तुम सारी ज़िंदगी बाहर ढूंढते रहे…
पर सच ये है कि जो तुम ढूंढ रहे हो, वो तुम्हारे अंदर ही छुपा है।
तीसरा तिल कोई कल्पना नहीं, एक अनुभव है।
जब इंसान अपनी आँखें बंद करके भीतर उतरता है, तभी असली यात्रा शुरू होती है।
आँखों के पीछे वही बिंदु है, जहाँ से:
• मन शांत होता है
• आत्मा जागती है
• और अंदर का प्रकाश दिखने लगता है
जितना तुम बाहर भागोगे, उतना भटकते जाओगे।
और जिस दिन तुमने अंदर देखना शुरू कर दिया, उसी दिन से रास्ता साफ हो जाएगा।
बाहर की दुनिया शोर है,
अंदर की दुनिया सच है।
अब फैसला तुम्हारा है…
भीतर जाना है या यूँ ही भटकते रहना है? #🙏सुविचार📿