आजकल संसद में परिसीमन पर जो चर्चा सीट बढ़ाने को लेकर हो रही है, उसका एक विश्लेषण
सावधान: करदाताओं पर भारी बोझ!
लोकसभा सीटों को 543 से बढ़ाकर 816 करने की तैयारी है (परिसीमन विधेयक)। साथ ही विधानसभा सीटें भी 50% बढ़ेंगी। यह मुद्दा किसी पार्टी का नहीं, बल्कि टैक्सपेयर बनाम राजनीतिक सिस्टम का है।
मुख्य बिंदु:
भारी खर्च: लगभग 2,300+ नए सांसद और विधायक बढ़ेंगे। इनके वेतन, भत्ते और पेंशन का बोझ ₹40,000–50,000 करोड़ से अधिक होगा।
वीआईपी सुविधाएं: हर नए सांसद को ₹5 करोड़ का MP/MLA फंड, मुफ्त बंगला, आजीवन मुफ्त हवाई/रेल यात्रा और पेंशन मिलेगी।
नेताओं की मौज: 93% सांसद पहले से करोड़पति हैं। हम अपने टैक्स से उन लोगों की सुख-सुविधाएं बढ़ा रहे हैं जो साल में बमुश्किल 50-60 दिन काम करते हैं।
आम आदमी की अनदेखी: सरकार के पास सीनियर सिटीजन को रेल रियायत देने या पेंशन के लिए बजट नहीं है, लेकिन नेताओं की फौज बढ़ाने के लिए पैसा है।
हमारा पैसा, उनकी सुविधा: आप जो Income Tax और TDS भरते हैं, वह अब सड़कों या अस्पतालों के बजाय नए नेताओं के बंगलों और स्टाफ पर खर्च होगा।जितने नेता हैं, वही काफी है लूटने के लिए।बेहतर होता अगर सीट बढ़ाने के बजाय कम कर दी जाती।
जागरूक बनें: कोई भी राजनीतिक दल इसका विरोध नहीं करेगा क्योंकि फायदा सबका है।
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