Navneet Gill
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"हरियाणा वाटिका" (लोहारू/हरियाणा) 🙏🏻 #literature #हिंदी साहित्य #साहित्य
literature - 0 विवेक शर्मा ने कहा कि शिक्षा के साथ ्साथ विद्यार्थियों का शारीरिक स्वास्थ्य भी अत्यंत महत्वपूर्ण है। संस्था इस दिशा में निरंतर प्रयासरत रहेगी। अंत में सभी डॉक्टरों, अभिभावकों एवं सहयोगी स्टाफ का धन्यवाद किया गया। नवनीत गिल एम.ए (इतिहास,राजनीति शास्त्र), ೩.pತ; एम.एड एल.एल.बी। पूर्व प्राचार्य सीबीएसई विद्यालय (उत्तर प्रदेश) | हुकार मजबूरी की दीवार पर, लिखा   उम्मीद अल्फाज। तलाशता रहे अवसर जाने अनजाने देकर आवाज। बेशक हो, कोसों दूर, मगर चलने को कहे हुजूर। हौंसले का हाथ थाम, समझाये चल से शाम। सुब्हो বপাং होकर, न मिले छोड़कर व्यर्थ सभी गिले। बलबूते बढ़ना स्वयं के आगे, त्याग स्वप्नलोक के गोते। चमकेगा भांति दिनकर, बेबसी की आड़, गिराकर। बन शोला कभी शबनम, हे बंधु ! भुलाकर प्रत्येक गम। भले डरायें भयावह साये, चाहें, तेरा वक्त निकल जाये। भर हुंकार   सिंह की तरह, गिल बिन करे फ़ालतू जिरह। राष्ट्रीय सेवा योजना के साप्ताहिक 0 विवेक शर्मा ने कहा कि शिक्षा के साथ ्साथ विद्यार्थियों का शारीरिक स्वास्थ्य भी अत्यंत महत्वपूर्ण है। संस्था इस दिशा में निरंतर प्रयासरत रहेगी। अंत में सभी डॉक्टरों, अभिभावकों एवं सहयोगी स्टाफ का धन्यवाद किया गया। नवनीत गिल एम.ए (इतिहास,राजनीति शास्त्र), ೩.pತ; एम.एड एल.एल.बी। पूर्व प्राचार्य सीबीएसई विद्यालय (उत्तर प्रदेश) | हुकार मजबूरी की दीवार पर, लिखा   उम्मीद अल्फाज। तलाशता रहे अवसर जाने अनजाने देकर आवाज। बेशक हो, कोसों दूर, मगर चलने को कहे हुजूर। हौंसले का हाथ थाम, समझाये चल से शाम। सुब्हो বপাং होकर, न मिले छोड़कर व्यर्थ सभी गिले। बलबूते बढ़ना स्वयं के आगे, त्याग स्वप्नलोक के गोते। चमकेगा भांति दिनकर, बेबसी की आड़, गिराकर। बन शोला कभी शबनम, हे बंधु ! भुलाकर प्रत्येक गम। भले डरायें भयावह साये, चाहें, तेरा वक्त निकल जाये। भर हुंकार   सिंह की तरह, गिल बिन करे फ़ालतू जिरह। राष्ट्रीय सेवा योजना के साप्ताहिक - ShareChat
"दैनिक यश बाबू" समाचारपत्र (कुरूक्षेत्र/हरियाणा) #साहित्य #हिंदी साहित्य #literature
साहित्य - IHI স17 कxत s९ फe  फ  ٢ हुकार 3 ক্িভূস का आज सेंट फाउंडेशन डे टैलेंट शो का कार्यक्रम का की छिपी हुई  मजबूरी की दीवार पर, কনো নথা व्यक्तित्व विक लिखा ' उम्मीद ' अल्फाज | था। कार्यक्रम तलाशता रहे अवसर  और आमंत्रित जाने अनजाने देकर आवाज| ने समारोह हो, कोसों दूर, बेशक जानकारी देते कहे हुजूर | मगर चलने को प्रीति गुप्ता ने हौंसले का हाथ थाम, समझाये चल ম হাস | शुभारंभ TT सुब्हो प्रज्वलन के নতাং होकर, न मिले, छोड़कर व्यर्थ सभी गिले। कहा कि शिक्ष सीमित नहीं है बढ़ना स्वयं के बलबूते, गतिविधियां भी आगे, त्याग स्वप्नलोक के गोते विकास में मह चमकेगा भांति दिनकर, हैं | उन्होंने विद्य बेबसी की आड़, गिराकर। को साकार कर बन शोला कभी शबनम, ఇళ్త! करने की प्रेरणा 8 भुलाकर प्रत्येक गम कक्षाओं के वि भले डरायें भयावह साये, चाहें तेरा वक्त निकल जाये। अभिनय कवि f4f4z5, 44 भर हुंकार ` सिंह' की तरह, सांस्कृतिक गिल ' बिन करे फ़ालतू जिरह T नवनीत गिल अपनी प्रतिभ IHI স17 कxत s९ फe  फ  ٢ हुकार 3 ক্িভূস का आज सेंट फाउंडेशन डे टैलेंट शो का कार्यक्रम का की छिपी हुई  मजबूरी की दीवार पर, কনো নথা व्यक्तित्व विक लिखा ' उम्मीद ' अल्फाज | था। कार्यक्रम तलाशता रहे अवसर  और आमंत्रित जाने अनजाने देकर आवाज| ने समारोह हो, कोसों दूर, बेशक जानकारी देते कहे हुजूर | मगर चलने को प्रीति गुप्ता ने हौंसले का हाथ थाम, समझाये चल ম হাস | शुभारंभ TT सुब्हो प्रज्वलन के নতাং होकर, न मिले, छोड़कर व्यर्थ सभी गिले। कहा कि शिक्ष सीमित नहीं है बढ़ना स्वयं के बलबूते, गतिविधियां भी आगे, त्याग स्वप्नलोक के गोते विकास में मह चमकेगा भांति दिनकर, हैं | उन्होंने विद्य बेबसी की आड़, गिराकर। को साकार कर बन शोला कभी शबनम, ఇళ్త! करने की प्रेरणा 8 भुलाकर प्रत्येक गम कक्षाओं के वि भले डरायें भयावह साये, चाहें तेरा वक्त निकल जाये। अभिनय कवि f4f4z5, 44 भर हुंकार ` सिंह' की तरह, सांस्कृतिक गिल ' बिन करे फ़ालतू जिरह T नवनीत गिल अपनी प्रतिभ - ShareChat
"बुद्ध पथ" समाचारपत्र (उज्जैन/मध्य प्रदेश) 😇 #literature #हिंदी साहित्य #साहित्य
literature - संपादकीय 2026 हिन्दी साप्ता अलौकिक मन भरे था कभी कुलांचे, भर उड़ान, साथ : उन्मादः | ढला जाने कब नये सांचे? सफलता का, बिगुल चंचल नन्हा सा दिल, बजा, रहकर दूर व्यर्थ शोरगुल।  ( उज्जैन हुआ कैसे मायूस अरे ओ : गिलः ? मध्यप्रदेश से उड़े कभी भांति पतंग, छेड़ता था, मधुरिम तरंग। পন্ধাহািন ತೀ बन करके चित्तचोर , पथ समाचार करे जो, स्वयं को आत्मविभोर। ಹ पत्र लिए)=- मिला गुबार ए-गर्द, गया कर सभी कुछ सर्द। लेखिका= पीछे एकांकीपन छोड़़ नवनीत गया दर्द से, केवल नाते जोड़। अलौकिक मन राजा, ননো ওল হননা নন্ধালা| बी॰एड बीता,  गिल, एम.ए इतिहास ,  राजनीति शास्त्र, जा, भूल सब एम.एड, एल एलक़बी, पूर्व प्राचार्य सीबीएसई संभलकर ही जाये जग जीता।  परित्याग के अपवाद, विद्यालय आगरा ( उत्तर प्रदेश ) संपादकीय 2026 हिन्दी साप्ता अलौकिक मन भरे था कभी कुलांचे, भर उड़ान, साथ : उन्मादः | ढला जाने कब नये सांचे? सफलता का, बिगुल चंचल नन्हा सा दिल, बजा, रहकर दूर व्यर्थ शोरगुल।  ( उज्जैन हुआ कैसे मायूस अरे ओ : गिलः ? मध्यप्रदेश से उड़े कभी भांति पतंग, छेड़ता था, मधुरिम तरंग। পন্ধাহািন ತೀ बन करके चित्तचोर , पथ समाचार करे जो, स्वयं को आत्मविभोर। ಹ पत्र लिए)=- मिला गुबार ए-गर्द, गया कर सभी कुछ सर्द। लेखिका= पीछे एकांकीपन छोड़़ नवनीत गया दर्द से, केवल नाते जोड़। अलौकिक मन राजा, ননো ওল হননা নন্ধালা| बी॰एड बीता,  गिल, एम.ए इतिहास ,  राजनीति शास्त्र, जा, भूल सब एम.एड, एल एलक़बी, पूर्व प्राचार्य सीबीएसई संभलकर ही जाये जग जीता।  परित्याग के अपवाद, विद्यालय आगरा ( उत्तर प्रदेश ) - ShareChat
"स्वर्णभूमि टाइम्स" (लुधियाना/पंजाब) 🙏🏻 #साहित्य #हिंदी साहित्य #literature
साहित्य - भूल स्वीकार की। गवान शिव [TTT हुकार T সান ব্ী तार दे रहे = क्रेय T ग़ है। 7 1 46 मजबूरी की दीवार पर, T # लिखा उम्मीद " अल्फाज़। तलाशता रहे अवसर ' a1 जाने अनजाने देकर आवाज। ़फ र की बेशक हो, कोसों दूर, जम्मेदारी स खतरे को मगर चलने को कहे हुजूर।  4 हौंसले का हाथ थाम, ीतियां सुब्हो से शाम।  देखा समझाय चल केवल बेज़ार होकर, न मिले, ना चाहिए। সীং   মন্ী छोड़कर व्यर्थ सभी गिले। बढ़ना स्वयं के बलबूते , है। ओवर- आगे, त्याग स्वप्नलोक के गोते। प्रतिबंधों का हेए। ई, सुरक्षित चमकेगा भांति दिनकर, बेबसी की आड़, गिराकर। रण संक्रमण ী মাঙন ৯ 1 बन शोला कभी शबनम, हे बंधु ! भुलाकर प्रत्येक गम। विधाओं से ান্চনা ৯ ক্ি भले डरायें भयावह साये, I दी जाए। कीनुसंधश चाहें , तेरा वक्त निकल जाये। भर हुंकार "सिंह " की तरह, कारी "गिल" बिन करे फ़ालतू जिरह। ।य की मांग केवल एक हीं नीबतिलिक नवनीत गिल बल्कि (इतिहास , राजनीति शास्त्र) , एमए dus, एम़.एड , एल.एल.बी। पोटिक्स का पूर्व प्राचार्य, सीबीएसई विद्यालय तय करेगा (उत्तर प्रदेश) | पास इलाज या नहीं। भूल स्वीकार की। गवान शिव [TTT हुकार T সান ব্ী तार दे रहे = क्रेय T ग़ है। 7 1 46 मजबूरी की दीवार पर, T # लिखा उम्मीद " अल्फाज़। तलाशता रहे अवसर ' a1 जाने अनजाने देकर आवाज। ़फ र की बेशक हो, कोसों दूर, जम्मेदारी स खतरे को मगर चलने को कहे हुजूर।  4 हौंसले का हाथ थाम, ीतियां सुब्हो से शाम।  देखा समझाय चल केवल बेज़ार होकर, न मिले, ना चाहिए। সীং   মন্ী छोड़कर व्यर्थ सभी गिले। बढ़ना स्वयं के बलबूते , है। ओवर- आगे, त्याग स्वप्नलोक के गोते। प्रतिबंधों का हेए। ई, सुरक्षित चमकेगा भांति दिनकर, बेबसी की आड़, गिराकर। रण संक्रमण ী মাঙন ৯ 1 बन शोला कभी शबनम, हे बंधु ! भुलाकर प्रत्येक गम। विधाओं से ান্চনা ৯ ক্ি भले डरायें भयावह साये, I दी जाए। कीनुसंधश चाहें , तेरा वक्त निकल जाये। भर हुंकार "सिंह " की तरह, कारी "गिल" बिन करे फ़ालतू जिरह। ।य की मांग केवल एक हीं नीबतिलिक नवनीत गिल बल्कि (इतिहास , राजनीति शास्त्र) , एमए dus, एम़.एड , एल.एल.बी। पोटिक्स का पूर्व प्राचार्य, सीबीएसई विद्यालय तय करेगा (उत्तर प्रदेश) | पास इलाज या नहीं। - ShareChat
"बुद्ध पथ" समाचारपत्र (उज्जैन/मध्य प्रदेश) 😇 #literature #हिंदी साहित्य #साहित्य
literature - मार काट दिखाई जाने उत्तर प्रदेश अत्यधिक बलिष्ठ पथिक जीविका माटी का बंदा, का मसला, गिल देता सभी कुछ भुला। भांति उड़न छू परिंदा। निकले हर रोज, जीविकोपार्जन की खोज्। লহান্ধ बिखरा , लेकिन मिला निखरा। पहले से अधिक, बन, करके बलिष्ठ पथिक। साँझ को लौटे , थकान की चादर लपेटे। उज्जेन मध्यप्रदेश प्रकाशित बुद्ध पथ समाचार पत्र तलाशता सुकून, निद्रा रानी का लिख मजमून। ন লিব)- लेखिका। मौलिक= सपनों में खोता, नवनीत गिल एम.ए लगाये अंधियार में गोता। ( इतिहास, राजनीति शास्त्र ) , सुब्हो का उजाला, बी॰एड, जुस्तजू-ए-निवाला। एम.एड, एल़.एल.बी, पूर्व ಫ೯ ೯್೯ प्राचार्य सीबीएसई विद्यालय दिनचर्या, यही, मुस्कुराकर कहती ,सही। आगरा ( उत्तर प्रदेश ) " मार काट दिखाई जाने उत्तर प्रदेश अत्यधिक बलिष्ठ पथिक जीविका माटी का बंदा, का मसला, गिल देता सभी कुछ भुला। भांति उड़न छू परिंदा। निकले हर रोज, जीविकोपार्जन की खोज्। লহান্ধ बिखरा , लेकिन मिला निखरा। पहले से अधिक, बन, करके बलिष्ठ पथिक। साँझ को लौटे , थकान की चादर लपेटे। उज्जेन मध्यप्रदेश प्रकाशित बुद्ध पथ समाचार पत्र तलाशता सुकून, निद्रा रानी का लिख मजमून। ন লিব)- लेखिका। मौलिक= सपनों में खोता, नवनीत गिल एम.ए लगाये अंधियार में गोता। ( इतिहास, राजनीति शास्त्र ) , सुब्हो का उजाला, बी॰एड, जुस्तजू-ए-निवाला। एम.एड, एल़.एल.बी, पूर्व ಫ೯ ೯್೯ प्राचार्य सीबीएसई विद्यालय दिनचर्या, यही, मुस्कुराकर कहती ,सही। आगरा ( उत्तर प्रदेश ) - ShareChat
"झंझट टाइम्स" समाचारपत्र (समस्तीपुर/ बिहार) 😇 #साहित्य #हिंदी साहित्य #literature
साहित्य - 8 7101 1  @ প কাং  ನ . परछाई जे टी न्यूज फिर ,   माँ, तेरी गोद में रख सिर। चाहता है सोना, گ दिल, मांगे वो ही "बिछौना"  3 बिना मिलावट , రౌ देता, भगा सारी थकावट| सभी कुछ समेट, बाँटता खुशियां बाहें लपेट| 3 हुआ जब कत्ल, 3 उम्मीदों का, गये निकल। 3 मगर तेरी, परछाई, ؟ चली संग बन सदा पुरवाई। ब बिन छोड़़े अकेले, ج के प्रत्येक झमेले। ؟٦٢ 314, अब की बार, आशीषरूपी हाथ, लेेंगे थाम, बिन हुए तैयार । क ফ্ থাম ৪ংসে লম মাথ | چ नवनीत गिल के मुखौटे , সিল  ( इतिहास, राजनीति ؟٩٠؟ 3 देते रोज नईं चोटें | बी॰एड, शास्त्र ) , UTUక; ఢౌ देखे मायूस "गिल"  एल.एल.बी| ह ख़्वाब, जाती जिनमें मिल। पर्व प्राचार्य ड आँख @7 पर, सीबीएसई   विद्यालय (उत्तर लापता हो, ढाती कहर। प्रदेश ) 8 7101 1  @ প কাং  ನ . परछाई जे टी न्यूज फिर ,   माँ, तेरी गोद में रख सिर। चाहता है सोना, گ दिल, मांगे वो ही "बिछौना"  3 बिना मिलावट , రౌ देता, भगा सारी थकावट| सभी कुछ समेट, बाँटता खुशियां बाहें लपेट| 3 हुआ जब कत्ल, 3 उम्मीदों का, गये निकल। 3 मगर तेरी, परछाई, ؟ चली संग बन सदा पुरवाई। ब बिन छोड़़े अकेले, ج के प्रत्येक झमेले। ؟٦٢ 314, अब की बार, आशीषरूपी हाथ, लेेंगे थाम, बिन हुए तैयार । क ফ্ থাম ৪ংসে লম মাথ | چ नवनीत गिल के मुखौटे , সিল  ( इतिहास, राजनीति ؟٩٠؟ 3 देते रोज नईं चोटें | बी॰एड, शास्त्र ) , UTUక; ఢౌ देखे मायूस "गिल"  एल.एल.बी| ह ख़्वाब, जाती जिनमें मिल। पर्व प्राचार्य ड आँख @7 पर, सीबीएसई   विद्यालय (उत्तर लापता हो, ढाती कहर। प्रदेश ) - ShareChat
"हरियाणा वाटिका" समाचारपत्र (लोहारू/हरियाणा) 😇 #literature #साहित्य #हिंदी साहित्य
literature - culcd   cal अनाज मंडी के गेट से लेकर तोल कांटे तक बड़े पत्थर लगवाने संबंधी होता। आज प्रस्तावों पर भी विस्तार से विचार विमर्श किया गया। बैठक में उपस्थित हीद बाबा ने सभी प्रस्तावों पर सर्वसम्मति से मुहर लगाई। बैठक के सभी सदस्यों श्रद्धा और T दौरान सुरेश सैनी ने मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी के नेतृत्व  की सराहना केंद्र है। यहाँ करते हुए कहा कि प्रदेश सरकार मंडियों के आधुनिकीकरण और किसानों সমমালু ওস को बेहतर सुविधाएं उपलब्ध करवाने के लिए निरंतर कार्य कर रही है। को नमन कविता के सच्चा धर्म T೯| ಶ೯:ಷ अपाहिज रिश्ते लवार से नहीं हंसा मौन, पूछा जब कौन? + k अपनत्व' के रंग, हुए कब, कैसे बदरंग? @3iR अपाहिज' रिश्ते, दे, करके जखूम रिसते। {মিম बगैर बाँटे  ஈ मुखौटे। मिलते मुस्करा गले, झाड़ें मुसीबत में पल्ले। महल रौंदे, 4' कोरी शान के ये परिंदे। रोये फफक, देखा, दूर तलक। सुनसान सब रास्ते, जानें क्योंकर पुकारते ? भूल जायें शायद, दुनिया की, कवायद ( छोड, ले सीख, मांगना मत भीख। अपने दम-खम पर, ाएं दीं। खेल भरे शहर। aಞl, मायूसी और खिलाड़ियों जल्दी स्वीकृत, कर खेल संस्कृति गिल' त्याग संबंध मृत। रूप ले रही है। ননলীন ঠািল সাসন ননীন बी॰एड, (इतिहास राजनीति शास्त्र), एम.ए एम.एड, भूमिका और एल.एल.बी। 6 of 8 की भावना को पूर्व प्राचार्य खेल महोत्सव सीबीएसई विद्यालय ( उत्तर प्रदेश)| न को लेकर खाजा रहा है। कविता न के कुशल ডাঠিন চামাম $ মাযী 9 culcd   cal अनाज मंडी के गेट से लेकर तोल कांटे तक बड़े पत्थर लगवाने संबंधी होता। आज प्रस्तावों पर भी विस्तार से विचार विमर्श किया गया। बैठक में उपस्थित हीद बाबा ने सभी प्रस्तावों पर सर्वसम्मति से मुहर लगाई। बैठक के सभी सदस्यों श्रद्धा और T दौरान सुरेश सैनी ने मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी के नेतृत्व  की सराहना केंद्र है। यहाँ करते हुए कहा कि प्रदेश सरकार मंडियों के आधुनिकीकरण और किसानों সমমালু ওস को बेहतर सुविधाएं उपलब्ध करवाने के लिए निरंतर कार्य कर रही है। को नमन कविता के सच्चा धर्म T೯| ಶ೯:ಷ अपाहिज रिश्ते लवार से नहीं हंसा मौन, पूछा जब कौन? + k अपनत्व' के रंग, हुए कब, कैसे बदरंग? @3iR अपाहिज' रिश्ते, दे, करके जखूम रिसते। {মিম बगैर बाँटे  ஈ मुखौटे। मिलते मुस्करा गले, झाड़ें मुसीबत में पल्ले। महल रौंदे, 4' कोरी शान के ये परिंदे। रोये फफक, देखा, दूर तलक। सुनसान सब रास्ते, जानें क्योंकर पुकारते ? भूल जायें शायद, दुनिया की, कवायद ( छोड, ले सीख, मांगना मत भीख। अपने दम-खम पर, ाएं दीं। खेल भरे शहर। aಞl, मायूसी और खिलाड़ियों जल्दी स्वीकृत, कर खेल संस्कृति गिल' त्याग संबंध मृत। रूप ले रही है। ননলীন ঠািল সাসন ননীন बी॰एड, (इतिहास राजनीति शास्त्र), एम.ए एम.एड, भूमिका और एल.एल.बी। 6 of 8 की भावना को पूर्व प्राचार्य खेल महोत्सव सीबीएसई विद्यालय ( उत्तर प्रदेश)| न को लेकर खाजा रहा है। कविता न के कुशल ডাঠিন চামাম $ মাযী 9 - ShareChat
"दैनिक यश बाबू" समाचारपत्र (कुरूक्षेत्र/हरियाणा) 😇🙏🏻 #हिंदी साहित्य #literature #साहित्य
हिंदी साहित्य - प्र भारी   कै लाश   सैनी, क <41 HTfకTT को कोऑर्डिनेटर तुषार सैनी मौजूद रहे। हर नागरिक तक कि को युवाओं अपाहिज रिश्ते नौकरी दी जा रही सिंह सैनी ने शपथ ों को नियुक्ति पत्र ो पूरा किया था। कौशल विकास के नए अवसर, रटअप को बढावा रियाणा की नींव उन्होंने कहा कि ह सैनी द्वारा गरीब वारों को आवास हंसा मौन विधाओं से युक्त पूछा जब कौन ? की 0 सरकार ध्यक्षा सुमन सैनी अपनत्व के रंग, हुए कब, कैसे बदरंग ? के अवसर पर T अपाहिज रिश्ते, मन किया। इससे दे, करके जखूम रिसते। न सैनी का गांव बगैर बाँटे, निर्मल [ दर्द, लगा 79)2/ मिलते मुस्करा गले, धम सिंह का खून झाड़ें मुसीबत में पल्ले। ` ٦ ؟7 7 7٦ हृदय महल रौंदे, घटना के दोषियों कोरी शान केये परिंदे। ஈர  fI रोये फफक ण्ड गए और भरी देखा, दूर तलक हत्यारों को मौत सुनसान सब रास्ते, इंतजार २१ साल जानें क्योंकर पुकारते ? झेलकर करते रहे। भूल जायें शायद, न आ गया जिस दुनिया की, कवायद। तड़प रहे थे। जब छोड़, लेे सीख, किग्सटन हाल में मांगना मत भीख। सभा में  माइक अपने दम-्खम पर, नियों की हत्या भरे शहर। मायूसी HI, [ ফ৯ থ নী ওখস जल्दी स्वीकृत कर क ओडवायर को गिल त्याग संबंध मृत। भारतीयों के नवनीत गिल प्र भारी   कै लाश   सैनी, क <41 HTfకTT को कोऑर्डिनेटर तुषार सैनी मौजूद रहे। हर नागरिक तक कि को युवाओं अपाहिज रिश्ते नौकरी दी जा रही सिंह सैनी ने शपथ ों को नियुक्ति पत्र ो पूरा किया था। कौशल विकास के नए अवसर, रटअप को बढावा रियाणा की नींव उन्होंने कहा कि ह सैनी द्वारा गरीब वारों को आवास हंसा मौन विधाओं से युक्त पूछा जब कौन ? की 0 सरकार ध्यक्षा सुमन सैनी अपनत्व के रंग, हुए कब, कैसे बदरंग ? के अवसर पर T अपाहिज रिश्ते, मन किया। इससे दे, करके जखूम रिसते। न सैनी का गांव बगैर बाँटे, निर्मल [ दर्द, लगा 79)2/ मिलते मुस्करा गले, धम सिंह का खून झाड़ें मुसीबत में पल्ले। ` ٦ ؟7 7 7٦ हृदय महल रौंदे, घटना के दोषियों कोरी शान केये परिंदे। ஈர  fI रोये फफक ण्ड गए और भरी देखा, दूर तलक हत्यारों को मौत सुनसान सब रास्ते, इंतजार २१ साल जानें क्योंकर पुकारते ? झेलकर करते रहे। भूल जायें शायद, न आ गया जिस दुनिया की, कवायद। तड़प रहे थे। जब छोड़, लेे सीख, किग्सटन हाल में मांगना मत भीख। सभा में  माइक अपने दम-्खम पर, नियों की हत्या भरे शहर। मायूसी HI, [ ফ৯ থ নী ওখস जल्दी स्वीकृत कर क ओडवायर को गिल त्याग संबंध मृत। भारतीयों के नवनीत गिल - ShareChat
"गजब हरियाणा" समाचारपत्र (कुरूक्षेत्र/हरियाणा) 😇 #साहित्य #हिंदी साहित्य #literature
साहित्य - अपाहिज रिश्ते THI पूछा जब कौन? अपनत्व' के रंग, हुए कब, कैसे बदरंग? अपाहिज ' रिश्ते, दे, करके जख्म रिसते। লযীয লাঁই दर्द, लगा मुखौटे। मिलते मुस्करा गले, झाड़ें मुसीबत में पल्ले। সমল হ৫, हृदय कोरी शान केये परिंदे। रोये फफक, बसा, मायूसी भरे शहर। देखा, दूर तलक। स्वीकृत, कर जल्दी सुनसान सब रास्ते, पुकारते ? गिल त्याग संबंध मृत। जानें क्योंकर भूल जायें शायद, नवनीत गिल दुनिया की, কপাযন एम.ए ( इतिहास, राजनीति शास्त्र ) , ೩.uತ; छोड़ ले सीख, एम.एड,  एल.एल.बी। पूर्व प्राचार्य मांगना मत भीख। सीबीएसई विद्यालय ( उत्तर प्रदेश ) | अपने दम-्खम पर, अपाहिज रिश्ते THI पूछा जब कौन? अपनत्व' के रंग, हुए कब, कैसे बदरंग? अपाहिज ' रिश्ते, दे, करके जख्म रिसते। লযীয লাঁই दर्द, लगा मुखौटे। मिलते मुस्करा गले, झाड़ें मुसीबत में पल्ले। সমল হ৫, हृदय कोरी शान केये परिंदे। रोये फफक, बसा, मायूसी भरे शहर। देखा, दूर तलक। स्वीकृत, कर जल्दी सुनसान सब रास्ते, पुकारते ? गिल त्याग संबंध मृत। जानें क्योंकर भूल जायें शायद, नवनीत गिल दुनिया की, কপাযন एम.ए ( इतिहास, राजनीति शास्त्र ) , ೩.uತ; छोड़ ले सीख, एम.एड,  एल.एल.बी। पूर्व प्राचार्य मांगना मत भीख। सीबीएसई विद्यालय ( उत्तर प्रदेश ) | अपने दम-्खम पर, - ShareChat
"निष्पक्ष पोस्ट" समाचारपत्र (नई दिल्ली) 😊 #literature #हिंदी साहित्य #साहित्य
literature - निष्पक्ष पोर 02 शनिवार ,२७ दिसंबर २०२५, नई अपाहिज रिश्ते दैनिक निष्पक्ष पोस्ट नवनीत गिल हंसा मौन, पूछा जब कौन? व्यापक अपनत्व " के रंग, जाति हुए कब, कैसे बदरंग? प्राक्रय अपाहिज " रिश्ते दे, करके जख़्म रिसते। बगैर बाँटे दर्द, लगा म मुखौटे। मिलते मुस्करा गले झाड़ें url मुसीबत  महल रौंदे "हृदय भारत की कोरी शान के ये परिंदे। भी कम अधिकारी रोये फफक, देखा, दूर तलक।  जो देश सुनसान सब रास्ते, करेगा। जानें क्योंकर पुकारते? भूल जायें शायद जनगणना दुनिया की॰ विमर्श 'कवायद अभ्यास छोड़़, लेे सीख, मांगना मत भीख। महत्त्वपूण अपने दम-खम पर, गंभीर भरे शहर। সাযুমী HI, स्वीकृत  சசி "गिल त्याग संबंध मृत। UTTUTTT जनगणन व्हाट्सएप फोनपर F" ணfAu निष्पक्ष पोर 02 शनिवार ,२७ दिसंबर २०२५, नई अपाहिज रिश्ते दैनिक निष्पक्ष पोस्ट नवनीत गिल हंसा मौन, पूछा जब कौन? व्यापक अपनत्व " के रंग, जाति हुए कब, कैसे बदरंग? प्राक्रय अपाहिज " रिश्ते दे, करके जख़्म रिसते। बगैर बाँटे दर्द, लगा म मुखौटे। मिलते मुस्करा गले झाड़ें url मुसीबत  महल रौंदे "हृदय भारत की कोरी शान के ये परिंदे। भी कम अधिकारी रोये फफक, देखा, दूर तलक।  जो देश सुनसान सब रास्ते, करेगा। जानें क्योंकर पुकारते? भूल जायें शायद जनगणना दुनिया की॰ विमर्श 'कवायद अभ्यास छोड़़, लेे सीख, मांगना मत भीख। महत्त्वपूण अपने दम-खम पर, गंभीर भरे शहर। সাযুমী HI, स्वीकृत  சசி "गिल त्याग संबंध मृत। UTTUTTT जनगणन व्हाट्सएप फोनपर F" ணfAu - ShareChat