#श्राद्ध_करने_की_श्रेष्ठ_विधि
अधूरा ज्ञान खतरनाक
क्या आपके धर्म गुरु जानते हैं कि विष्णु पुराण के तृतीय अंश, अध्याय 15 श्लोक 55-56 के अनुसार एक योगी (शास्त्र अनुकूल भक्ति करने वाला साधक) को भोजन कराना हज़ार ब्राह्मणों के श्राद्ध भोज से उत्तम है।
#Kabir is God मृत्यु भोज नहीं खाना चाहिए क्यों यह जानने के लिए आवश्यक पढ़े जीने की राह पुस्तक
#Kabir is God श्री बजरंगबली जी को कबीर परमात्मा पूर्ण ब्रह्म स्वयं मुनेंद्र ऋषि के रूप में सतयुग में मिले थे और हनुमान जी मुनेंद्र जी के साधना करके सतलोक चले गए
#Kabir is God गीता वाला काल कौन?
अध्याय 11 श्लोक 47 में पवित्र गीता जी को बोलने वाले प्रभु काल ने कहा है कि ‘हे अर्जुन! यह मेरा वास्तविक काल रूप है, जिसे तेरे अतिरिक्त पहले किसी ने नहीं देखा था।‘
सिद्ध हुआ कि कौरवों की सभा में विराट रूप श्री कृष्ण जी ने दिखाया था तथा कुरूक्षेत्र में युद्ध के मैदान में विराट रूप काल ने दिखाया था। नहीं तो यह नहीं कहता कि यह विराट रूप तेरे अतिरिक्त पहले किसी ने नहीं देखा है। क्योंकि श्री कृष्ण जी अपना विराट रूप कौरवों की सभा में पहले ही दिखा चुके थे जो अनेकों ने देखा था।
- जगतगुरु तत्वदर्शी संत रामपाल जी महाराज
#Kabir is God
जो व्यक्ति मनुष्य जन्म प्राप्त करके भक्ति नहीं करता, वह चौरासी लाख योनियों में कष्ट उठाता है। कुत्ता रात में ऊपर की ओर मुंह करके बहुत रोता है। इसलिए पूर्ण गुरु संत रामपाल जी महाराज जी से नाम लेकर सतभक्ति करनी चाहिए।
#Kabir is God
सतभक्ति से जन्म-मृत्यु रूपी रोग से छुटकारा मिलता है। फिर ये जीव कभी चौरासी में नहीं भटकता। सतभक्ति करने से ही काल की कैद से कविर्देव (कबीर साहेब जी) छुड़वाकर सतलोक ले जाते हैं जो अमर अविनाशी लोक है।
भक्ति न करने वाले और मनमानी पूजाएं करने वाले को काल के दूत ले जाते हैं जबकि सतभक्ति करने वाले को परमात्मा विमान में बैठाकर अमरलोक यानी सतलोक ले जाते हैं।
जो व्यक्ति मनुष्य जन्म प्राप्त करके भक्ति नहीं करता, वह चौरासी लाख योनियों में कष्ट उठाता है। कुत्ता रात में ऊपर की ओर मुंह करके बहुत रोता है। इसलिए पूर्ण गुरु संत रामपाल जी महाराज जी से नाम लेकर सतभक्ति करनी चाहिए।




