𝑺𝒖𝒅𝒉𝒊𝒓
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@1220439628
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𝑺𝒖𝒅𝒉𝒊𝒓
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।। ये दुनिया आईना है , इसमें सूरत अपनी दिखती है ।।
#😊ବାସ୍ତବିକ ଖୁସି😇 #📝ନୀତିବାଣୀ #🙇ସୁବିଚାର #🗣ସାଧୁବାଣୀ🙏
😊ବାସ୍ତବିକ ଖୁସି😇 - क्षमा शक्ति है। क्षमा शक्ति है। - ShareChat
#🗣ସାଧୁବାଣୀ🙏 #🙇ସୁବିଚାର #📝ନୀତିବାଣୀ #😊ବାସ୍ତବିକ ଖୁସି😇
🗣ସାଧୁବାଣୀ🙏 - शांति बाहर नहीं, भीतर है। शांति बाहर नहीं, भीतर है। - ShareChat
#😊ବାସ୍ତବିକ ଖୁସି😇 #📝ନୀତିବାଣୀ #🙇ସୁବିଚାର #🗣ସାଧୁବାଣୀ🙏
😊ବାସ୍ତବିକ ଖୁସି😇 - आसक्ति दुख की जड़ है। आसक्ति दुख की जड़ है। - ShareChat
#🗣ସାଧୁବାଣୀ🙏 #🙇ସୁବିଚାର #📝ନୀତିବାଣୀ #😊ବାସ୍ତବିକ ଖୁସି😇
🗣ସାଧୁବାଣୀ🙏 - मौन भी एक प्रार्थना है, जो सीधे आत्मा तक जाती है। मौन भी एक प्रार्थना है, जो सीधे आत्मा तक जाती है। - ShareChat
#😊ବାସ୍ତବିକ ଖୁସି😇 #📝ନୀତିବାଣୀ #🙇ସୁବିଚାର #🗣ସାଧୁବାଣୀ🙏
😊ବାସ୍ତବିକ ଖୁସି😇 - खुद से मिलना ही ईश्वर से मिलने की शुरुआत है। खुद से मिलना ही ईश्वर से मिलने की शुरुआत है। - ShareChat
#🪕ଶ୍ରୀ ଜଗନ୍ନାଥ ଭଜନ🎶 #🚩ସନାତନ ଧର୍ମ💪 #😊ବାସ୍ତବିକ ଖୁସି😇
🪕ଶ୍ରୀ ଜଗନ୍ନାଥ ଭଜନ🎶 - जो स्वयं को जान लेता है, वह संसार को समझ लेता है। जो स्वयं को जान लेता है, वह संसार को समझ लेता है। - ShareChat
#😊ବାସ୍ତବିକ ଖୁସି😇 #🚩ସନାତନ ଧର୍ମ💪 #🪕ଶ୍ରୀ ଜଗନ୍ନାଥ ଭଜନ🎶
😊ବାସ୍ତବିକ ଖୁସି😇 - हर वक्त गलती सामने वाले की नही होती की बुराई ढूँढना सबसे आसान काम है, क्योंकि दूसरों  हर समय वहाँ खुद से सामना नहीं करना पड़ता। इंसान सामने वाले की गलती गिनते गिनते अपनी आदतों पर अंधा हो जाता है, और यहीं से गिरावट शुरू होती है। ज़रा ईमानदारी से सोचो - क्या तुम्हारा  तुम दूसरों से उम्मीद करते व्यवहार सच में वैसा ही साफ़ है जैसा शब्द कभी किसी के आत्मसम्मान को नहीं हो? क्या గౌT बेरुख़ी या चुप्पी किसी को भीतर से तोड़ ক্তবলন, নমা तुम्हारी  नहीं देती ?  हर टकराव में अगर तुम्हें सिर्फ़ दूसरा ही गलत दिखता है, तो समस्या सामने वाले में नहीं   तुम्हारे देखने के तरीके में है।  जाँचना तकलीफ़ देता है, ego को चोट पहुँचती है, लेकिन खुद को  यही चोट इंसान को ज़मीन पर लाती है।जो अपने भीतर झाँकने को सुधारने का नैतिक अधिकार की हिम्मत नहीं करता, वह মুমযী  भी खो देता है। सम्मान की शुरुआत दोष निकालने से नहीं, आत्ममंथन से होती है। हर वक्त गलती सामने वाले की नही होती की बुराई ढूँढना सबसे आसान काम है, क्योंकि दूसरों  हर समय वहाँ खुद से सामना नहीं करना पड़ता। इंसान सामने वाले की गलती गिनते गिनते अपनी आदतों पर अंधा हो जाता है, और यहीं से गिरावट शुरू होती है। ज़रा ईमानदारी से सोचो - क्या तुम्हारा  तुम दूसरों से उम्मीद करते व्यवहार सच में वैसा ही साफ़ है जैसा शब्द कभी किसी के आत्मसम्मान को नहीं हो? क्या గౌT बेरुख़ी या चुप्पी किसी को भीतर से तोड़ ক্তবলন, নমা तुम्हारी  नहीं देती ?  हर टकराव में अगर तुम्हें सिर्फ़ दूसरा ही गलत दिखता है, तो समस्या सामने वाले में नहीं   तुम्हारे देखने के तरीके में है।  जाँचना तकलीफ़ देता है, ego को चोट पहुँचती है, लेकिन खुद को  यही चोट इंसान को ज़मीन पर लाती है।जो अपने भीतर झाँकने को सुधारने का नैतिक अधिकार की हिम्मत नहीं करता, वह মুমযী  भी खो देता है। सम्मान की शुरुआत दोष निकालने से नहीं, आत्ममंथन से होती है। - ShareChat
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