Sunita Devi
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#🛕रामलला प्राण प्रतिष्ठा की तीसरी वर्षगांठ🚩
🛕रामलला प्राण प्रतिष्ठा की तीसरी वर्षगांठ🚩 - 22 January 2026 आप सभी देशवासियों को हमारे तरफ से रामलला प्राण प्रतिष्ठा दिवस की हार्दिक शुभकामनाएं जयश्रीरम ೨92 22 January 2026 आप सभी देशवासियों को हमारे तरफ से रामलला प्राण प्रतिष्ठा दिवस की हार्दिक शुभकामनाएं जयश्रीरम ೨92 - ShareChat
#🌷शुभ गुरुवार
🌷शुभ गुरुवार - कृष्णा कहते हैं कान के कच्चे लोगों के साथ कभी मित्रता न करो सुनाई बातों पर आप से क्योंकि वो सुनी नाराज़ हो जाते हैं और फिर सीधा आप के विश्वास और सम्मान पर वार करते हैं कृष्णा कहते हैं कान के कच्चे लोगों के साथ कभी मित्रता न करो सुनाई बातों पर आप से क्योंकि वो सुनी नाराज़ हो जाते हैं और फिर सीधा आप के विश्वास और सम्मान पर वार करते हैं - ShareChat
#🌷शुभ गुरुवार
🌷शुभ गुरुवार - elgeenef aR2: 63 &il} %peld}' ತ೫ ٤ शुभ प्रभात elgeenef aR2: 63 &il} %peld}' ತ೫ ٤ शुभ प्रभात - ShareChat
#🌞 Good Morning🌞
🌞 Good Morning🌞 - बाद मुंह में अंतिम समय में या मृत्यु के तुलसी और गंगाजल  रखा जाता है? ಘ हिंदू धर्म में मृत्यु के समय या बाद में मुंह में तुलसी दल और गंगाजल डालने की विष्णु 7 परंपरा है, यह आत्मा को मोक्ष और लोक की प्राप्ति कराती है। गंगाजल सभी पापों को धो देता है, अंतिम समय मुंह में डालने से जीवन भर के पाप नष्ट हो जाते हैं, भगवान विष्णु के चरणों से निकला यह जल मोक्ष मार्ग खोलता है। को सबसे प्रिय है, मृत्यु के समय तुलसी दल मुंह में रखने ಘu? எரி भगवान से आत्मा सीधे वैकुंठ को पहुंचती है, गरुड़ पुराण में इसका स्पष्ट उल्लेख है।  और गंगाजल से यमदूत दूर भागते हैं , मान्यता है कि ऐसा करने से आत्मा तुलसी  , विष्णु दूत  को नरक या यातना नहीं भोगनी पडती है, को वैकुंठ ले जाते हैं। आकर आत्मा दल और गंगाजल मुंह में डालें , जब व्यक्ति अंतिम सांस ले रहा हो, तुरंत ரி इससे प्राण शांतिपूर्वक निकलते हैं, आत्मा को कष्ट नहीं होता है, मृत्यु हो जाए तब भी मुंह में तुलसी और गंगाजल डाला जाता है, इससे आत्मा को विष्णु  लोक की गारंटी मिलती है, यह अंतिम संस्कार का अनिवार्य हिस्सा है। गीता में श्रीकृष्ण कहते हैं, जो मेरे नाम का स्मरण कर प्राण त्यागे , वह मेरे से विष्णु २ तुलसी गंगाजल " स्मरण अपने आप होता है। पास आता है, तुलसी गंगाजल डालने से पितृ दोष नहीं लगता है, आने वाली १४ पीढ़ियों को पुण्य मिलता है, कुल में सुखनशांति बनी रहती है। तुलसी गंगाजल डालते समय 'ऊँ नमो भगवते वासुदेवाय ' या 'राधे राधे' बोलें , इससे आत्मा को हरि नाम का बल मिलता है, Rfai मोक्ष ৪ী আানা ট1 3 हमारे पेज से जुड़ने के लिए फॉलो करना न भूलें बाद मुंह में अंतिम समय में या मृत्यु के तुलसी और गंगाजल  रखा जाता है? ಘ हिंदू धर्म में मृत्यु के समय या बाद में मुंह में तुलसी दल और गंगाजल डालने की विष्णु 7 परंपरा है, यह आत्मा को मोक्ष और लोक की प्राप्ति कराती है। गंगाजल सभी पापों को धो देता है, अंतिम समय मुंह में डालने से जीवन भर के पाप नष्ट हो जाते हैं, भगवान विष्णु के चरणों से निकला यह जल मोक्ष मार्ग खोलता है। को सबसे प्रिय है, मृत्यु के समय तुलसी दल मुंह में रखने ಘu? எரி भगवान से आत्मा सीधे वैकुंठ को पहुंचती है, गरुड़ पुराण में इसका स्पष्ट उल्लेख है।  और गंगाजल से यमदूत दूर भागते हैं , मान्यता है कि ऐसा करने से आत्मा तुलसी  , विष्णु दूत  को नरक या यातना नहीं भोगनी पडती है, को वैकुंठ ले जाते हैं। आकर आत्मा दल और गंगाजल मुंह में डालें , जब व्यक्ति अंतिम सांस ले रहा हो, तुरंत ரி इससे प्राण शांतिपूर्वक निकलते हैं, आत्मा को कष्ट नहीं होता है, मृत्यु हो जाए तब भी मुंह में तुलसी और गंगाजल डाला जाता है, इससे आत्मा को विष्णु  लोक की गारंटी मिलती है, यह अंतिम संस्कार का अनिवार्य हिस्सा है। गीता में श्रीकृष्ण कहते हैं, जो मेरे नाम का स्मरण कर प्राण त्यागे , वह मेरे से विष्णु २ तुलसी गंगाजल " स्मरण अपने आप होता है। पास आता है, तुलसी गंगाजल डालने से पितृ दोष नहीं लगता है, आने वाली १४ पीढ़ियों को पुण्य मिलता है, कुल में सुखनशांति बनी रहती है। तुलसी गंगाजल डालते समय 'ऊँ नमो भगवते वासुदेवाय ' या 'राधे राधे' बोलें , इससे आत्मा को हरि नाम का बल मिलता है, Rfai मोक्ष ৪ী আানা ট1 3 हमारे पेज से जुड़ने के लिए फॉलो करना न भूलें - ShareChat
#🌞 Good Morning🌞
🌞 Good Morning🌞 - @od Good Oowing सभी रश्तै अच्छे होते है परजो रश्तै समयपरसाथदें विही संच्चै हौतै है gfaice अप्रभात @d | @od Good Oowing सभी रश्तै अच्छे होते है परजो रश्तै समयपरसाथदें विही संच्चै हौतै है gfaice अप्रभात @d | - ShareChat
#🌞 Good Morning🌞
🌞 Good Morning🌞 - ழqIூ gசI ೮೦೦ #k4d శ్గశ్ని, नमो भगवते 34 वाशुदेवाय श्रीकृष्ण गोविन्द हरे मुरारे। हे नाथ नारायण वासदेव सुषभात्त ழqIூ gசI ೮೦೦ #k4d శ్గశ్ని, नमो भगवते 34 वाशुदेवाय श्रीकृष्ण गोविन्द हरे मुरारे। हे नाथ नारायण वासदेव सुषभात्त - ShareChat