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कांग्रेस की एक और नीचता मैं आपको बताने जा रहा हूं
गुजरात के भावनगर जिले में स्थित अलंग जो पूरी दुनिया में पुराने बड़े-बड़े शिप को तोड़ने के लिए विख्यात है.. अलंग शिप ब्रेकिंग यार्ड पूरे विश्व का सबसे बड़ा शिप ब्रेकिंग यार्ड है और इसका कारण प्राकृतिक है क्योंकि अलंग का समुंदर इतना गहरा है कि दुनिया का बड़ा से बड़ा जहाज भी बगैर किसी परेशानी के एकदम जेटी पर आ जाता है
आजादी के पहले से ही अलंग पूरे दुनिया में शिप ब्रेकिंग उद्योग में आगे रहा
लेकिन चीन भी शिप ब्रेकिंग इंडस्ट्रीज में अपने पांव पसार रहा था लेकिन भारत के व्यापारियों के आगे चीन की दाल नहीं गल रही थी और चीन अपने यहां करोड़ों डॉलर खर्च करके शिप ब्रेकिंग यार्ड बनाने के बाद भी अलंग को टक्कर नहीं दे पा रहा था
फिर कांग्रेस ने चीन के दबाव में प्रदूषण नियंत्रण कानून के तहत अलंग शिप ब्रेकिंग यार्ड को बर्बाद करने की पूरी कोशिश की लेकिन उस वक्त गुजरात में नरेंद्र मोदी मुख्यमंत्री थे उन्होंने कांग्रेस की इस साल के सामने जोर शोर से माहौल बनाया सुप्रीम कोर्ट से लेकर ग्रीनट्रिब्यूनल तक गुजरात सरकार ने केस लड़ा इसलिए कांग्रेस इसमें सफल नहीं हो सकी वरना कांग्रेस की योजना थी भारत के शिप ब्रेकिंग इंडस्ट्रीज को पूरी तरह बर्बाद कर दो
अलंग का शिप ब्रेकिंग इंडस्ट्रीज ऐसा है इसमें लाखों लोगों को रोजगार मिला है और ज्यादातर इस में काम करने वाले यूपी बिहार उड़ीसा बंगाल के लोग हैं कांग्रेस इन सबको सब के पेट पर लात मारना चाह रही थी #साहू समाज साहू परिवार #अब्बड़ सुग्घर हमर छत्तीसगढ़ ❤️🔱🪔 #🫡गणतंत्र दिवस की शुभकामनाएं🤝 #🇮🇳 देशभक्ति #🇮🇳मेरा भारत, मेरी शान
#आदि #शंकराचार्य ने भारत के चारों दिशाओं में चार प्रमुख मठ स्थापित किए:
#श्रृंगेरी मठ (दक्षिण – कर्नाटक)
#ज्योतिर्मठ / बद्रीनाथ मठ (उत्तर – उत्तराखंड)
#द्वारका शारदा मठ (पश्चिम – गुजरात)
#गोवर्धन मठ (पूर्व – पुरी, ओडिशा)
इन मठों के प्रमुख को “शंकराचार्य” कहा जाने लगा।
शंकराचार्य पदवी...
यह कोई जाति या व्यक्तिगत नाम नहीं, बल्कि एक धार्मिक-दार्शनिक पदवी है।
हर मठ में गुरु-शिष्य परंपरा से उत्तराधिकारी नियुक्त होता है।
मठ के प्रमुख को आदि शंकराचार्य का प्रतिनिधि माना जाता है, इसलिए उन्हें शंकराचार्य कहा जाता है।
एक आदि शंकराचार्य जी थे पैदल सारा धर्म प्रसार किया.. आज उनके नाम पर बैठे ये लोग पालकी से उतरकर पैदल पचास मीटर चलकर गंगा स्नान करने को तैयार नहीं हैँ... 😕😕🙏🙏🙏 #साहू समाज साहू परिवार #अब्बड़ सुग्घर हमर छत्तीसगढ़ ❤️🔱🪔 #🕉️सनातन धर्म🚩 #🙏🏻आध्यात्मिकता😇 #🤗जया किशोरी जी🕉️
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भारतीय सेना की ताकत और रणनीतिक सोच को नया आयाम देने वाली ‘भैरव बटालियन’ इस वर्ष 77वें गणतंत्र दिवस परेड में पहली बार कर्तव्य पथ पर नजर आएगी। यह पल सिर्फ एक सैन्य टुकड़ी के मार्च का नहीं होगा, बल्कि भारत की आधुनिक युद्ध क्षमता, साहसिक सोच और भविष्य की तैयारियों का प्रतीक बनेगा। भैरव बटालियन के साथ शक्तिबाण बटालियन की भागीदारी यह दर्शाएगी कि भारतीय सेना परंपरा और तकनीक के संतुलन के साथ आगे बढ़ रही है।
भैरव बटालियन का नाम भगवान शिव के सबसे उग्र और शक्तिशाली स्वरूप ‘भैरव’ से प्रेरित है, जो शत्रुओं के लिए भय और अपने लिए सुरक्षा का प्रतीक माने जाते हैं। यही दर्शन इस बटालियन के प्रशिक्षण, अनुशासन और ऑपरेशनल सोच में दिखाई देता है। इसे एक विशेष रूप से प्रशिक्षित इन्फैंट्री बटालियन के तौर पर विकसित किया गया है, जो कठिन से कठिन परिस्थितियों में भी त्वरित और निर्णायक कार्रवाई करने में सक्षम है।
इस बटालियन का गठन हाल ही में अक्टूबर में हुआ है और इसका प्रतीक कोबरा चिह्न है। कोबरा की तरह यह बटालियन भी चुपचाप, तेजी से और घातक तरीके से वार करने के लिए जानी जाएगी। इसका स्पष्ट संदेश है—एक बार निशाना साधा गया, तो दुश्मन के बचने की संभावना बेहद कम। वर्तमान में भैरव बटालियन की प्रत्येक टुकड़ी में लगभग 250 अत्यंत चुने हुए और विशेष रूप से प्रशिक्षित जवान शामिल हैं।
भैरव बटालियन के सैनिक सामान्य सैनिकों से अलग होते हैं क्योंकि इनका चयन, प्रशिक्षण और भूमिका कहीं अधिक चुनौतीपूर्ण होती है। इन्हें आतंकवाद-रोधी अभियानों, क्विक रिस्पॉन्स ऑपरेशन्स, विशेष मिशनों और सीमावर्ती इलाकों में तैनाती के लिए तैयार किया जाता है। पहाड़ी क्षेत्रों, घने जंगलों, बर्फीले इलाकों और दुर्गम भौगोलिक परिस्थितियों में युद्ध अभ्यास इनकी ट्रेनिंग का अहम हिस्सा है। आधुनिक हथियार, निगरानी तकनीक और नई युद्ध पद्धतियों में दक्षता इन्हें भविष्य के युद्ध के लिए पूरी तरह तैयार बनाती है।
भैरव बटालियन की तैनाती एलएसी से लेकर एलओसी तक की जा सकती है, यानी चीन और पाकिस्तान दोनों सीमाओं पर किसी भी आपात स्थिति में यह बल निर्णायक भूमिका निभा सकता है। यह बटालियन भारतीय सेना की उस नई सोच को दर्शाती है, जिसमें केवल प्रतिक्रिया नहीं, बल्कि प्रभावी प्रतिरोध और रणनीतिक बढ़त पर जोर दिया जा रहा है।
गणतंत्र दिवस परेड में भैरव बटालियन की मौजूदगी देशवासियों के लिए गर्व का विषय होगी और दुश्मनों के लिए एक स्पष्ट संदेश—भारत अब न सिर्फ अपनी सीमाओं की रक्षा करता है, बल्कि आधुनिक युद्ध तकनीक और आक्रामक रणनीति के साथ हर चुनौती का सामना करने को तैयार है। भैरव बटालियन वास्तव में नए भारत की सैन्य शक्ति और आत्मविश्वास का जीवंत प्रतीक है। #साहू समाज साहू परिवार #🫡गणतंत्र दिवस की शुभकामनाएं🤝 #🫡गणतंत्र दिवस Status⌛ #🇮🇳 देशभक्ति #अब्बड़ सुग्घर हमर छत्तीसगढ़ ❤️🔱🪔
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