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#🚨UPSC Exams📚 #📚एजुकेशन टिप्स & ट्रिक्स✍ #📖बैंकिंग की तैयारी #❤️जीवन की सीख #❤️Love You ज़िंदगी ❤️
🚨UPSC Exams📚 - भूजल संरक्षण एवं जल संकट समाधान में संभावित भूमिका प्राकृतिक जलभृत (Aquifer) के रूप में यह भूमिगत नदी धारा एक विशाल कार्य कर सकती हैः जिसमें रेत एवं चिकनी मिट्टी की परतें बड़ी मात्रा में जल संग्रहित करती है। वैज्ञानिकों ने छह ऐसे स्थलों की पहचान की हैःजहाँ वर्षा जल के माध्यम से इस (Recharge) कियाजा सकता है। पुनर्भरण | जलभृत को इस प्राचीन नदी तंत्र को भूजल औरगंगा के मैदानी क्षेत्रों में जल संकट पुनर्भरण . कम करने के लिए महत्त्वपूर्ण माना जा रहा है। भूजल संरक्षण एवं जल संकट समाधान में संभावित भूमिका प्राकृतिक जलभृत (Aquifer) के रूप में यह भूमिगत नदी धारा एक विशाल कार्य कर सकती हैः जिसमें रेत एवं चिकनी मिट्टी की परतें बड़ी मात्रा में जल संग्रहित करती है। वैज्ञानिकों ने छह ऐसे स्थलों की पहचान की हैःजहाँ वर्षा जल के माध्यम से इस (Recharge) कियाजा सकता है। पुनर्भरण | जलभृत को इस प्राचीन नदी तंत्र को भूजल औरगंगा के मैदानी क्षेत्रों में जल संकट पुनर्भरण . कम करने के लिए महत्त्वपूर्ण माना जा रहा है। - ShareChat
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🚨UPSC Exams📚 - वैज्ञानिक अध्ययन और सरस्वती नदोसे संबंध भारतीय परंपराओं एवं वैदिक साहित्य में वर्णित सरस्वती नदी के प्रयागराज क्षेत्र में प्रवाहित होने का उल्लेख मिलता हे। वैज्ञानिकों द्वारा पहचानी गई यह भूमिगत धारा उसी क्षेत्र में स्थित है, जिससे इस विषय पर पुनः चर्चा प्रारंभ हुई है। CSIR-NGRI ঠ ঠনানিকান Hellborne Transient Electromagnetic Technology (HTEMJ" का उपयोग करते हुए हेलीकॉप्टर आधारित सेंसरों भूमिगत जल संरचनाओं का अध्ययन किया। केमाध्यमसे प्रारंभिक शोध से संकेत प्राप्त हए हैं कि यह प्राचीन नदी तंत्र संभवतः हिमालयी नदी प्रणाली से संबंधित रहा होगा। = 6 6 वैज्ञानिक अध्ययन और सरस्वती नदोसे संबंध भारतीय परंपराओं एवं वैदिक साहित्य में वर्णित सरस्वती नदी के प्रयागराज क्षेत्र में प्रवाहित होने का उल्लेख मिलता हे। वैज्ञानिकों द्वारा पहचानी गई यह भूमिगत धारा उसी क्षेत्र में स्थित है, जिससे इस विषय पर पुनः चर्चा प्रारंभ हुई है। CSIR-NGRI ঠ ঠনানিকান Hellborne Transient Electromagnetic Technology (HTEMJ" का उपयोग करते हुए हेलीकॉप्टर आधारित सेंसरों भूमिगत जल संरचनाओं का अध्ययन किया। केमाध्यमसे प्रारंभिक शोध से संकेत प्राप्त हए हैं कि यह प्राचीन नदी तंत्र संभवतः हिमालयी नदी प्रणाली से संबंधित रहा होगा। = 6 6 - ShareChat
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🚨UPSC Exams📚 - भारत में २०० किमो लंबो प्रावीन भूमिगत नदो की खोज वैज्ञानिकों ने प्रयागराज ओर कानपुर के मध्य धरातल से लगभग १० -१५ मीटर नीचे स्थित २०० किमी लबी प्राचीन भूमिगत नदी धारा (Palaeo channel) की पहचान की हे। यह धारा लगभग ४ ५ किमी चौड़ी हैः जिसका आकार गंगा एवं यमुना जैसी प्रमुख नदियों के समकक्ष माना जा रहा है। शोधकर्ताओं के अनुसार यह केवल किसी नदी के परिवर्तित मार्ग का परिणाम नहीं बल्कि एक स्वतंत्र एवं प्राचीन नदी तंत्र हो सकता हे। 0 a హ్ 0-0 भारत में २०० किमो लंबो प्रावीन भूमिगत नदो की खोज वैज्ञानिकों ने प्रयागराज ओर कानपुर के मध्य धरातल से लगभग १० -१५ मीटर नीचे स्थित २०० किमी लबी प्राचीन भूमिगत नदी धारा (Palaeo channel) की पहचान की हे। यह धारा लगभग ४ ५ किमी चौड़ी हैः जिसका आकार गंगा एवं यमुना जैसी प्रमुख नदियों के समकक्ष माना जा रहा है। शोधकर्ताओं के अनुसार यह केवल किसी नदी के परिवर्तित मार्ग का परिणाम नहीं बल्कि एक स्वतंत्र एवं प्राचीन नदी तंत्र हो सकता हे। 0 a హ్ 0-0 - ShareChat
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🚨UPSC Exams📚 - प्रयागरज - कानपुर क्षेत्र में मिले &Lud केसाक्ष्यः क्या यह लुप्त सरस्वती नदी का भूमिगत प्रवाह होसकता है२ प्रयागरज - कानपुर क्षेत्र में मिले &Lud केसाक्ष्यः क्या यह लुप्त सरस्वती नदी का भूमिगत प्रवाह होसकता है२ - ShareChat
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🚨UPSC Exams📚 - HISTORY OF THE DAY 2II प्रेमलता अग्रवाल ने रचा इतिहास २० मई २०११ को झारखंड की पर्वतारोही प्रेमलता अग्रवाल ने माउंट एवरेस्ट फतह कर इतिहास रच दिया। ४८ वर्ष की उम्र में एवरेस्ट पर पहुंचकर वे उस समय की सबसे  उम्रदराज भारतीय महिला बनीं। उनकी यह उपलब्धि भारतीय महिलाओं के लिए प्रेरणा प्रतीक बनी। बाद में उन्होंने सेवन समिट अभियान पूरा करते हुए सातों महाद्वीपों  का सबसे ऊंची चोटियों पर तिरंगा फहराया। पर्वतारोहण के क्षेत्र में उनके योगदान को देखत हुए भारत सरकार ने उन्हें पद्मश्री सम्मान से सम्मानित किया। प्रेमलता की सफलता  साहस, दृढ़ संकल्प ओर मेहनत का अद्भुत उदाहरण प्रस्तुत किया। HISTORY OF THE DAY 2II प्रेमलता अग्रवाल ने रचा इतिहास २० मई २०११ को झारखंड की पर्वतारोही प्रेमलता अग्रवाल ने माउंट एवरेस्ट फतह कर इतिहास रच दिया। ४८ वर्ष की उम्र में एवरेस्ट पर पहुंचकर वे उस समय की सबसे  उम्रदराज भारतीय महिला बनीं। उनकी यह उपलब्धि भारतीय महिलाओं के लिए प्रेरणा प्रतीक बनी। बाद में उन्होंने सेवन समिट अभियान पूरा करते हुए सातों महाद्वीपों  का सबसे ऊंची चोटियों पर तिरंगा फहराया। पर्वतारोहण के क्षेत्र में उनके योगदान को देखत हुए भारत सरकार ने उन्हें पद्मश्री सम्मान से सम्मानित किया। प्रेमलता की सफलता  साहस, दृढ़ संकल्प ओर मेहनत का अद्भुत उदाहरण प्रस्तुत किया। - ShareChat
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🚨UPSC Exams📚 - HISTORY OF THE DAY 20 MAV सुमित्रानंदन पंत का जन्म २० मई १९०० को हिंदी साहित्य के महान कवि सुमित्रानंदन पंत का जन्म  उत्तराखंड के कोसानी में हुआ। वे छायावाद युग के चार प्रमुख स्तंभों में गिने जाते हें। उनकी कविताओं में प्रकृति, सोंदर्य, मानवता ओर आध्यात्मिक चिंतन की झलक मिलती हे। " पल्लव " " ग्राम्या " " युगांत " और " चिदंबरा " उनकी प्रसिद्ध कृतियां हे। हिंदी साहित्य में उनके अमूल्य योगदान के लिए उन्हें ज्ञानपीठ पुरस्कार  साहित्य अकादमी पुरस्कार ओर पयभूषण से सम्मानित किया गया। उनकी रचनाओं ने आधुनिक हिंदी कविता को नई पहचान दी ओर साहित्य जगत को गहराई से प्रभावित किया।  HISTORY OF THE DAY 20 MAV सुमित्रानंदन पंत का जन्म २० मई १९०० को हिंदी साहित्य के महान कवि सुमित्रानंदन पंत का जन्म  उत्तराखंड के कोसानी में हुआ। वे छायावाद युग के चार प्रमुख स्तंभों में गिने जाते हें। उनकी कविताओं में प्रकृति, सोंदर्य, मानवता ओर आध्यात्मिक चिंतन की झलक मिलती हे। " पल्लव " " ग्राम्या " " युगांत " और " चिदंबरा " उनकी प्रसिद्ध कृतियां हे। हिंदी साहित्य में उनके अमूल्य योगदान के लिए उन्हें ज्ञानपीठ पुरस्कार  साहित्य अकादमी पुरस्कार ओर पयभूषण से सम्मानित किया गया। उनकी रचनाओं ने आधुनिक हिंदी कविता को नई पहचान दी ओर साहित्य जगत को गहराई से प्रभावित किया। - ShareChat
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🚨UPSC Exams📚 - HISTORY OF THE DAY 20 MAV वास्को डी गामा भारत पहुंचा २० मई १४९८ को पुर्तगाली नाविक वास्को डी गामा समुद्री मार्ग से भारत के कालीकट तट पर पहुंचा। चह यूरोप से भारत तक सीधे समुद्री रास्ते से आने चाला  पहला यूरोपीय बना। इस खोज ने भारत ओर यूरोप के बीच व्यापार के नए द्वार खोल दिए। कालीकट उस समय मसालों ओर समुद्री व्यापार का प्रमुख केंद्र था। पुर्तगाली , डच, फ्रांसीसी ओर अंग्रेज व्यापारी वास्को डी गामा की इस यात्रा के 'ale भारत आने लगे। आगे चलकर यही समुद्री संपर्क भारत में यूरोपीय उपनिवेशवाद  की नींच बना ओर भारतीय इतिहास की दिशा बदल गई।  HISTORY OF THE DAY 20 MAV वास्को डी गामा भारत पहुंचा २० मई १४९८ को पुर्तगाली नाविक वास्को डी गामा समुद्री मार्ग से भारत के कालीकट तट पर पहुंचा। चह यूरोप से भारत तक सीधे समुद्री रास्ते से आने चाला  पहला यूरोपीय बना। इस खोज ने भारत ओर यूरोप के बीच व्यापार के नए द्वार खोल दिए। कालीकट उस समय मसालों ओर समुद्री व्यापार का प्रमुख केंद्र था। पुर्तगाली , डच, फ्रांसीसी ओर अंग्रेज व्यापारी वास्को डी गामा की इस यात्रा के 'ale भारत आने लगे। आगे चलकर यही समुद्री संपर्क भारत में यूरोपीय उपनिवेशवाद  की नींच बना ओर भारतीय इतिहास की दिशा बदल गई। - ShareChat
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🚨UPSC Exams📚 - HISTORY OF THE DAY | १९ IIAY जमशेदजी टाटा का निधन १९ मई १९०४ को भारत के महान उद्योगपति और टाटा समूह के संस्थापक था। उन्होंने भारत में आधुनिक उद्योगों की मजबूत जमशेदजी टाटा का निधन हुआ नींव रखी और देश को औद्योगिक विकास की नई दिशा दी। जमशेदजी टाटा उन्होंने मुंबई में ताज वेहतर  कार्य व्यवस्था के समर्थक थे। श्रमिकों के कल्याण और महल पैलेस होटल का निर्माण कराया, जो भारतीय स्वाभिमान का प्रतीक बना। उनके प्रयासों से टाटा समूह विश्वसनीयता ओर सेवा का पर्याय बना। आज भी जमशेदजी टाटा को भारत के औद्योगिक विकास का अग्रदूत माना जाता हे। HISTORY OF THE DAY | १९ IIAY जमशेदजी टाटा का निधन १९ मई १९०४ को भारत के महान उद्योगपति और टाटा समूह के संस्थापक था। उन्होंने भारत में आधुनिक उद्योगों की मजबूत जमशेदजी टाटा का निधन हुआ नींव रखी और देश को औद्योगिक विकास की नई दिशा दी। जमशेदजी टाटा उन्होंने मुंबई में ताज वेहतर  कार्य व्यवस्था के समर्थक थे। श्रमिकों के कल्याण और महल पैलेस होटल का निर्माण कराया, जो भारतीय स्वाभिमान का प्रतीक बना। उनके प्रयासों से टाटा समूह विश्वसनीयता ओर सेवा का पर्याय बना। आज भी जमशेदजी टाटा को भारत के औद्योगिक विकास का अग्रदूत माना जाता हे। - ShareChat
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🚨UPSC Exams📚 - HISTORY OF THE DAY 19 IIII दुनिया का पहला अंतरिक्ष स्टेशन सल्युत 1 लॉन्च १९ अप्रेल १९७२ को सोवियत संघ ने दुनिया का पहला अंतरिक्ष स्टेशन " सल्युत १ सफलतापूर्वक अंतरिक्ष में प्रक्षेपित किया यह मानव इतिहास में अंतरिक्ष থা| की दिशा में एक ऐतिहासिक उपलब्धि मानी जाती हे। सल्युतन1 का अनुसंधान उद्देश्य अंतरिक्ष में लंबे समय तक मानव निवास और वैज्ञानिक प्रयोगों का अध्ययन करना था। इस स्टेशन ने लगभग छह महीने तक पृथ्वी की कक्षा में रहकर कई महत्वपूर्ण जानकारियाँ जुटाई। इसके माध्यम से भविष्य के अंतरिक्ष स्टेशनों ओर मिशनों की नींव पड़ी। सल्युत 1 की सफलता ने अंतरिक्ष विज्ञान में सोवियत संघ को विश्व स्तर पर नई पहचान दिलाई। HISTORY OF THE DAY 19 IIII दुनिया का पहला अंतरिक्ष स्टेशन सल्युत 1 लॉन्च १९ अप्रेल १९७२ को सोवियत संघ ने दुनिया का पहला अंतरिक्ष स्टेशन " सल्युत १ सफलतापूर्वक अंतरिक्ष में प्रक्षेपित किया यह मानव इतिहास में अंतरिक्ष থা| की दिशा में एक ऐतिहासिक उपलब्धि मानी जाती हे। सल्युतन1 का अनुसंधान उद्देश्य अंतरिक्ष में लंबे समय तक मानव निवास और वैज्ञानिक प्रयोगों का अध्ययन करना था। इस स्टेशन ने लगभग छह महीने तक पृथ्वी की कक्षा में रहकर कई महत्वपूर्ण जानकारियाँ जुटाई। इसके माध्यम से भविष्य के अंतरिक्ष स्टेशनों ओर मिशनों की नींव पड़ी। सल्युत 1 की सफलता ने अंतरिक्ष विज्ञान में सोवियत संघ को विश्व स्तर पर नई पहचान दिलाई। - ShareChat