लगा मुखौटे। मिलते मुस्करा गले, झाड़ें मुसीबत में पल्ले। সমল হ৫, हृदय कोरी शान केये परिंदे। रोये फफक, बसा, मायूसी भरे शहर। देखा, दूर तलक। स्वीकृत, कर जल्दी सुनसान सब रास्ते, पुकारते ? गिल त्याग संबंध मृत। जानें क्योंकर भूल जायें शायद, नवनीत गिल दुनिया की, কপাযন एम.ए ( इतिहास, राजनीति शास्त्र ) , ೩.uತ; छोड़ ले सीख, एम.एड,  एल.एल.बी। पूर्व प्राचार्य मांगना मत भीख। सीबीएसई विद्यालय ( उत्तर प्रदेश ) | अपने दम-्खम पर, अपाहिज रिश्ते THI पूछा जब कौन? अपनत्व' के रंग, हुए कब, कैसे बदरंग? अपाहिज ' रिश्ते, दे, करके जख्म रिसते। লযীয লাঁই दर्द, लगा मुखौटे। मिलते मुस्करा गले, झाड़ें मुसीबत में पल्ले। সমল হ৫, हृदय कोरी शान केये परिंदे। रोये फफक, बसा, मायूसी भरे शहर। देखा, दूर तलक। स्वीकृत, कर जल्दी सुनसान सब रास्ते, पुकारते ? गिल त्याग संबंध मृत। जानें क्योंकर भूल जायें शायद, नवनीत गिल दुनिया की, কপাযন एम.ए ( इतिहास, राजनीति शास्त्र ) , ೩.uತ; छोड़ ले सीख, एम.एड,  एल.एल.बी। पूर्व प्राचार्य मांगना मत भीख। सीबीएसई विद्यालय ( उत्तर प्रदेश ) | अपने दम-्खम पर, - ShareChat
"निष्पक्ष पोस्ट" समाचारपत्र (नई दिल्ली) 😊 #literature #हिंदी साहित्य #साहित्य
literature - निष्पक्ष पोर 02 शनिवार ,२७ दिसंबर २०२५, नई अपाहिज रिश्ते दैनिक निष्पक्ष पोस्ट नवनीत गिल हंसा मौन, पूछा जब कौन? व्यापक अपनत्व " के रंग, जाति हुए कब, कैसे बदरंग? प्राक्रय अपाहिज " रिश्ते दे, करके जख़्म रिसते। बगैर बाँटे दर्द, लगा म मुखौटे। मिलते मुस्करा गले झाड़ें url मुसीबत  महल रौंदे "हृदय भारत की कोरी शान के ये परिंदे। भी कम अधिकारी रोये फफक, देखा, दूर तलक।  जो देश सुनसान सब रास्ते, करेगा। जानें क्योंकर पुकारते? भूल जायें शायद जनगणना दुनिया की॰ विमर्श 'कवायद अभ्यास छोड़़, लेे सीख, मांगना मत भीख। महत्त्वपूण अपने दम-खम पर, गंभीर भरे शहर। সাযুমী HI, स्वीकृत  சசி "गिल त्याग संबंध मृत। UTTUTTT जनगणन व्हाट्सएप फोनपर F" ணfAu निष्पक्ष पोर 02 शनिवार ,२७ दिसंबर २०२५, नई अपाहिज रिश्ते दैनिक निष्पक्ष पोस्ट नवनीत गिल हंसा मौन, पूछा जब कौन? व्यापक अपनत्व " के रंग, जाति हुए कब, कैसे बदरंग? प्राक्रय अपाहिज " रिश्ते दे, करके जख़्म रिसते। बगैर बाँटे दर्द, लगा म मुखौटे। मिलते मुस्करा गले झाड़ें url मुसीबत  महल रौंदे "हृदय भारत की कोरी शान के ये परिंदे। भी कम अधिकारी रोये फफक, देखा, दूर तलक।  जो देश सुनसान सब रास्ते, करेगा। जानें क्योंकर पुकारते? भूल जायें शायद जनगणना दुनिया की॰ विमर्श 'कवायद अभ्यास छोड़़, लेे सीख, मांगना मत भीख। महत्त्वपूण अपने दम-खम पर, गंभीर भरे शहर। সাযুমী HI, स्वीकृत  சசி "गिल त्याग संबंध मृत। UTTUTTT जनगणन व्हाट्सएप फोनपर F" ணfAu - ShareChat
"उत्तम हिन्दू" समाचारपत्र (जालंधर, चंडीगढ, नई दिल्ली) 😇 #literature #हिंदी साहित्य #साहित्य
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"बुद्ध पथ" समाचारपत्र (उज्जैन/मध्य प्रदेश) #literature
literature - रैंक प्राप्त कर यह सफलता हासिल काो। अरूण ने मात अपनी सफलता का श्रेय अपने माता पिता व गुरुजनों को बताया, उनके पिता सरकारी टीचर है व मॉ ग्रहणी है। अरुण वर्मा की इस उपलब्धि पर गांव में वर्मा खुशी का माहौल है।  देते हुए ] परिजनों , ग्रामीणों और शुभचिंतकों ने उन्हें बधाई उज्च्वल भविष्य की कामना की है। ग्रामीणों का कहना है कि अरुण वर्मा की सफलता से को प्रेरणा मिलेगी। तिलकपुर धाम आश्रम के पीठाश्वर महंत क्षेत्र के युवाओं सहपात बालक दास ने अरूण को शुभकामनाएं प्रेषित की और को शिक्षा युवाऔ की ओर अग्रसर होने के लिये प्रेरित किया ।अरुण ने पहली बार में राजस्थान मानवीय मूल्य संघर्ष में अकेले, सफ़ल होने पर मेले। अजीबो  गरीब, जग न बन पाया कभी रकीब। होना मत उदास, =2 जब भी विश्वास। ये ही दुनियादारी , जो चाहे बस तीमारदारी। गिराने को तैयार, 7; कर दरकिनार। संपूर्ण : मानवीः मूल्य बनें , खामख्वाह अतुल्य। লাপযা সা সন, हो जाये देखकर सुन्न। लेकिन बिन बवाल, पूछता अनगिनत सवाल। देती कर हताश, जवाबों की तलाश। मगर प्रत्येक पल, सीख जाता जीना गिल। बुद्ध पथ समाचा (बुद्ध पथ समाचार पत्र ৯ লিব)- उज्जैन। विग लेखिका=  गरुप की सक्रिय नवनीत যািল,' पुष्पा वर्मा जी क आगरा( उत्तर सहेलियों   द्वारा प्रदेश ) मालिक , प्रकाशक , मुद्रक नीलेश परमार द्वारा १५४ , ग्राम मलोड़ा , भाटपचलाना उच्चैन (म.प्र. ) पिनकोड ४५६३१३ से मुद्रित।  सम्पादक नीलेश परमार मो. रैंक प्राप्त कर यह सफलता हासिल काो। अरूण ने मात अपनी सफलता का श्रेय अपने माता पिता व गुरुजनों को बताया, उनके पिता सरकारी टीचर है व मॉ ग्रहणी है। अरुण वर्मा की इस उपलब्धि पर गांव में वर्मा खुशी का माहौल है।  देते हुए ] परिजनों , ग्रामीणों और शुभचिंतकों ने उन्हें बधाई उज्च्वल भविष्य की कामना की है। ग्रामीणों का कहना है कि अरुण वर्मा की सफलता से को प्रेरणा मिलेगी। तिलकपुर धाम आश्रम के पीठाश्वर महंत क्षेत्र के युवाओं सहपात बालक दास ने अरूण को शुभकामनाएं प्रेषित की और को शिक्षा युवाऔ की ओर अग्रसर होने के लिये प्रेरित किया ।अरुण ने पहली बार में राजस्थान मानवीय मूल्य संघर्ष में अकेले, सफ़ल होने पर मेले। अजीबो  गरीब, जग न बन पाया कभी रकीब। होना मत उदास, =2 जब भी विश्वास। ये ही दुनियादारी , जो चाहे बस तीमारदारी। गिराने को तैयार, 7; कर दरकिनार। संपूर्ण : मानवीः मूल्य बनें , खामख्वाह अतुल्य। লাপযা সা সন, हो जाये देखकर सुन्न। लेकिन बिन बवाल, पूछता अनगिनत सवाल। देती कर हताश, जवाबों की तलाश। मगर प्रत्येक पल, सीख जाता जीना गिल। बुद्ध पथ समाचा (बुद्ध पथ समाचार पत्र ৯ লিব)- उज्जैन। विग लेखिका=  गरुप की सक्रिय नवनीत যািল,' पुष्पा वर्मा जी क आगरा( उत्तर सहेलियों   द्वारा प्रदेश ) मालिक , प्रकाशक , मुद्रक नीलेश परमार द्वारा १५४ , ग्राम मलोड़ा , भाटपचलाना उच्चैन (म.प्र. ) पिनकोड ४५६३१३ से मुद्रित।  सम्पादक नीलेश परमार मो. - ShareChat
"झंझट टाइम्स" समाचारपत्र (समस्तीपुर/बिहार) 😇 #literature
literature - फफट रइका बुलेटिन राष्ट्रीय हिंदी दैनिक .acebookcom anjhatnes Com Orkraijhanjhatt] https:l Ivoutu.be समस्तीपुर दिसम्बर   २०२५ 088 अक समस्तपरस पकाशित 210 पगतवार ०९ पठ मूल्य : 3 रप्य JT मिफटटाइक्स बु्लेटिन News जहीन पथ जे टी न्यूज जिंदगी मुस्कराई, जब भी इच्छाएं दबाईं | जेटी न्यूज  कर, हृदय महल, शंकरपुर/मधेपु ध्वस्त, सुझाय जा संभल। ٦٦ ؟ থানা ಕ 9, ಗಾ್; शराब चाहे ये॰ जीवन सफर। ಔೆತ್ಮ মাহাল नितांत ही कठिन, वायरल नहीं सुन्न। रखना ध्यान, पड़ संदीप सिंह ने RRaff ಹ Tಾz हसीन से अहसास, रविवार নি वर्ना, बिखरा विश्वास| उसके बाके चकनाचूर "  करके थाना क्षेत्र हीनभाव बाँटकर खिसके | सेँहुल ক্তুসাং आवदन फिर तुम, अकेले, झेल दुनियावी झमेले। चीन व हंसकर या रोकर, निर्भीक या भय लपेटकर| तेरे ऊपर सबकुछ, FT भूलाकर तुच्छ। हे प्राणी, आगे बढ़, सफलता की, " सीढ़ी" चढ़ बिखराव, अभाव, भूल, बदलकर स्वभाव। खुद का सेवक बन, जहीन पथ चुन। "गिल" गिल नवनीत बी॰एड, एम.एड, एल.एल.बी।  एम.ए ( इतिहास, राजनीति शास्त्र ), पूर्व प्राचार्य  जे टी न्यूज নিম্ালয  सीबीएसई (उत्तर प्रदेश) | संस्थान के ম   মনখিন फफट रइका बुलेटिन राष्ट्रीय हिंदी दैनिक .acebookcom anjhatnes Com Orkraijhanjhatt] https:l Ivoutu.be समस्तीपुर दिसम्बर   २०२५ 088 अक समस्तपरस पकाशित 210 पगतवार ०९ पठ मूल्य : 3 रप्य JT मिफटटाइक्स बु्लेटिन News जहीन पथ जे टी न्यूज जिंदगी मुस्कराई, जब भी इच्छाएं दबाईं | जेटी न्यूज  कर, हृदय महल, शंकरपुर/मधेपु ध्वस्त, सुझाय जा संभल। ٦٦ ؟ থানা ಕ 9, ಗಾ್; शराब चाहे ये॰ जीवन सफर। ಔೆತ್ಮ মাহাল नितांत ही कठिन, वायरल नहीं सुन्न। रखना ध्यान, पड़ संदीप सिंह ने RRaff ಹ Tಾz हसीन से अहसास, रविवार নি वर्ना, बिखरा विश्वास| उसके बाके चकनाचूर "  करके थाना क्षेत्र हीनभाव बाँटकर खिसके | सेँहुल ক্তুসাং आवदन फिर तुम, अकेले, झेल दुनियावी झमेले। चीन व हंसकर या रोकर, निर्भीक या भय लपेटकर| तेरे ऊपर सबकुछ, FT भूलाकर तुच्छ। हे प्राणी, आगे बढ़, सफलता की, " सीढ़ी" चढ़ बिखराव, अभाव, भूल, बदलकर स्वभाव। खुद का सेवक बन, जहीन पथ चुन। "गिल" गिल नवनीत बी॰एड, एम.एड, एल.एल.बी।  एम.ए ( इतिहास, राजनीति शास्त्र ), पूर्व प्राचार्य  जे टी न्यूज নিম্ালয  सीबीएसई (उत्तर प्रदेश) | संस्थान के ম   মনখিন - ShareChat
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literature - Maidi সতধ্ী সূব নযন্তী ঘরযাব -মন্মীন্ত বািঁম भमग्ठ लॅबरैं | ন্রীন্ত্র uমী ঔ uন্তা মঁবািশ্া , নিঁম্ , নিস ঠ নই ঔমূ তঁবািপয? छरे ठगें f्टिग fegfenr حaenme, भलेउे ने , मो वरे उेठे मग्ग्भटे | নিষ্টি' ঘনদব ठ T, 8ஈfeசfee58<, छो सप्वग्ठ ऐँडे , புசக் ஈ=T, தீயுசuர=I ्ग्ठ रॅबरैं | ಕdfೆ m3 )ತಸಗಗ; रॅमे , fवदें थठरा' fढिठ वॅसट ? ಶಸTBಗತೆ; भा रो ठग्ग्ठ নিন্তবন্ত eা স্বা নমম, মিম্বা এঁভিস্সা ৯মী ২ী সহম | भिले , भ३्ा शग्ध -भग्ग्ठे , এযিম হিন্তী , गेट मदॅधडे , उग्गे fविठे ग्ठेठे । र वठग्ठ लॅबरैं | मॅचे थ़रोउ रो र्थाग्चग्ट , फ धभग्ठ थॅवा , वग्रो ठगें घ्ेभउलप्तो थ्ग्ट | धभग्ठ लॅडरैं ? उग्गेषि , fरिला ऐँउे गग्न , 781825255 उरे , हिवरे ठुीं ने भॅगे उग्न। Kk T೮ ই৮ মমী , সন্Hয নিন্ত , भटभो ्माठभा , रे रेभ भडे। थ ववग्ला रप्नभट' दो नग , ह्ॅथरे , ব সিমeাঠ , সঁধ ইম , ঘিবীট্টূ ঘ্র্াব নন্ত্বe | ग ठुठ भिलरा feg , Fr 2 4n3| নিবন্থ যবন মা, ৯ সঁuন্ | पेग्ग्उ , 867 বৃব সিমতeাঠ | थग्प्टे भग्लव , ३लो ' भैठ , fठॉल ' वठे र्भ्ग्हां हॅहे हैठ। ٦٤٢, XX  Maidi সতধ্ী সূব নযন্তী ঘরযাব -মন্মীন্ত বািঁম भमग्ठ लॅबरैं | ন্রীন্ত্র uমী ঔ uন্তা মঁবািশ্া , নিঁম্ , নিস ঠ নই ঔমূ তঁবািপয? छरे ठगें f्टिग fegfenr حaenme, भलेउे ने , मो वरे उेठे मग्ग्भटे | নিষ্টি' ঘনদব ठ T, 8ஈfeசfee58<, छो सप्वग्ठ ऐँडे , புசக் ஈ=T, தீயுசuர=I ्ग्ठ रॅबरैं | ಕdfೆ m3 )ತಸಗಗ; रॅमे , fवदें थठरा' fढिठ वॅसट ? ಶಸTBಗತೆ; भा रो ठग्ग्ठ নিন্তবন্ত eা স্বা নমম, মিম্বা এঁভিস্সা ৯মী ২ী সহম | भिले , भ३्ा शग्ध -भग्ग्ठे , এযিম হিন্তী , गेट मदॅधडे , उग्गे fविठे ग्ठेठे । र वठग्ठ लॅबरैं | मॅचे थ़रोउ रो र्थाग्चग्ट , फ धभग्ठ थॅवा , वग्रो ठगें घ्ेभउलप्तो थ्ग्ट | धभग्ठ लॅडरैं ? उग्गेषि , fरिला ऐँउे गग्न , 781825255 उरे , हिवरे ठुीं ने भॅगे उग्न। Kk T೮ ই৮ মমী , সন্Hয নিন্ত , भटभो ्माठभा , रे रेभ भडे। थ ववग्ला रप्नभट' दो नग , ह्ॅथरे , ব সিমeাঠ , সঁধ ইম , ঘিবীট্টূ ঘ্র্াব নন্ত্বe | ग ठुठ भिलरा feg , Fr 2 4n3| নিবন্থ যবন মা, ৯ সঁuন্ | पेग्ग्उ , 867 বৃব সিমতeাঠ | थग्प्टे भग्लव , ३लो ' भैठ , fठॉल ' वठे र्भ्ग्हां हॅहे हैठ। ٦٤٢, XX - ShareChat