१० ह व्ह्यू · ८६१ प्रतिक्रिया | बुद्ध के प्रमुख उपदेश (संक्षेप में): चार आर्य सत्य संसार में दुःख है। दुःख का कारण तृष्णा (लालसा) है। दुःख का अंत संभव है। दुःख के अंत का मार्ग अष्टांगिक मार्ग है। अष्टांगिक मार्ग सम्यक दृष्टि, संकल्प, वाणी, कर्म, आजीविका, प्रयास, स्मृति और समाधि—यही जीवन को सही दिशा देते हैं। मध्यम मार्ग अति सुख और अति तपस्या—दोनों से बचकर संतुलित जीवन जीना। अहिंसा और करुणा सभी प्राणियों के प्रति दया, प्रेम और करुणा का भाव। कर्म और चेतना मनुष्य अपने कर्मों से बनता है; शुद्ध मन ही शांति का आधार है। आत्मनिर्भरता “अप्प दीपो भव”—खुद अपना दीपक बनो, अंधविश्वास से दूर रहो। संक्षेप में, बुद्ध का उपदेश है—जाग्रत चित्त, नैतिक जीवन और करुणा से भरा हुआ रास्ता ही दुःख से मुक्ति का मार्ग है। #buddha #buddhism #ambedkar #fbpost2026シ #fbyシvideo #UGCAct #victorsultanpuri #Constitution #jaybhim | Victor Sultanpuri
बुद्ध के प्रमुख उपदेश (संक्षेप में):
चार आर्य सत्य
संसार में दुःख है।
दुःख का कारण तृष्णा (लालसा) है।
दुःख का अंत संभव है।
दुःख के अंत का मार्ग अष्टांगिक...