Asha Singh
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#📿जया एकादशी🪔
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📿जया एकादशी🪔 - पूजा के दौरान पूजा के दौरान नींद आनाः पूजा के दौरान नींद आने के पीछे स्वास्थ्य एक कारण हो सकता है। मगर इसके अलावा नींद आना मन के कपट को दर्शाता है। पूजा के दौरान भय महसूस करनाः अगर आपको भय महसूस हो रहा है तो इसके दो कारण हैं। पहला कि आपने कुछ गलत किया है जिसका डर आपको सता रहा है। दूसरा आप पर शनि की वक्री दृष्टि पड़ चुकी है जो भय पैदा कर रही है। पूजा के दौरान मन भटकनाः इसके पीछे दो कारण होते हैं। पहला कि राहु के दुष्प्रभाव के कारण आपका पूजा से मन हट रहा है।। दूसरा यह कि आपके मन में कई सारे विचार एक साथ चल रहे हैं। पूजा के दौरान आंसू आ जानाः पूजा करते समय अचानक इसका अर्थ होता है कि आंसू आना शुभ माना जाता भगवान साक्षात आपकी प्रार्थना सुन रहे हैं। साथ ही, जल्दी ही आपकी मनोकामना पूरी भी होने वाली है। ৫ত पूजा के दौरान पूजा के दौरान नींद आनाः पूजा के दौरान नींद आने के पीछे स्वास्थ्य एक कारण हो सकता है। मगर इसके अलावा नींद आना मन के कपट को दर्शाता है। पूजा के दौरान भय महसूस करनाः अगर आपको भय महसूस हो रहा है तो इसके दो कारण हैं। पहला कि आपने कुछ गलत किया है जिसका डर आपको सता रहा है। दूसरा आप पर शनि की वक्री दृष्टि पड़ चुकी है जो भय पैदा कर रही है। पूजा के दौरान मन भटकनाः इसके पीछे दो कारण होते हैं। पहला कि राहु के दुष्प्रभाव के कारण आपका पूजा से मन हट रहा है।। दूसरा यह कि आपके मन में कई सारे विचार एक साथ चल रहे हैं। पूजा के दौरान आंसू आ जानाः पूजा करते समय अचानक इसका अर्थ होता है कि आंसू आना शुभ माना जाता भगवान साक्षात आपकी प्रार्थना सुन रहे हैं। साथ ही, जल्दी ही आपकी मनोकामना पूरी भी होने वाली है। ৫ত - ShareChat
#📿जया एकादशी🪔
📿जया एकादशी🪔 - 30 अन्नपूर्णा रोटियाँ एक गुरु अपने शिष्यों के साथ धर्म प्रचार के लिए जा रहे थे। रास्ते में रेगिस्तान पडा, दूर तक कोई गाँव दिखाई न देता था। भोजन की समस्या उत्पन्त्र हुई तो गुरु ने कहा ४जो कुछ पास है उसे इकट्टा कर लो और मिल-बाँटकर खाओ। " గౌగెగ शिष्यों के पास कुल मिलाकर पाँच रोटी और दो टुकड़़े तरकारी निकली। गुरु ने उसे इकट्टा किया और मंत्र बल से अन्नपूर्णा बना दिया। शिष्यों ने उसे भरपेट खाया और जो भूखे भिखारी  उसी से तृप्त हो गए। उधर से निकले वे भी शिष्य ने पूछा- " गुरुवर! इतनी कम सामग्री में इतने लोगों एक की तृप्ति का रहस्य क्या है?  राधे राधे जरुर लिखें। गुरु ने कहा- "हे शिष्यो! धर्मात्मा वह है जो खुद की नहीं सबकी बात सोचता है। अपनी बचत सबके काम आए इस विचार से ही तुम्हारी पाँच रोटी अक्षय अन्नपूर्णा बन गई। जो जोड़ते हैं वे ही भूखे रहेंगे। जिसने देना सीख लिया है उनके लिए तृप्ति के साधन आप ही आ जुटते हैं।" हमारे पेज से जुड़ने के लिए फॉलो करना न भूले 3ڈ 30 अन्नपूर्णा रोटियाँ एक गुरु अपने शिष्यों के साथ धर्म प्रचार के लिए जा रहे थे। रास्ते में रेगिस्तान पडा, दूर तक कोई गाँव दिखाई न देता था। भोजन की समस्या उत्पन्त्र हुई तो गुरु ने कहा ४जो कुछ पास है उसे इकट्टा कर लो और मिल-बाँटकर खाओ। " గౌగెగ शिष्यों के पास कुल मिलाकर पाँच रोटी और दो टुकड़़े तरकारी निकली। गुरु ने उसे इकट्टा किया और मंत्र बल से अन्नपूर्णा बना दिया। शिष्यों ने उसे भरपेट खाया और जो भूखे भिखारी  उसी से तृप्त हो गए। उधर से निकले वे भी शिष्य ने पूछा- " गुरुवर! इतनी कम सामग्री में इतने लोगों एक की तृप्ति का रहस्य क्या है?  राधे राधे जरुर लिखें। गुरु ने कहा- "हे शिष्यो! धर्मात्मा वह है जो खुद की नहीं सबकी बात सोचता है। अपनी बचत सबके काम आए इस विचार से ही तुम्हारी पाँच रोटी अक्षय अन्नपूर्णा बन गई। जो जोड़ते हैं वे ही भूखे रहेंगे। जिसने देना सीख लिया है उनके लिए तृप्ति के साधन आप ही आ जुटते हैं।" हमारे पेज से जुड़ने के लिए फॉलो करना न भूले 3ڈ - ShareChat